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गुलाब की खेती : गुलाब के फूलों से तैयार करें गुलकंद, होगी 3 लाख तक की कमाई

गुलाब की खेती : गुलाब के फूलों से तैयार करें गुलकंद, होगी 3 लाख तक की कमाई
पोस्ट - November 12, 2022 शेयर पोस्ट

किसान गुलाब से बने प्रोडक्ट्स से कर सकते है मोटी कमाई, जानें कैसे

कृषि और बागवानी क्षेत्रों में अपार संभावना को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन को शुरू किया। केंद्र सरकार के इस बागवानी मिशन के तहत कई देश की विभिन्न राज्य सरकारें अपने-अपने राज्य में बागवानी को बढ़ा देने के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन चला रही है। इस मिशन के अंतर्गत किसानों बागवानी में फल, सब्जियों और फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। इस बीच बागवानी में पिछले कुछ वार्षों में किसानों के बीच गुलाब के फूलों की खेती का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। क्योंकि आज के इस आधुनिक दौर में बाजारों के अंदर गुलाब से बनने कई प्रोडक्ट्स की मांग काफी बड़े स्तर पर है। जिसनें गुलाब जल, गुलाब इत्र, गुलकंद और कई तरह की औषधियां भी शामिल है। यहां तक कि कई कंपनियां किसानों से सीधे उत्पादन खरीदती है और समय से अच्छा खासा मूल्य भी चुकता करती है। यहीं वजह है कि आज के समय में किसान बाजार मांग के अनुसार इसकी खेती से 2 से 3 लाख रुपए तक की सालाना आय हासिल कर रहे है। यदि आप भी इसकी खेती करने का मन बना रहे है, तो हम आपको ट्रैक्टरगुरु के इस लेख में गुलाब की खेती एवं गुलाब के फूल से बनाने वाले प्रोडक्ट्स की जानकारी देगे। इस जानकारी से आप गुलाब की खेती से अच्छी कमाई कर सकते है।

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गुलाब का परिचय

गुलाब का वानस्पतिक नाम रोजा हाइब्रिडा है। यह अपनी उपयोगिताओं के कारण सभी फूलों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। फूलों की इस खूबसूरत दुनिया में गुलाब का एक खास स्थान है क्योंकि इसे सौंदर्य, सुगंध और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। इसे फूलों की रौनक भी कहा गया है। गुलाब एक भारतीय पुष्प है। और यह पूरे भारत में पाए जाते हैं। गुलाब का पौधा 4 से 6 फुट ऊंचाई वाला होता है। इसकेे तने में असमान कांटे लगे होते हैं। इसकी 5 पत्तियां मिली हुई होती है। बहुत मात्रा में मिलने वाला गुलाब का फूल गुलाबी रंग का होता है। इसका फल अंडाकार होता है। गुलाब का तना कांटेदार, पत्तियां बारी-बारी से घेरे में होती है। पत्तियों के किनारे दांतेदार होती है। फल मांसल बेरी की तरह होता है जिसे ’रोज हिप’ कहते हैं। गुलाब का पुष्पवृन्त कोरिम्बोस, पेनीकुलेट या सोलिटरी होता है। देशी गुलाब लाल रंग का होता है। परन्तु कलम करके कई रंगो के गुलाब उगाए जाते हैं। गुलाब एक ऐसा फूल है, जिसके बारे में सब जानते हैं। गुलाब का फूल दिखने में जितना अधिक सुन्दर होता है। उससे कहीं ज्यादा उसमें औषधीय गुण होते हैं। इसके फुल से तैयार दवाईयां का उपयोग कई बीमारीयों के इलाज के लिए किया जाता है।

गुलाब की खेती से होने वाली कमाई

विशेषज्ञों के अनुसार गुलाब एक सदाबहार फुल है, जो हर मौसम में मिलता है। इसकी खेती व्यावसायिक स्तर पर करके काफी लाभ कमाया जा सकता है। इसकी खेती कर 8 से 10 तक लगातार मुनाफा कमाया जा सकता है। गुलाब की खेती देश व् विदेश निर्यात करने के लिए दोनों ही रूप सें बहुत महत्वपूर्ण है। गुलाब को कट फ्लावर, गुलाब जल, गुलाब तेल, गुलाब इत्र, गुलकंद आदि के लिए उगाया जाता है। गुलकंद की बाजार में करीब 400 से 500 रुपये प्रति किलो के आस-पास कीमत होती है। और यह बाजार में आसानी से बिकता है। अगर आप इसकी खेती कर हर महीने 60 किलो के आस गुलकंद बना कर बाजार में बेचते है, तो आप 25-30 हजार रुपए की आय हासिल कर सकते है। इस हिसाब से आप सिर्फ इसके फुलों से गुलकंद बना कर 2-3 लाख रूपए सालाना कमा सकते हो।

