Dairy Farming Sarkari Yojana : किसानों की आय बढ़ाने के लिए देश में कृषि के साथ-साथ पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्योंकि पशुओं के जरिए किसानों को अतिरिक्त आय का साधन मिलता है और खेती के विभिन्न कृषि कार्यों में ये किसानों की सहायता भी करते हैं। साथ ही पशुओं से कंपोस्ट/जैविक खाद के लिए गोबर भी मिलता है। किसान पशुओं के दुग्ध उत्पादन से लाखों रुपए सालाना की कमाई कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इससे न केवल रोजगार के नए अवसर खुलते हैं, बल्कि यह गांव में रहने वाले किसान और बेरोजगार युवक/ युवतियां और महिलाओं को एक अच्छा आजीविका रोजगार भी मिलता है।
इसे देखते हुए केंद्र सरकार और राज्य की सरकारें दोनों मिलकर विभिन्न सरकारी योजनाएं संचालित कर रही है, जिससे केंद्र शासित प्रदेशों एवं राज्यों में पशुपालन को बढ़ावा दिया जाता है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन और डेयरी विभाग भारत सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसके तहत आवेदन करके पशुपालन और डेयरी फार्मिंग शुरू करने, पशुओं के शेड (घर) बनाने, डेयरी फार्म संरचना के मरम्मत एवं बुनियादी ढांचे का निर्माण कराने और गाय-भैंस जैसे अन्य दुधारू मवेशियों को खरीदने के लिए लाखों रुपए की वित्तीय सहायता बैंकों से प्राप्त कर सकते हैं, जिस पर सरकार अनुदान एवं ब्याज सब्सिडी भी प्रदान करती है।
राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री, भारत सरकार ने राज्यसभा में इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा इन योजनाओं को देश के सभी गांवों में लागू किया गया है। आइए पशुपालन और डेयरी फार्मिंग के चलाई जा रही इन सरकार योजनाओं के बारे में जानते हैं।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में 2055 करोड़ रुपए के आवंटित बजट के साथ राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना (National Gokul Mission Yojana) को देश में लागू किया गया। इस योजना का उद्देश्य देश में स्वदेशी गोवंश के संरक्षण, उत्पादकता में सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से स्वदेशी गोजातीय नस्लों का विकास करना है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन का कार्यान्वयन केंद्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा किया जा रहा है।
सरकार इस योजना के तहत किसान एवं पशुपालकों को वह सभी सुविधाएं देती है, जो पशुपालन एवं डेयरी फार्मिंग के लिए जरूरी होती है। इस योजना के घटक जैसे पशुपालन के लिए किसान जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करना, प्रजनन शिविर, दूध उत्पादन प्रतियोगिता, बछड़ा स्वास्थ्य में सुधार सम्मेलन और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। पशु वैज्ञानिकों के माध्यम से पशुपालकों को प्रजनन की नवीनतम तकनीकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें लिंग-पृथक्कृत वीर्य, कृत्रिम गर्भाधान (एआई), बोवाइन इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और जीनोमिक चयन तकनीकें शामिल हैं।
भारत सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के लिए 2,400 करोड़ रुपए का बजट आवंटन करते हुए इसे 5 साल के लिए आगे बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के अंतर्गत भारत का कोई भी मूल निवासी लघु-सीमांत किसान अथवा पशुपालक लाभ के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह आवेदन नजदीकी पशुपालन एवं डेयरी विभाग में किए जा सकते हैं। आवेदन करने के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बताया कि सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) योजना का उद्देश्य भोजन और चारे के विकास समेत ग्रामीण इलाकों में मुर्गी, भेड़, बकरी और सुअर पालन क्षेत्र में उद्यमिता विकास और नस्ल सुधार कर पशु उत्पादकता में वृद्धि के माध्यम से रोजगार उत्पन्न करना है। राष्ट्रीय पशुधन योजना में संशोधन कर इसमें तीन उप मिशन को जोड़ा गया, जिनमें पशुधन और कुक्कुट के नस्ल विकास पर उपमिशन, फीड और चारा विकास पर उपमिशन और नवाचार और विस्तार पर उपमिशन शामिल हैं। इन उपमिशनों के तहत राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को प्रशिक्षण व पशुपालन से संबंधित किसानों/समूहों, प्रजनक संघों का क्षमता निर्माण, पशुपालन से जुड़े प्रचार-प्रसार गतिविधियों, सेमिनार, कार्यशालाएं, कृषि उपज उत्पादकों के लिए खेत संबंधी विद्यालयों के संचालन, किसानों के कई भ्रमण कार्यक्रम, प्रदर्शन गतिविधियों, सोशल मीडिया और दृश्य-श्रव्य सहायता के माध्यम से जागरूकता पैदा करने आदि के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना में भेड़, बकरी और सूकरों जैसे पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान की नवीनतम तकनीक को बढ़ावा दिया जाता है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) के तहत पशुपालन और डेयरी व्यवसाय के लिए किसान राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, नाबार्ड से पुर्नवित्त प्राप्त अन्य पात्र संस्थाएं, वाणिज्य बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य सहकारी बैंक से 25 लाख रुपए से लेकर 50 लाख रुपए तक का लोन प्राप्त करते हैं। इस लोन पर किसानों को 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। सब्सिडी राशि समान किस्तों में जारी की जाती है। पहली किस्त परियोजना की शुरुआत में और दूसरी किस्त परियोजना के पूरा होने के बाद दी जाती है। कार्यशील पूंजी संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए 4 प्रतिशत का ब्याज अनुदान प्रदान किया जाता है।
