cotton sowing : खरीफ सीजन 2025 में कपास की खेती के लिए किसानों द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई। कई राज्यों में कृषि विभाग और कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा समय-समय पर किसानों के लिए सलाह और सावधानियां जारी की जाती है, ताकि वे कम लागत में गुणवत्तापूर्ण अधिक उत्पादन हासिल कर सकें। इसी क्रम में इस वर्ष खरीफ मौसम में कपास की खेती (cotton farming) करने वाले किसानों के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा प्रारंभिक सलाह जारी की गई है। एचएयू द्वारा कपास की बिजाई (cotton sowing) के समय को ध्यान में रखते हुए कपास किसानों को कुछ सुझाव और सावधानियां बताई गई हैं, जिससे किसान कम लागत में कपास का अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कपास के लिए जारी महत्वपूर्ण सलाह के बारे में जानते हैं।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) ने कपास की बिजाई के समय को देखते हुए किसानों को कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी है। इसके अनुसार, रेतीले क्षेत्रों में किसानों को देसी कपास की बिजाई अप्रैल महीने के पहले पखवाड़े में करने के लिए कहा गया है। कृषि विश्वविद्यालय (Agricultural Universities) ने कहा है कि किसान बीटी कपास (BT Cotton) की बिजाई यदि अप्रैल के पहले पखवाड़े में करते हैं, तो मूंग की दो कतार एवं कपास की दो कतार लगा सकते हैं। रेतीले इलाकों में बीटी कपास की बिजाई ड्रिप सिंचाई प्रणाली (टपका विधि) के माध्यम से भी की जा सकती है। इसके अलावा, जिन इलाकों में पानी खराब है एवं कपास के जमाव में दिक्कत, उन क्षेत्रों में कपास की बिजाई किसान मेढ़ (बेड) बनाकर करें, जिससे नमी संरक्षण, खरपवार नियंत्रण और उत्पादन वृद्धि में मदद मिलेगी।
कृषि विश्वविद्यालय के मुताबिक, बीटी कपास की बिजाई के लिए किसान भाई कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश किया हुआ बीज ही इस्तेमाल करें, जिसकी जानकारी हेतु किसान अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, कृषि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी सिफारिश कपास बीजों की जानकारी उपलब्ध है। बीटी कपास (BT Cotton) का बीज प्रमाणित संस्था या अधिकृत विक्रेता से ही लें और इसका पुष्टिकृत यानी पक्का बिल जरूर लें। किसान भाई खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करवायें, ताकि मिट्टी की जांच का आधार पर ही पोषक तत्वों की मात्रा का प्रयोग किया जा सकें।
विश्वविद्यालय के अनुसार, कपास की बनछटियां में अधखिले टिडों में गुलाबी सुंडी के लार्वा उपस्थित रहते हैं, जिसे नष्ट किया जाना अति आवश्यक है। किसान बुवाई से पहले अपने खेत में या आसपास रखी गई पिछले साल की नरमा (कपास) की लकड़ियों को झाड़कर किसी अन्य स्थान पर ले जाएं एवं बचे हुए अवशेष को जलाकर नष्ट कर दें, ताकि भविष्य में बीटी कॉटन में गुलाबी सुंडी प्रकोप से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। अत: किसानों को यह कार्य मार्च महीने के अंत तक जरूर पूरा कर लेना चाहिए। विश्वविद्यालय का कहना है कि वर्तमान में गुलाबी सुंडी के प्रति बीटी कॉटन (BT Cotton) का प्रतिरोधक बीज उपलब्ध नहीं है। अतः 3G, 4G एवं 5G के नाम से आने वाले बीजों से सावधान रहें। गुलाबी सुंडी कीट (Pink Bollworm) बीटी नरमे के दो बीजों (बिनौले) को जोड़कर भंडारित लकड़ियों में निवास करती है, इसलिए लकड़ी व बिनौले का भंडारण सावधानीपूर्वक करें। जिन किसान ने अपने खेतों में बीटी नरमा कपास की लकड़ियों को भंडारित करके रखा है या उनके खेतों के आसपास कपास की जिनिंग व बिनौलों से तेल निकालने वाली मिल लगती है, उन किसानों को अपने खेतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता हैं। इन किसानों के खेतों में गुलाबी सुंडी (pink caterpillar) का प्रकोप अधिक होता है। कृषि विश्विविद्यालय द्वारा कपास की खेती के लिए हर 15 दिन में विशेषज्ञों द्वारा सलाह जारी की जाती है अतः उसके अनुसार ही किसान सस्य क्रियाएं व कीटनाशकों का प्रयोग करें।
कृषि विज्ञानिकों के अनुसार, पिछले कुछ सालों से कपास की फसल में गूलाबी संडी (पिंक बॉलवर्म) का प्रकोप देखा जा रहा, जिसके कारण कपास की फसल को काफी नुकसान हो रहा है। पैदावार घटने से कपास उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है। इसके देखते हुए, कृषि विभाग और विश्वविद्यालय द्वारा जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। खेती के लिए जरूरी सुझाव किसानों को दिए जा रहे है, ताकि खरीफ सीजन 2025 में कपास की फसल (Cotton Crop) में गुलाबी सुंडी के संक्रमण को रोका जा सके। उल्लेखनीय है कि गुलाबी सुंडी के प्रकोप, बॉल सड़ने के रोग व बॉल के अपरिपक्व रहने से किसानों को आशा अनुरूप कपास का उत्पादन नहीं मिला। इसलिए इस बार फसल नुकसान से बचने के लिए किसानों को कपास की बिजाई से पहले अपने खेतों में भंडारित नरमा की बनछटियों के ढेर का निस्तारण कर लेना चाहिए।
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