ग्रामीण युवा गुलाब को बना सकते है अपनी आय का माध्यम

गुलाब अर्थिक लाभ का साधन है। और यह कम लागत में बढि़या मुनाफा देता है। इसके उत्पादन को बेचने के लिए कोई खास मेहनत नहीं करनी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों के युवा इसे अपनी आय का माध्यम बना सकते है। आज के समय में कई क्षेत्रों में युवाओं ने इसे अपनी आय का अहम माध्यम बना लिया है। मन्दिरों, मण्डपों, समारोहों, पूजा-स्थलों आदि स्थानों में गुलाब फूलों की भारी खपत होती है। बाजार में गुलाब के फूल डाली सहित या कट फ्लावर तथा पंखुड़ी फ्लावर दोनों तरह से व्यापारिक रूप से बेच कर लाभ अर्जित कर रहे है। फूल के हाट में गुलाब के गजरे खूब बिकते हैं। गुलाब की पंखुडियों और शक्कर से गुलकन्द बनाया जाता है। गुलाब जल और गुलाब इत्र के कुटीर उद्योग चलते है। उत्तर प्रदेश के कन्नौज, जौनपुर आदि में गुलाब के उत्पाद की उद्योगशाला चल रही है। दक्षिण भारत में गुलाब फूलों का खूब व्यापार होता है। 

गुलाब के फुलों से गुलकंद बनाने की विधि

गुलकंद, गुलाब के फूलों की पंखुडि़यों से बनाए जाते हैं। इसे आप घर पर भी बना सकते है। गुलकंद बनानें के लिए 200 ग्राम ताजी गुलाब की पंखुडि़यां की आवश्यकता होगी। साथ में 500 ग्राम पिसी चीनी या मिश्री इसके अलावा पिसी छोटी इलायची पाउडर और पिसी सौंफ पाउडर की जरूत पड़ेगी। हम यहा थोड़ी मात्रा में बनाना बता रहे है। आप अपने जरूर के हिसाब से जितना भी बना चाहते है तो इस मात्रा के हिसाब से सामाग्री का इस्तेमाल कर सकते है। अगर मीठे कम चाहिए, तो गुलाब पंखुडि़यां और चीनी या मिश्री बराबर मात्रा में लें। गुलकंद बनाने के लिए कांच के वर्तन में एक परत गुलाब की पंखुडि़यां डालें फिर ऊपर से थोड़ी मात्रा में चीनी या मिश्री डालें। इसके बाद फिर से गुलाब पंखुडि़यां डालकर एक परत और बना लें, फिर थोड़ी चीनी डालें और इसके साथ इलाइची और सौंफ पाउडर डालें। इसके बाद मिश्रण में सभी बचे गुलाब पंखुडि़यां और चीनी डाल दें। कांच के बर्तन को सीलबंद कर 8 से 10 दिनों तक धूप में रखें। धूप में रखने से गुलाब पंखुडि़यां और चीनी सभी मिल जायेगें। जब मिश्रण पूरी तरह मिल जाएं, यानि एक सार हो जाएं, तो गुलकंद इस्तेमाल के लिए तैयार हैं। इसे खाने से शरीर की गर्मी दूर होती है, और दिमाग तेज बनता है। कब्ज दूर करता है। माउथ फ्रेशनर के रूप में उपयोग किया जाता है।

गुलाब की खेती कैसे करें?

गुलाब की खेती पूरे भारतवर्ष में व्यवसायिक रूप से की जाती है। इसकी खेती मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल ,गुजरात, हरियाणा, पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, मध्य प्रदेश, आंध्रा प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में अधिक की जाती है। गुलाब की खेती बहुत पहले से पूरी दुनिया में की जाती है। दुनिया भर में उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय मौसम की स्थिति में इसे अच्छी तरह से उगाए जाते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने इसकी खेती के लिए 15 डिग्री सेल्सियस से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान को सही माना है। इसकी खेती हर प्रकार भूमि पर की जा सकती है। लेकिन गुलाब की व्यवसायिक खेती के लिए मिट्टी की पीएच मान 6 से 7.5 के बीच की होना चाहिए। तथा उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली रेतीली दोमट मिट्टी में इसकी खेती अच्छी तरह से की जा सकती है।

इसकी खेती की रोपाई के लिए इसके बीज से नर्सरी में नये पौधे तैयार करें। इसके लिए एक महीने पहले नर्सरी में गुलाब की बीज की बुवाई कर सकते हैं। बीज की बुवाई के लिए गड्ढों या क्यारियों में 60 से 90 सेंटीमीटर गहरा और 60 से 90 सेंटीमीटर गहरा बनाएं। नर्सरी में तैयार गुलाब के पौधे निकालने के बाद उन्हें तुंरत खेत में लगा देना चाहिए। लाइन से लाइन की दूरी पांच फीट और पौधे से पौधे की दूरी पांच फीट होनी चाहिए। गुलाब के पौधे को खेत में लगाने के लिए सितंबर से अक्टूबर के बीच का समय सबसे उपयुक्त समय होता है।

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