कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग फसलों को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए जैविक खेती करना लाभदायक होता है। भारतीय किसानों को भी जैविक खेती के महत्व को समझना बहुत जरूरी है। सरकार की वर्मी कम्पोस्ट इकाई सब्सिडी योजना के तहत किसानों को जैविक खेती करने पर सब्सिडी मिलती है। यह योजना विभिन्न जिलों में चल रही है। आइए ट्रैक्टर गुरु के माध्यम से जानते हैं कि यह योजना क्या है और कैसे यह किसानों के लिए फायदेमंद है।
जैविक खेती कृषि की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया जाता। इसमें प्राकृतिक चीज़ें जैसे गोबर की खाद, जीवामृत आदि का उपयोग किया जाता है। जैविक खेती पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाती। खेती की इस प्रक्रिया को सबसे अच्छी प्रक्रिया माना जाता है।
जैविक खेती में सबसे ज़्यादा मांग गोबर और केंचुआ खाद की होती है। केंचुआ खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए यह योजना चल रही है, जिसमें किसानों को दो प्रकार की यूनिट्स के लिए सब्सिडी दी जाती है:
1. RCC (Reinforced Cement Concrete) वर्मी कम्पोस्ट यूनिट
आकार : 30 x 8 x 2.5 फीट
सब्सिडी : कुल निर्माण लागत का 50% या अधिकतम ₹50,000 प्रति यूनिट
विशेषता : यह उन किसानों के लिए उपयुक्त है जो बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार करना चाहते हैं।
2. HDPE वर्मी बेड यूनिट
आकार : 12 फीट x 4 फीट x 2 फीट
सब्सिडी : कुल लागत का 50% या अधिकतम ₹8,000 प्रति यूनिट
विशेषता : यह उन किसानों के लिए उपयुक्त है जो कम लागत में शुरुआत कर रहे हैं।
केंचुआ खाद बनाने की विधि बहुत ही सरल है:
सबसे पहले एक महीने पुराना गोबर लें, क्योंकि ताजा गोबर अत्यधिक गर्मी उत्पन्न करता है जिससे केंचुए मर सकते हैं।
फिर भूसे के छोटे-छोटे टुकड़े नीचे बिछाएं और ऊपर से घास या हल्की मिट्टी डालें।
उसके बाद हल्की सिंचाई करें और गोबर व घास की परतें एक के ऊपर एक डालकर तीन परतें बनाएं। तीसरी परत के बाद केंचुओं को छोड़ दें।
फिर जूट के बोरे से ढंककर नियमित हल्की सिंचाई करें।
करीब 45 दिन में आपकी केंचुआ खाद तैयार हो जाएगी।
खेत में वर्मीकंपोस्ट का उपयोग कई कृषि उपकरणों से किया जा सकता है, जिनमें फावड़ा, कल्टीवेटर, और ट्रैक्टर-माउंटेड स्प्रेडर शामिल हैं।
फावड़ा: वर्मीकंपोस्ट को खेत में फैलाने के लिए फावड़ा एक सरल और प्रभावी उपकरण है।
कल्टीवेटर: कल्टीवेटर का उपयोग वर्मीकंपोस्ट को मिट्टी में मिलाने के लिए किया जा सकता है, जिससे यह पौधों की जड़ों तक आसानी से पहुंच सके।
ट्रैक्टर-माउंटेड स्प्रेडर: बड़े खेतों के लिए, ट्रैक्टर-माउंटेड स्प्रेडर एक उपकरण है जो वर्मीकंपोस्ट को समान रूप से वितरित करता है।
हाथ से फैलाना : छोटे क्षेत्रों या क्यारियों में, वर्मीकंपोस्ट को हाथ से भी फैलाया जा सकता है।
वर्मीकम्पोस्ट इकाई सब्सिडी योजना से जुड़ने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना पड़ेगा:
सबसे पहले राजकिसान पोर्टल (https://rajkisan.rajasthan.gov.in/) पर जाकर एसएसओ आईडी या जनआधार आईडी का उपयोग करके लॉगिन करें।
यदि आप नए यूजर हैं तो "Registration" विकल्प पर क्लिक करें और रजिस्टर करें।
रजिस्टर करने के बाद SSO पोर्टल में अपनी किसान प्रोफाइल बनाएं।
फिर डैशबोर्ड में उपलब्ध "RAJ-KISAN" विकल्प पर क्लिक करें।
"Farmer" सेक्शन में जाएं और "Application Entry Request" पर क्लिक करें।
वहां अपनी जन आधार ID और आधार कार्ड ID दर्ज करें।
उसके बाद सभी आवश्यक दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करें।
दस्तावेज अपलोड होने के बाद आवेदन फॉर्म को सबमिट करें।
इस प्रक्रिया में ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम भी उपलब्ध है, जिससे किसान अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं।
ट्रैक्टर गुरु हमेशा आपको अपडेट रखता है। इसके लिए ट्रैक्टरों के नये मॉडलों और उनके कृषि उपयोग के बारे में एग्रीकल्चर खबरें प्रकाशित की जाती हैं। प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों वीएसटी ट्रैक्टर, महिंद्रा ट्रैक्टर आदि की मासिक सेल्स रिपोर्ट भी हम प्रकाशित करते हैं जिसमें ट्रैक्टरों की थोक व खुदरा बिक्री की विस्तृत जानकारी दी जाती है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।
अगर आप नए ट्रैक्टर, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण बेचने या खरीदने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार और विक्रेता आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु को ट्रैक्टर जंक्शन के साथ शेयर करें।
प्रश्न 1. जैविक खेती क्या है?
उत्तर : एक ऐसी कृषि प्रणाली जो रसायनों, सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के बिना प्राकृतिक तरीकों पर निर्भर करती है।
प्रश्न 2. केंचुआ खाद बनाने की विधि क्या है?
उत्तर : नीचे 6 इंच की एक परत जिसमें आधा सड़ा हुआ गोबर या वर्मीकम्पोस्ट हो, उसमें थोड़ा उपजाऊ मिट्टी मिलाकर फैला दें, जिसमें केंचुआ को प्रारंभिक अवस्था में भोजन मिल सके। इसके बाद 40 केंचुआ प्रति वर्ग फीट के हिसाब से उसमें डाल दें।
प्रश्न 3. राजस्थान सरकार वर्मी कंपोस्ट पर कितनी सब्सिडी देती है?
उत्तर : राजस्थान सरकार वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) इकाई स्थापित करने पर लागत की 50 प्रतिशत सब्सिडी देती है।
प्रश्न 4. महाराष्ट्र में वर्मी कंपोस्ट सब्सिडी क्या है?
उत्तर : महाराष्ट्र सरकार किसानों को वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह लागत का 50% तक होती है।
प्रश्न 5. 50 किलो वर्मी कम्पोस्ट की कीमत क्या है?
उत्तर : 50 किलो वर्मी कम्पोस्ट की कीमत ₹6/किलोग्राम है।
Website - TractorGuru.in
Instagram - TractorGuru Instagram Page
Facebook - TractorGuru Facebook Page
किसानों के लिए गन्ना बीज पर ₹310 सब्सिडी, कृषि यंत्रों पर 80% तक अनुदान
सोलर ड्रायर पर 1.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी, जानें आवेदन प्रक्रिया और पात्रता
Yamaha Strengthens Prospr with Smart Weed-Control Technology