सोयाबीन में पीला मोजेक रोग का गंभीर प्रकोप, सरकार देगी मुआवजा

सोयाबीन में पीला मोजेक रोग का गंभीर प्रकोप, सरकार देगी मुआवजा
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सोयाबीन की फसल पर पीले मोजेक रोग का संकट, शासन ने नुकसान का सर्वे कार्य प्रारंभ किया

मध्यप्रदेश के सोयाबीन किसानों पर नया संकट खड़ा हो गया है। फसल पर ‘पीला मोजेक’ रोग का गंभीर प्रकोप हुआ है, जिससे उपज पर भारी असर पड़ा है। कई क्षेत्रों में फसल पूरी तरह नष्ट हो जाने से किसान हताश हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शासन और कृषि विभाग सक्रिय हो गए हैं। जिलाधिकारियों के निर्देश पर प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है, ताकि किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जा सके। आइए जानते हैं कि सोयाबीन फसल में पीला मोजेक रोग (Yellow Mosaic Virus) का नियंत्रण कैसे किया जा सकता है और इसके लिए शासन द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

नुकसान आकलन के लिए संयुक्त दल का गठन (Formation of a joint team for damage assessment)

मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में इन दिनों सोयाबीन फसल पर पीला मोजेक रोग का गंभीर असर देखा जा रहा है। इस बीमारी के कारण सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं और उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि जिले के कई खेतों में सोयाबीन फसल की यही स्थिति है और वे सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अदिति गर्ग के निर्देश पर जिले में फसल नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया गया है। सर्वे कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए राजस्व एवं कृषि विभाग के संयुक्त दल का गठन किया गया है। प्रत्येक दल में राजस्व अधिकारी, कृषि विभाग के तकनीकी कर्मचारी और संबंधित पटवारी शामिल हैं, जो खेतों में जाकर फसल की वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

पीड़ित किसानों को मिलेगी राहत राशि (The affected farmers will get relief amount)

जिला मजिस्ट्रेट अदिति गर्ग ने कहा कि जिले के सभी विकासखंडों में फसल नुकसान का सर्वे कार्य शीघ्रता से पूरा किया जाएगा। इसके बाद अनुमानित नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, ताकि सरकार से प्राप्त निर्देशों के अनुसार पीड़ित किसानों को नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक सहायता/राहत राशि उपलब्ध कराई जा सके। कलेक्टर गर्ग ने किसानों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं। जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी गंभीरता से किसानों के साथ खड़े हैं तथा हर संभव मदद के लिए तत्पर हैं। किसी भी प्रकार की समस्या या जानकारी के लिए किसान अपने स्थानीय कृषि कार्यालय या संबंधित पटवारी से संपर्क कर सकते हैं।

कृषि विभाग देगा बचाव और नियंत्रण के उपायों की जानकारी (Agriculture department will provide information about prevention and control measures)

कलेक्टर ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों को पीला मोजेक रोग (Yellow Mosaic Virus) से बचाव और नियंत्रण के उपायों की जानकारी दें। कृषि वैज्ञानिक और तकनीकी अधिकारियों द्वारा किसानों को समझा जा रहा है कि यदि समय पर सही कीटनाशक और अनुशंसित उपाय अपनाए जाएं, तो फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों को सलाह है कि वे इस रोग के लक्षणों को पहचानकर तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाएं और समय रहते अपनी फसल को नुकसान से बचाएं। बता दें कि जुलाई से सितंबर के बीच सोयाबीन फसल पर इस रोग का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है। इसी कारण कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जरूरी सलाह जारी की है।

सोयाबीन फसल में पीला मोजेक रोग नियंत्रण कैसे करें (How to control yellow mosaic disease in soybean crop)

कृषि वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के अनुसार सोयाबीन की खेती किये जाने वाले जिले के कई क्षेत्रों में पीला मोजेक रोग का प्रकोप बना हुआ है। यह एक वायरस जनित रोग है, जो सफेद मक्खी एवं कीट के कारण फैलता है। धीरे-धीरे यह रोग पूरे खेत में फैल जाता है। कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि यदि आप सोयाबीन की फसल को पीला मोजेक से बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले इसके कीट सफेद मक्खी पर नियंत्रण करना होगा। अतः सोयबीन कृषकों को सलाह है कि वे सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें एवं इसके प्रकोप से फसल को बचाएं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रोग सोयाबीन की कुछ किस्मों में हुआ है। जहां रोग का प्रकोप हो वहां तुरंत फफूंदनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। 

फसल बचाव के लिए जैविक उपाय (Biological measures for crop protection)

कृषि वैज्ञानिकों का कहना पीला मोजेक/ सोयाबीन मोजेक रोगों से फसल बचाव के लिए इन रोगों को फैलाने वाले रस चूसक कीट सफेद मक्खी/जासिड के नियंत्रण हेतु किसान अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टिकी ट्रैप लगाएं। अगर जैविक तरीके से पीला मोजेक पर नियंत्रण नहीं होता हैं तो रासायनिक तरीके से आपको नियंत्रण करने की जरूरत होगी। पीला मोजेक के लक्षणों को पहचान कर तुरंत रोग नियंत्रण के लिए एसिटेमीप्रीड 25%+बायफेंथ्रिन 25%WG (250ग्रा./हेक्टेयर) का छिड़काव करें। इसके स्थान पर पूर्वमिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (125मिली/हे) या बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली/हेक्टेयर) का भी छिड़काव किया जा सकता हैं। किसानों को यह भी सलाह दी जा रही है कि वे तत्काल रोगग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर नष्ट करें ताकि अन्य पौधों को यह रोग नहीं लग पाए।  

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