मछली और झींगा पालन के लिए सरकार दे रही 14 लाख रुपए की सब्सिडी

मछली और झींगा पालन के लिए सरकार दे रही 14 लाख रुपए की सब्सिडी
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जलभराव और खारे पानी वाले क्षेत्रों में मछली और झींगा पालन का मौका, सरकार दे रही 14 लाख रुपए की सब्सिडी

Fish Farming Subsidy Scheme 2025 : भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत देश में मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएमएमएसवाई (PMMSY) मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य देश में मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, गुणवत्ता में सुधार करना, और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना है। यह योजना मछुआरों/ किसानों को मछली पालन (fish farming) के लिए विभिन्न गतिविधियों जैसे तालाबों, पिंजरों, हैचरी और नर्सरी के निर्माण तथा वेंटिलेशन सिस्टम्स और अन्य उपकरणों की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती है। साथ ही इस योजना के तहत राज्यों में नई परियोजनाएं लागू कर नदियों, तालाबों, नहरों, झीलों, जलभराव और खारे पानी वाले क्षेत्रों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जाता है। इस कड़ी में हरियाणा के जलभराव और खारे पानी वाले क्षेत्रों में मछली पालन और झींगा उत्पादन करने का अच्छा मौका है। इन क्षेत्रों में मछली पालन (Fish farming) के लिए किसानों एवं मत्स्य पालकों को सरकार 14 लाख रुपए की सब्सिडी दे रही है। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने यह बात कृषि एवं किसान कल्याण तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कही।

जलभराव वाले क्षेत्रों में मछली पालन को बढ़ावा (Promotion of fish farming in waterlogged areas)

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा कृषि एवं किसान कल्याण तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने मत्स्य पालन और कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया और अधिकारियों से पहले से चल रही परियोजनाओं में तेजी लाने को कहा। उन्होंने वैश्विक स्तर पर मछली पालन को बढ़ावा देकर कृषकों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत तलाशने की आवश्यकता जताई। कृषि मंत्री राणा ने कहा कि जलभराव वाले क्षेत्रों के पानी का उपयोग मछली पालन और झींगा उत्पादन के लिए किया जा सकता है, जिससे राज्य में 'ब्लू रेवोल्यूशन' को बढ़ावा मिलेगा। 

खारे पानी वाले क्षेत्रों में जलीय कृषि (Aquaculture in brackish water areas)

कृषि मंत्री ने जल संसाधनों के उपयोग को अनुकूलतम बनाने के लिए मत्स्य पालन, कृषि और मृदा संरक्षण विभागों के बीच संयुक्त बैठक आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जलभराव वाले क्षेत्रों के पानी का उपयोग मत्स्य पालन और झींगा पालन दोनों के लिए कारगर तरीके से किया जा सकता है, जिससे राज्य में एक टिकाऊ “ब्लू रेवोल्यूशन” को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को अतिरिक्त खारे पानी वाले क्षेत्रों की पहचान कर और उन्हें जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) के उपयोग हेतु परियोजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया। अधिकारियों से आग्रह किया कि वे वन विभाग के साथ मिलकर क्षारिय भूमि पर यूकेलिप्टस और अन्य पेड़ लगाएं, ताकि किसानों के लिए आय का एक वैकल्पिक स्रोत सृजित हो सके। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्य सरकार टिकाऊ, उच्च आय पैदा करने वाले विकल्पों को बढ़ावा देकर पारंपरिक खेती पर निर्भरता को कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

मछली पालन के लिए सब्सिडी (Subsidy for fish farming)

कृषि मंत्री ने कहा कि जून के बाद सरकार का लक्ष्य एक लाख एकड़ खारे पानी की भूमि को पुनः प्राप्त कर उसे उत्पादक संसाधन में बदलना है। उन्होंने कहा कि सरकार मछली पालन के लिए प्रति हेक्टेयर 14 लाख रुपए की सब्सिडी दे रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एक समर्पित अभियान के माध्यम से पात्र किसानों को इस योजना से जोड़ें और उन्हें मत्स्य पालन के लाभों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय समितियों का गठन किया जाएगा। बैठक में शामिल कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजा शेखर वुंडरू ने आश्वासन दिया कि झींगा पालन के लिए खारे पानी के संसाधनों का प्रभावी ढंग से दोहन करने के लिए अंतर-विभागीय समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी।

मत्स्य पालन परियोजनाओं पर भी चर्चा (Fisheries projects also discussed)

इस अवसर पर भिवानी और सिरसा जिलों में मत्स्य पालन परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं के अंतिम ड्रॉइंग को इस माह के अंत तक फाइनल कर लिया जाए। अधिकारियों ने बताया कि भिवानी परियोजना के लिए भूमि का कब्ज़ा पहले ही सुरक्षित कर लिया गया है तथा बिजली और पानी की आपूर्ति के लिए ब्लूप्रिंट तैयार किए जा रहे हैं। टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी ताकि अप्रैल के अंत तक कार्य आरंभ हो सके। सिरसा जिले में प्रस्तावित मछली फार्म के संबंध में मंत्री ने विभाग को समय पर पूरा करने के लिए प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। 25 एकड़ की परियोजना के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया जारी है और उपायुक्त को भूमि आवंटन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। 

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