PM Krishi Sinchai Yojana (Micro Irrigation) – 2025-26 : कृषि क्षेत्र में पानी की प्रत्येक बूंद का उपयोग कर अधिक फसल उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को सिंचाई की आधुनिक तकनीकों पर बंपर अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस कड़ी में बिहार सरकार द्वारा राज्य में “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” PM Krishi Sinchai Yojana (Micro Irrigation)– 2025-26 चलाई जा रही है। योजना के तहत ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर जैसी दो आधुनिक सिंचाई तकनीक पर बंपर सब्सिडी दी जा रही है। योजना में चयनित किसानों को दोनों सूक्ष्म सिंचाई तकनीक (Micro irrigation technology) के लिए 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलेगी। दरअसल, बिहार जैसे कृषि प्रदेश का एक हिस्सा बारिश के दौरान बाढ़ की चपेट में आ जाता है, तो वहीं इसके दूसरे हिस्से में गर्मी के मौसम में पानी की भारी किल्लत हमेशा बनी रहती है, जिससे कई हजारों हेक्टेयर में लगी फसलों को नुकसान होता है। किसानों की इन्हीं समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने पीएमकेएसवाई योजना लागू की है। इससे न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि किसान कम पानी से फसलों का बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। पूरी खबर जानने के लिए इस पोस्ट को ध्यान से पढ़े, इसमें ड्रिप सिंचाई तकनीक और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक के फायदे और सब्सिडी तथा योजना में आवेदन की जानकारी नीचे डिटेल से दी जा रही है।
उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग बिहार सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना लागू की गई है। इस योजना का उद्देश्य है कि हर खेत तक पानी पहुंचे और प्रति बूंद से अधिक फसल उत्पादन प्राप्त हो। बिहार सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत ड्रिप सिंचाई पद्धति और मिनी स्प्रिंकलर के लिए किसान को लागत राशि पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। इससे सिंचाई लागत में भारी कमी आएगी और वे कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकेंगे।
ड्रिप सिंचाई पद्धति एक आधुनिक सिंचाई तकनीक है। इस पद्धति में पानी की प्रति बूंद को सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। ड्रिप सिंचाई पद्धति को “टपक सिंचाई” प्रणाली भी कहते हैं। इसमें पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद पानी पहुंचता है। किसान इस सिंचाई तकनीक से तीन गुना ज्यादा क्षेत्र में सिंचाई कर सकते हैं। ड्रिप सिंचाई तकनीक (Drip irrigation technology) पानी और पोषक तत्वों को बचाने में मदद करती है और वाष्पीकरण को कम करती है। इस सिंचाई पद्धति में पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक एक छोटी व्यास की प्लास्टिक पाइप से पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है। साथ ही इसके माध्यम से खाद-उर्वरक जैसे पोषक तत्व को भी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे अतिरिक्त उर्वरक की बर्बादी नहीं होती है। ड्रिप सिंचाई में पानी की देखरेख भी कम करनी पड़ती है, जिससे खेती में लागत कम आती है। यह सिंचाई पद्धति (Irrigation System) ऊंची-नीची जमीन पर सामान्य रूप से पानी पहुंचता है। यह बागवानी खेती के लिए वरदान है।
मिनी स्प्रिंकलर पद्धति एक उन्नत सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली है, जो छोटे स्प्रिंकलर (फव्वारा) के माध्यम से पानी को पौधों तक छिड़काव के रूप में पहुंचाती है। इसे फव्वारा या छिड़काव सिंचाई पद्धति भी कहते हैं। इस तकनीक में पानी की बचत और पौधों के लिए समान रूप से पानी पहुंचाने के लिए राइजर पाइप की मदद ली जाती है। मिनी स्प्रिंकलर तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से सब्जियों और बागवानी फसलों की सिंचाई के लिए किया जाता है। इससे न केवल पौधों को पानी की उचित मात्रा मिलती है, बल्कि फसलें अच्छी तरह से विकसित भी होती हैं और उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है। स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पद्धति के साथ ही उर्वरक, कीटनाशक का छिड़काव हो जाता है। ऐसा करने पर पानी की बर्बादी नहीं होती। पानी की कमी वाले क्षेत्रों में यह विधि लाभदायक साबित हो रही है। कम पानी में अधिक क्षेत्र में सिंचाई क्षमता के कारण यह तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग बिहार सरकार द्वारा प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (सूक्ष्म सिंचाई) - 2025-26 के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति और मिनी स्प्रिंकलर के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। इच्छुक किसान ऑनलाइन आवेदन करने के लिए राज्य सरकार की हॉर्टिकल्चर वेबसाइट https://horticulture.bihar.gov.in/Home.aspx पर जाएं।
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