नाबार्ड की एग्री-फिनटेक स्टार्टअप में हिस्सेदारी, कृषि ऋण प्रक्रिया अब आसान
कृषि ऋण प्रक्रिया अब और भी आसान, नाबार्ड ने एग्री-फिनटेक में खरीदी 10% हिस्सेदारी
NABARD : भारत सरकार द्वारा विभिन्न तरीकों से युवाओं को स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। परिणामस्वरूप आज कृषि एवं अन्य क्षेत्रों में तेजी से स्टार्टअप बढ़ रहा है। कई पढ़े लिखे युवा नौकरी करने के स्थान पर खुद का बिजनेस शुरू करते नजर आ रहे हैं। सरकार द्वारा कई वित्तीय योजनाओं के तहत स्टार्टअप करने के इच्छुक हितग्राहियों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। इसी कड़ी में कृषि ऋण प्रणाली को डिजिटल और पहले से अधिक तेज करने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने वडोदरा स्थित एग्री-फिनटेक निवेश के रूप में 24x7 मनीवर्क्स कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड में 10 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी खरीदी है। यह बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप में नाबार्ड का पहला निवेशक है। नाबार्ड ने यह जानकारी एक प्रेस नोट के माध्यम से दी है।
24x7 मनीवर्क्स कंसल्टिंग का कार्य (Work of 24x7 Moneyworks Consulting)
सन 2018 में स्थापित 24x7 मनीवर्क्स कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड एक बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप है, इसका मुख्य प्लेटफॉर्म 'ईकिसानक्रेडिट' (ईकेसीसी) है। यह पूरी तरह से डिजिटल ऋण वितरण प्रणाली है, जो सहकारी बैंकों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को एक डिजिटल ऋण प्रक्रिया प्रणाली प्रदान करती है।
कोर बैंकिंग प्रणाली को जोड़ना (Integration of Core Banking System)
ईकेसीसी प्लेटफार्म आधार, ई-केवाईसी, भूमि रिकॉर्ड और बैंकों की कोर बैंकिंग प्रणाली और ईपीएसीएस से जुड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि ऋण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और आसान बना देता है। 24x7 मनीवर्क्स कंसल्टिंग के संस्थापक और सीईओ रंजीत गौतम ने बताया कि यह भागीदारी ग्रामीण भारत के लिए तकनीक-संचालित, समावेशी ऋण बुनियादी ढांचे के निर्माण के उद्देश्य को दर्शाती है। हमारे समाधान लास्ट -मील उपयोगकर्ताओं के लिए सहानुभूति के साथ तैयार किए गए हैं।
पारदर्शी और अधिक समावेशी ऋण सेवाएं (Transparent and more inclusive lending services)
नाबार्ड के चेयरमैन शाजी के. वी. ने कहा, "ईकेसीसी ने कृषि ऋण वितरण प्रणाली को अधिक सुलभ, पारदर्शितापूर्ण और प्रभावी बनाया गया है। यह सहयोग सहकारी बैंकों, पैक्स और अन्य संस्थाओं को छोटे एवं सीमांत किसानों को तेज पारदर्शी और अधिक समावेशी ऋण सेवाएं देने में सक्षम बनाएगी।" कृषि एवं ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए स्थापित नाबार्ड संस्थागत साझेदारी के माध्यम से नवाचार का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। यह रणनीतिक सहयोग भारत सरकार के डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियानों को भी मजबूती देगा।
पूरे देश में लागू करने की योजना (Plan to be implemented across the country)
शाजी के. वी. ने कहा, “पिछले दो वर्षों से नाबार्ड इस प्रणाली का परीक्षण कर रहा था और कई बैंकों में ईकेसीसी का संचालन किया। अब प्लेटफॉर्म को पूरे देशभर में लागू करने की योजना है। इस साझेदारी से ग्रामीण भारत के किसानों को तेजी से, पारदर्शी और समावेशी ऋण सेवाएं मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, नाबार्ड ने एआईएफआईएस विकसित किया है, जो कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के तहत ब्याज सहायता दावों के प्रबंधन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म इन दावों के वास्तविक समय सत्यापन और संवितरण को सक्षम बनाता है।
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