Nand Baba Milk Mission : एक ओर जहां भारत ने अमेरिका को यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की जीविका और देश के स्वदेशी डेयरी उद्योग की स्थिरता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, दूसरी तरफ भारत सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारें देश में स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को बढ़ावा देने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य न केवल देशी गायों का संरक्षण, बल्कि किसानों और पशुपालकों को आर्थिक मदद भी सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में अब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी बड़ा कदम उठाया गया है। योगी सरकार ने प्रदेश में 'नंद बाबा दुग्ध मिशन योजना' चला रखी है। इस मिशन के तहत प्रदेश के किसानों और पशुपालकों के लिए चार प्रमुख योजनाएं शुरू की गई हैं, जिसमें सरकार साहीवाल, गिर, थारपारकर गायों का पालन के लिए किसानों को 31.25 लाख रुपए तक की सब्सिडी दे रही है। ऐसे में जो पशुपालक देसी गायों का पालन करना चाहते हैं, उनके पास अब सुनहरा मौका है।
प्रदेश सरकार ने नंद बाबा दुग्ध मिशन योजना के अंतर्गत नंदनी कृषक योजना, “मिनी नंदिनी समृद्ध कृषक योजना, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संसाधन योजना और मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक योजना शुरू की है। इन चारों योजना का उद्देश्य प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्वदेशी गायों के संरक्षण व संवर्धन के साथ दूध उत्पादन में वृद्धि करना है। पशुपालकों और किसानों को आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए शुरू की गई ये योजनाएं पशुपालन से जुड़े किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने का सुनहरा अवसर है।
इस योजना के तहत पशुपालक साहीवाल, गिर या थारपारकर जैसी स्वदेशी नस्ल की 25 गायों का पालन कर सकते हैं। इसमें योजना के तहत गायों की पालन इकाई स्थापित करने के लिए 62.5 लाख रुपए की योजना लागत निर्धारित की गई है, जिसमें अधिकतम अनुदान 31.25 लाख रुपए पशुपालकों को मिलेगा। किसानों को यह सभी गाय उत्तर प्रदेश के बाहर से मंगानी होंगी। यह गायें उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता और स्वास्थ्य के लिहाज से श्रेष्ठ मानी जाती हैं। इस योजना में आवेदन करने के लिए किसान के पास कम से कम 2 एकड़ भूमि होना अनिवार्य है। यह ज़मीन स्वयं की हो, साझेदारी (co-ownership) में हो, या लीज पर ली गई हो — सभी मान्य होंगी। यह सारे आवेदन ऑनलाइन है। इच्छुक पशुपालक और किसान योजना का लाभ लेने के लिए https://nandbabadugdhmission.up.gov.in पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
दूसरी योजना मिनी नंदिनी समृद्धि कृषक योजना है। इस योजना के तहत 10 गायों (साहीवाल, गिर, थारपारकर प्रजाति) की पालन इकाई स्थापित करने के लिए 23.60 लाख रुपए की परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत अधिकतम 11.80 लाख रुपए का अनुदान दो चरणों में प्रदान किया जाएगा। पहले चरण में आधारभूत संरचना तैयार होने पर 25 प्रतिशत (5.90 लाख रुपए) एवं दूसरे चरण में गायों की खरीद के बाद 25 प्रतिशत (5.90 लाख रुपए) अनुदान मिलेगा। लाभार्थी किसान को 15 फीसदी अंश और 35 प्रतिशत बैंक ऋण देना होगा। इस योजना का लाभ पाने के लिए किसान के पास न्यूनतम एक एकड़ भूमि होनी चाहिए। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है, योजना के लिए आवेदन 13 अगस्त 2025 तक स्वीकार किए जाएंगे। गायों का क्रय यथासंभव प्रदेश के बाहर ब्रीडिंग ट्रैक्ट से करना होगा और प्रत्येक गाय का ईयर टैग व बीमा अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संसाधन योजना के अंतर्गत 2 स्वदेशी नस्ल की गायों का किसान को पालन करना होगा। यह 2 लाख रुपए की योजना है, जिसमें किसान को 80000 का अनुदान मिलेगा। यह योजना छोटे किसानों के उपयुक्त है। इस योजना का लाभ पाने के लिए किसान nandbabadugdhmission.up.gov.in वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
चौथी योजना है मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक योजना है। इस योजना का लाभ उन किसानों को दिया जा रहा है, जो गाय का पशुपालन करते हैं और रोजाना गाय 8 लीटर गाय दूध देती हो। उन्हें 10 से 15 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता दी जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास जमीन के कागजात होने चाहिए और आधार कार्ड तथा 5 वर्ष का अनुभव पशुपालन कार्ड होना चाहिए। इन सभी कागजातों के साथ किसान अपना ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
इन सभी योजनाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। किसान nandbabadugdhmission.up.gov.in पर जाकर अपनी योजना चुनें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करके आवेदन कर सकते हैं। योजना के लिए 0.20 एकड़ भूमि आधारभूत संरचना एवं 0.80 एकड़ चारा उत्पादनके लिए जरूरी है, जो खुद की, पैतृक, साझेदारी या सात वर्ष के पंजीकृत अनुबंध (लीज) पर होनी चाहिए। निर्धारित भूमि जलभराव से मुक्त हो। पहले कामधेनु, मिनी व माइक्रो कामधेनु, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना या मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के लाभार्थी इसके लिए पात्र नहीं होंगे। अधिक आवेदनों की स्थिति में चयन ई-लाटरी के माध्यम से होगा। अनुदान की राशि डीबीटी के जरिए लाभार्थी के बैंक खाते में जमा होगी।
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