हैप्पी सीडर कृषि यंत्र खरीदने पर 80 प्रतिशत सब्सिडी - अभी करे आवेदन

पोस्ट -27 सितम्बर 2022 शेयर पोस्ट

जानें, कहां करना है हैप्पी सीडर कृषि यंत्र सब्सिडी के लिए आवेदन और क्या देने होंगे दस्तावेज 

आज के आधुनिक युग में मशीनों के बिना खेती किसानी के काम करने की कल्पना भी नहीं की सकती। किसानों को खेती करने के लिए कृषि यंत्रों की अहम भूमिका होती है। कृषि यंत्रों की सहायता से किसान खेती और बागवानी का काम कम समय और कम खर्च में पूरा कर सकता है। खेती किसानी को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी मशीनीकरण पर जोर दे रही हैं। बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्य किसानों को कृषि उपकरण खरीदने में आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न सब्सिडी योजनाएं संचालित कर रही हैं। जिससे खरीफ फसलों की कटाई का काम आसानी से निपटाकर रबी फसलों की बुवाई का काम भी समय से पुरा किया जा सके।

क्या है बिहार सरकार की हैप्पी सीडर सब्सिडी योजना

इसी कड़ी में अब बिहार राज्य सरकार भी कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत राज्य के किसानों को हैप्पी सीडर खरीदने पर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। हैप्पी सीडर बुवाई के साथ-साथ फसलों की कटाई करने में भी काम आता है। हैप्पी सीडर मशीन से कंबाइन हार्वेस्टर मशीन को जोड़कर खरीफ की फसल में बचे हुए अवशेष को छोटे टुकड़ों में काटकर खेतों में फैला दिया जाता है। हैप्पी सीडर की इन्हीं विशेषताओ के कारण किसानों को हैप्पी सीडर की खरीद पर सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है। इसके लिये बिहार राज्य सरकार ने हैप्पी सीडर खरीदने वाले किसानों से ऑनलाइन आवेदन भी मांगे हैं।

हैप्पी सीडर पर सब्सिडी

हैप्पी सीडर कृषि यंत्र पर कृषि विभाग बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही कृषि यंत्रीकरण अनुदान (सब्सिडी) योजना के तहत हैप्पी सीडर कृषि यंत्र की खरीद पर आर्थिक लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से सब्सिडी का प्रावधान है।

  • इस योजना के तहत हैप्पी सीडर खरीदने पर सामान्य वर्ग के किसानों को 75% तक सब्सिडी यानी अधिकतम 1,10,000 रुपये का अनुदान (सब्सिडी) दिया जायेगा।

  • वहीं एससी-एसटी वर्ग और अन्य श्रेणी के किसानों के लिये हैप्पी सीडर खरीदने पर 80% तक अनुदान (सब्सिडी) यानी अधिकतम 1,20,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।

हैप्पी सीडर सब्सिडी आवेदन करने हेतु आवश्यक दस्तावेज

हैप्पी सीडर पर सब्सिडी योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को आवेदन करते समय कुछ दस्तावेज अपने पास रखना होगा ताकि सही जानकारी आवेदन में भरी जा सके और आपका आवेदन सफलतापूर्वक हो जाएं, क्योंकि आवेदन के बाद चयनित किसानों का सत्यापन भी कृषि विभाग द्वारा किया जाता है। इस योजना में आवेदन करने के लिए आपको जिन दस्तावेज की जरुरत होगी वो निम्नलिखित हैं:-

  • आवेदक करने वाले किसान का आधार कार्ड

  • बैंक पासबुक की कॉपी

  • अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों हेतु जाति प्रमाण पत्र

  • आवेदक का निवास प्रमाण पत्र

  • आवेदक का पासपोर्ट साइज फोटो

  • ट्रैक्टर से चलने वाले यंत्रों के लिए ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)

  • आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर

हैप्पी सीडर सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करे

बिहार राज्य सरकार की कृषि यंत्रीकरण सब्सिडी योजना के तहत :

  • हैप्पी सीडर खरीदने पर सब्सिडी का लाभ लेने के लिये आधिकारिक पोर्टल http://startup.indbih.com/ पर आवेदन कर सकते हैं।

  • हैप्पी सीडर सब्सिडी योजना से जुड़ी अन्य जानकारी या किसी भी समस्या के समाधान के लिये किसान कृषि विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट (bihar.gov.in) पर जाएं।

  • हैप्पी सीडर सब्सिडी योजना से संबंधित अन्य किसी जानकारी के लिए आप टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर – 1800-3456-214 पर कॉल करके भी आप सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

पराली प्रबंधन में मददगार है हैप्पी सीडर

हैप्पी सीडर पराली प्रबंधन करने में किसानों को राहत प्रदान करता हैं। बढ़ते वायु प्रदुषण के चलते सरकार द्वारा फसल अवशेष व पराली को जलाने पर पाबन्दी लगा दी गई है | ऐसे में सरकार द्वारा किसानों को ऐसे कृषि यंत्रो के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे किसानों को पराली एवं फसल अवशेष जलाने की आवश्यकता न पड़े और फसल अवशेष का उपयोग खाद के रूप में किया जा सके। इसीलिए कृषि यंत्रीकरण अनुदान (सब्सिडी) योजना के तहत बिहार के किसान भाईयों को उन्नत किस्म के कृषि यंत्र खरीदने पर आर्थिक अनुदान दिया जाता है, जिससे खेतों की जुताई, बुवाई, कटाई और थ्रेसिंग का काम आसानी से निपटाया जा सके। इसी कड़ी में अब हैप्पी सीडर की खरीद पर किसानों को आर्थिक सहायता मुहैया करवाई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हैप्पी सीडर को कबाइन हार्वेस्टर मशीन से जोड़कर फसल की कटाई के बाद खेतों में बची बड़ी पराली  और धान के ठूंठा को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेतों में फैला देता है। इसके साथ-साथ गेहूं की बुवाई का काम भी हो जाता है, जिससे समय और मेहनत के साथ-साथ पैसो की भी काफी बचत होती है।

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