Natural Farming Subsidy : देश में रसायन मुक्त खेती (प्राकृतिक या जैविक खेती) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार "नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना" चला रही है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकारें प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को भारी सब्सिडी देती है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश में भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार "प्राकृतिक खेती योजना" के तहत किसानों को बंपर सब्सिडी दे रही है। योजना का लाभ अब तक 37,000 से अधिक किसान उठा चुके हैं। इस योजना का उद्देश्य रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर किसानों की निर्भरता को कम करना और खेती की लागत को घटाना है। खास बात यह है कि प्राकृतिक पद्धति से उगाए गए फसलों की खरीद सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कर रही है, ताकि अधिक से अधिक किसान खेती के लिए प्रोत्साहित हो सकें। आइए जानते हैं कि इस योजना का लाभ कैसे उठाया जा सकता है।
प्रदेश के हमीरपुर और ऊना जिलों में नेचुरल खेती (Natural Farming) का तेजी से विस्तार हो रहा है। हिमाचल सरकार की सब्सिडी, MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और अन्य प्रोत्साहनों के चलते जिलों में अब तक करीब 37 हजार किसान प्राकृतिक खेती पद्धति को अपना चुके हैं। हमीरपुर में 20 हजार से अधिक और ऊना जिले में 16,853 किसानों ने रसायन मुक्त खेती की ओर रुख किया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे न केवल उनकी मिट्टी की सेहत सुधरी है, बल्कि किसानों की लागत घटी है, उपज की गुणवत्ता बढ़ी है और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचा है।
उपायुक्त जतिन लाल ने किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद इस खेती को अपनाएं, इससे उनकी आय भी बढ़ेगी। ग्राम पंचायत अमलाहड़ की शकुंतला देवी और सुषमा देवी ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी खेती की लागत को कम किया है, बल्कि उन्हें अपनी उपज के लिए बेहतर दाम मिल रहे हैं। शकुंतला देवी और सुषमा देवी ने बताया कि इस तरीके से खेती करने से उन्हें अब रसायन-मुक्त भोजन मिल रहा है, जिससे उनका और उनके परिवार का स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है।
प्राकृतिक खेती योजना के अंतर्गत, राज्य सरकार किसानों को जैविक और प्राकृतिक तरीकों से खेती करने के लिए प्रेरित कर रही है। इस पद्धति में रासायनिक उर्वरकों (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और NPK उर्वरक) की जगह गोबर की खाद, फसल अवशेष और प्राकृतिक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। इस योजना के तहत किसानों को वित्तीय सहायता दी जाती है, जो निम्न प्रकार से है:
सरकार द्वारा यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है।
बता दें कि राज्य सरकार कई जिलों में प्राकृतिक पद्धति से उगाई उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद कर रही है। पूर्व में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा था कि हिमाचल सरकार देश में प्राकृतिक उत्पादों पर सबसे ज्यादा MSP दे रही है। राज्य में प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, कच्ची हल्दी, मक्का और जौ की खरीद एमएसपी पर की जा रही है।
किसानों को प्राकृतिक गेहूं और जौ पर 60 रुपये प्रति किलो, कच्ची हल्दी पर 90 रुपए प्रति किलोग्राम, मक्का के लिए 40 रुपए प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है, साथ ही किसानों को परिवहन (ट्रांसपोर्ट) सब्सिडी का लाभ भी मिलता है। किसानों से खरीद करने के बाद हिमाचल सरकार इन उत्पादों को 'हिम भोग' ब्रांड नाम के साथ बाजार में बेचती है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर क्वालिटी और केमिकल मुक्त उत्पाद मिलना सुनिश्चित होता है।
किसानों को प्राकृतिक खेती योजना का लाभ लेने के लिए नीचे कुछ खास शर्तों का पालन करना होता है:
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