केंद्र की मोदी सरकार अपने ऐतिहासिक फैसलों से हर आम आदमी को फायदा पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 11 सितंबर को आयोजित केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में सरकार ने एक ही दिन में कई बड़े फैसले लिए हैं। इनमें से 6 फैसलों को गेमचेंजर माना जा रहा है। इन फैसलों में बुजुर्गों के स्वास्थ्य, किसानों के लिए मौसम की जानकारी, जल विद्युत परियोजना, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन व ग्रामीण इलाकों में सड़कों के विस्तार की योजना शामिल है। आइए, इन योजनाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।
मोदी कैबिनेट ने पीएम आयुष्मान योजना का विस्तार करने का फैसला किया है। इस फैसले के अनुसार 70 साल से ऊपर के सभी बुजुर्गों को “आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना” का लाभ दिया जाएगा। अब केंद्र सरकार ने इस योजना में अधिकतम आयु सीमा के प्रावधान को खत्म कर दिया है और 70 साल से बड़े हर बुजुर्ग को आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख तक चिकित्सकीय सुविधा का लाभ मिल सकेगा। इनकम लिमिट भी हटा दी गई है। अब 70 साल और उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिक, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रतिबद्धता जताई थी कि 70 साल से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान भारत पीएम जन आरोग्य योजना में कवरेज दिया जाएगा। ऐसे कई परिवार हैं जो पहले से ही इसमें कवर हैं और उनमें वरिष्ठ नागरिक हैं। ऐसे परिवारों में अतिरिक्त टॉप-अप कवरेज 5 लाख रुपये का होगा। इस सुविधा के विस्तार का उद्देश्य लगभग ऐसे 4.5 करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाना है, जिनमें 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं। उन्हें प्रति परिवार 5 लाख रुपये का निशुल्क हेल्थ बीमा कवर मिलेगा। उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत देशभर के चिह्नित सरकारी और निजी अस्पतालों में 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है। अस्पताल में एडमिट होने के 10 दिन पहले और बाद के चिकित्सा खर्च का भुगतान भी इस योजना के तहत किया जाता है।
पीएम मोदी के दूसरे बड़े फैसले में “मिशन मौसम” की पहल शामिल है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगले दो वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये की लागत के साथ ‘मिशन मौसम’ नामक महत्वाकांक्षी पहल के शुभारंभ को हरी झंडी दे दी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की अगुवाई में, इस मिशन का उद्देश्य मौसम और जलवायु से संबंधित विज्ञान,अनुसंधान और सेवाओं में भारत की क्षमता में महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव लाना है।
‘मिशन मौसम’ को मौसम निगरानी, पूर्वानुमान और चरम मौसम घटना प्रबंधन में भारत की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस योजना के तहत उन्नत अवलोकन प्रणाली, उच्च दक्षता की कम्प्यूटिंग प्रणाली, अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा मशीन लर्निंग (ML) तकनीकों को एकीकृत किया जाएगा, ताकि अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों ही पैमानों पर सटीक मौसम पूर्वानुमानों का पता लगाया जा सके। इस पहल के तहत मानसून पूर्वानुमान, वायु गुणवत्ता अलर्ट, चरम मौसम की घटनाओं के पूर्वानुमान और कोहरे, ओलावृष्टि और भारी बारिश जैसी घटनाओं के लिए मौसम हस्तक्षेप में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
मोदी मंत्रिमंडल का तीसरा बड़ा फैसला जल विद्युत परियोजनाओं के संबंध में है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12461 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ जल विद्युत परियोजनाओं (एचईपी) से संबंधित बुनियादी ढांचे को सक्षम करने की लागत के लिए बजटीय समर्थन की योजना में संशोधन योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2024-25 से वित्तीय वर्ष 2031-32 तक लागू की जाएगी। लगभग 31350 मेगावाट की संचयी उत्पादन क्षमता वाली यह योजना निजी क्षेत्र की परियोजनाओं सहित 25 मेगावाट से अधिक क्षमता की सभी जल विद्युत परियोजनाओं पर लागू होगी, जिन्हें पारदर्शी आधार पर आवंटित किया गया है।
यह संशोधित योजना जल विद्युत परियोजनाओं के तेजी से विकास में मदद करेगी, दूरदराज एवं पहाड़ी परियोजना स्थलों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाएगी और परिवहन, पर्यटन, लघु-स्तरीय व्यवसाय के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार / उद्यमशीलता के अवसरों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करेगी।
मोदी कैबिनेट ने पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) स्कीम को मंजूरी दी है। यह योजना FAME योजना की जगह लेगी। इस स्कीम के तहत देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार दो साल में 10,900 करोड़ रुपये खर्च करेगी। योजना के तहत इलेक्ट्रिक-2 व्हीलर्स, इलेक्ट्रिक-3 व्हीलर्स, ई-एंबुलेंस, ई-ट्रक और दूसरे उभरते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए 3679 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इस स्कीम का फायदा 24.79 लाख ई-टू व्हीलर्स, 3.16 लाख ई-थ्री व्हीलर्स और 14,028 ई-बस को मिलेगा। पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत ई-एंबुलेंस के लिए 500 करोड़ रुपये, ई-बस के लिए 4391 करोड़ रुपये और ई-ट्रक को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
वर्तमान में, सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (पीटीए) द्वारा संचालित अधिकांश बसें डीजल/सीएनजी पर चल रही हैं, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। दूसरी ओर, ई-बसें पर्यावरण के अनुकूल हैं और उनकी परिचालन लागत भी कम है। सरकार अब ई बसों को प्रोत्साहित कर रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3,435.33 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (पीटीए) द्वारा ई-बसों की खरीद और संचालन के लिए “पीएम-ई-बस सेवा-भुगतान सुरक्षा तंत्र (पीएसएम) योजना” को स्वीकृति दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2028-29 तक 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों (ई-बसों) की तैनाती का समर्थन करेगी। यह योजना तैनाती की तारीख से 12 साल तक की अवधि के लिए ई-बसों के संचालन का समर्थन करेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रामीण विकास विभाग के “वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना - IV (पीएमजीएसवाई-IV) के कार्यान्वयन” के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पात्र 25,000 असंबद्ध बस्तियों को नए संपर्क मार्ग प्रदान करने के लिए 62,500 किलोमीटर सड़क के निर्माण और नए संपर्क मार्गों पर पुलों के निर्माण/उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का कुल परिव्यय 70,125 करोड़ रुपये होगा।
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