पशुधन मिशन योजना में आवेदन आधिकारिक वेबसाइट पर पोर्टल https://nlm.udyamimitra.in/ पर किया जा सकता है। अपने क्षेत्र के निकटतम पशुपालन विभाग एवं डेयरी विभाग बोर्ड से संपर्क कर योजना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विभाग द्वारा 10 सितंबर 2020 को ई-गोपाला ऐप भी शुरू किया गया, जो किसानों को पशुओं के संतुलित आहार के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) वर्ष 2014-15 से कार्यान्वित किया जा रहा है। एनपीडीडी योजना का उद्देश्य दूध और दूध उत्पादों की गुणवत्ता को बढ़ाना और संगठित दूध खरीद की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इस योजना के दो घटक हैं, जिसमें घटक 'ए' के तहत राज्य सहकारी डेयरी संघों/जिला सहकारी दूध उत्पादक संघों/एसएचजी द्वारा संचालित निजी डेयरी/दूध उत्पादक कंपनियों/किसान उत्पादक संगठनों के लिए गुणवत्तापूर्ण दूध परीक्षण उपकरणों के साथ-साथ प्राथमिक शीतलन सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण/सुदृढ़ीकरण पर ध्यान केंद्रित करना है। घटक 'बी' (सहकारिता के माध्यम से डेयरी) जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के साथ पहले से हस्ताक्षरित परियोजना समझौते के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह एक बाहरी सहायता प्राप्त परियोजना है। इसे 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार में लागू किया गया है। गांव से राज्य स्तर तक हितधारक संस्थानों की क्षमता निर्माण को मजबूत करने के उद्देश्य से आवश्यक डेयरी बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है।
पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम योजना का उद्देश्य खुरपका-मुंहपका और ब्रुसेलोसिस जैसी पशु बीमारियों के नियंत्रण के लिए सहायता प्रदान करने तथा पशुधन के अन्य संक्रामक रोगों पर नियंत्रण करना है। इस योजना की शुरूआत राज्य सरकारों को सहायता प्रदान करने के लक्ष्य के साथ की गई। पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम योजना के तहत किसानों के घर-द्वार पर गुणवत्तापूर्ण पशुधन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए सचल पशु चिकित्सा यूनिट की स्थापना की जाती है। पशुपालक और किसानों में जागरूकता पैदा करने और प्रचार-प्रसार के लिए इस योजना के तहत राज्यों को सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
इस योजना के तहत डेयरी सहकारी समितियों और डेयरी कार्य में जुड़े हुए किसानों/ सहकारी डेयरी संघों/जिला सहकारी दूध उत्पादक संघों/एसएचजी द्वारा संचालित निजी डेयरी/दूध उत्पादक कंपनियों/किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 से कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज अनुदान के रूप में एकमुश्त सहायता शुरू की गई है।
किसानों/पशुपालकों में जागरूकता पैदा करने के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार ने “ए हेल्प” (पशुधन उत्पादन के स्वास्थ्य एवं उनकी संख्या बढ़ाने के लिए मान्यता प्राप्त एजेंट) को शामिल किया है। यह स्थानीय पशुधन संसाधन व्यक्ति और पशुपालकों तथा पशु चिकित्सा सेवा प्रदाताओं के बीच एक संपर्क बिंदु के तौर पर कार्य कर रहा है। विभाग द्वारा किसानों के घर-घर जाकर कृत्रिम गर्भाधान सेवा देने के लिए मैत्री (ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन) को शामिल किया जा रहा है। मैत्री किसान जागरूकता, पशुओं के टीकाकरण, प्राथमिक उपचार, पशु पोषण सलाह आदि का कार्य भी संभाल रहे हैं। मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग द्वारा गोबर के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभाग के प्रयासों से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने यूपी के वाराणसी दुग्ध संघ में 4000 क्यूबिक मीटर बायोगैस संयंत्र की स्थापना की है, जिसमें किसानों से खरीदे गए 100 मीट्रिक टन गोबर का प्रतिदिन इस्तेमाल किया जाएगा।
भारत सरकार की ओर से किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC) कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना के तहत सरकार ने पहली बार पशुपालक किसानों और मत्स्य पालकों को कार्यशील पूंजी संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) की सुविधा प्रदान की है। इसमें चाहे व्यक्तिगत किसान हों या संयुक्त उधारकर्ता अथवा संयुक्त देयता समूह या फिर स्वयं सहायता समूह, वे सभी इस केसीसी योजना के तहत प्रोत्साहन पाने के पात्र हैं। विशेष बात यह है कि इस योजना में स्वामित्व वाले / किराए पर / पट्टे पर शेड रखने वाले काश्तकार भी शामिल किए हैं।
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