भावान्तर योजना : सोयाबीन किसानों के घाटे की भरपाई करेगी सरकार
सोयाबीन किसानों को उचित मूल्य के साथ राहत राशि देने हेतु भावान्तर योजना हुई लागू
किसानों को हर मुश्किल परिस्थिति से बचाने के लिए सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी है। चाहे वह अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ एवं जल-भराव से फसलों को हुए नुकसान की बात हो, या फिर उनकी उपज का बाजारों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर बिकना हो। हर प्रकार के घाटे की भरपाई के लिए सरकार नई योजनाएं लागू करती है और उचित मुआवजा राशि प्रदान कर राहत देती है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भावान्तर योजना लागू की गई है। अगर मंडियों में सोयाबीन एमएसपी से कम कीमत पर बिकता है, तो किसानों के घाटे की भरपाई इस योजना के तहत सरकार द्वारा की जाएगी। साथ ही, अतिवृष्टि, कम बारिश एवं कीट-रोग प्रकोप के कारण सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान के लिए भी किसानों को मुआवजा देकर राहत प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों का कल्याण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सकंट की घड़ी में किसानों के साथ सरकार सदैव खड़ी है। किसानों को किसी भी हालत में घाटा नहीं होने देंगे।
फसल के विक्रय मूल्य और MSP के अन्तर की राशि देगी सरकार (The government will pay the difference between the selling price and MSP of the crop)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावान्तर योजना लागू की जा रही है। किसान पहले की भांति मंडियों में सोयाबीन का विक्रय करेगा। अगर एमएसपी से कम कीमत पर सोयाबीन उपज बिकती है, तो किसानों के घाटे की भरपाई भावान्तर योजना के तहत सरकार द्वारा की जाएगी। फसल के विक्रय मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP के अन्तर की राशि सीधे सरकार देगी। केंद्र सरकार ने सोयाबीन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ₹5328 प्रति क्विंटल घोषित किया है।
सोयाबीन किसानों को मिलेगा भावान्तर का लाभ (Soybean farmers will get the benefit of price difference)
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों को सोयाबीन का उचित मूल्य दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसान संघों के सुझाव पर राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष सोयाबीन किसानों को भावान्तर का लाभ दिया जाएगा। योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन करना होगा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मध्यप्रदेश द्वारा भावांतर योजना में किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया जल्द ही प्रारंभ की जाएगी।
कैसे होगा क्षतिपूर्ति का आकलन (How will compensation be assessed?)
यदि मंडी में औसत गुणवत्ता की कृषि उपज का विक्रय मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम हो लेकिन राज्य सरकार द्वारा घोषित औसत मॉडल भाव से अधिक हो तो किसान को केवल एमएसपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर की क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यदि मंडी में कृषि उपज का विक्रय मूल्य राज्य सरकार द्वारा घोषित औसत मॉडल भाव से भी कम हो तो किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य और घोषित औसत मॉडल भाव के अंतर की क्षतिपूर्ति दी जाएगी।
अतिवृष्टि एवं पीला मोजेक से प्रभावित फसलों के लिए मुआवजा (Compensation for crops affected by excessive rainfall and yellow mosaic)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने कहा कि पहले भी फसलों की क्षति पर किसानों को राहत राशि दी गई है। किसान हितैषी निर्णय पहले भी लिए गए हैं। बाढ़ से प्रभावित किसानों को भी सहायता दी गई। पीला मोजेक रोग एवं अतिवर्षा से सोयाबीन फसल को हुए नुकसान के लिए भी सर्वे करवाया जा रहा है। किसानों को प्रभावित फसलों के लिये आवश्यक मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी। कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें लगातार मैदानी निरीक्षण कर रही हैं। फसल का विस्तृत सर्वे कार्य प्रगति पर है।
सोयाबीन फसल पर पीला मोजेक एवं जलभराव की समस्याएं (Problems of yellow mosaic and waterlogging on soybean crop)
इस वर्ष मानसून सीजन में मध्यप्रदेश के कई जिलों में अत्यधिक वर्षा के चलते बाढ़ तथा जल भराव से किसानों की सोयाबीन फसलों को नुकसान पहुंचा है, तो वहीं कई स्थानों पर कम वर्षा से फसलें खराब हुई हैं। शाजापुर एवं रतलाम जिलों में अतिवृष्टि एवं पीला मोजेक से फसलें प्रभावित हुई, तो वहीं मंदसौर जिले में सोयाबीन फसल पर पीला मोजेक, गर्डल बीटल, स्टेम फ्लाय, एरियल ब्लाइट तथा जलभराव जैसी समस्याएं देखी गईं। स्थिति पर नियंत्रण के लिए कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की टीम गांव-गांव जाकर किसानों को आवश्यक तकनीकी सलाह भी दे रही है। वैज्ञानिकों की किसानों को प्रमुख सलाह है कि सफेद मक्खी और अन्य कीट नियंत्रण के लिए पीले चिपचिपे जाल का उपयोग करें। अनुशंसित कीटनाशकों व फफूंदनाशकों का समय पर छिड़काव करें। संक्रमित पौधों को खेत से निकालें एवं जलभराव से बचाव करें।
हेल्पलाइन नंबर 14447 पर दे जानकारी (Provide information on helpline number 14447)
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्वे पूर्ण होते ही उसकी रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजी जाएगी, ताकि प्रभावित किसानों को राहत राशि समय पर प्राप्त हो सके। फसल बीमा कंपनी को भी सर्वे कार्य में जोड़ा गया है तथा पटवारियों को गिरदावरी पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में सोयाबीन, उड़द एवं मूंग की फसलें पकाव की अवस्था में हैं। इस चरण पर रोग एवं कीटों का प्रकोप सामान्यतः कम हो जाता है, अतः किसानों को अनावश्यक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, वे अपने नुकसान की जानकारी फसल बीमा कृषि रक्षक पोर्टल हेल्पलाइन नंबर 14447 पर दर्ज करवा सकते हैं। किसानों को प्रभावित फसलों के लिये आवश्यक राहत प्रदान की जाएगी।
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