प्राकृतिक खेती : किसानों के लिए बड़ी खबर है। अब प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को न केवल प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि उन्हें अब उत्पादों की ब्रांडिग और पैकेजिंग के लिए भी पैसा दिया जाएगा। साथ ही, उनके द्वारा उत्पादित पैदावार की खरीद करने की सुविधा विकसित की जाएगी। अभी तक यही सवाल उठ रहा था कि किसान प्राकृतिक खेती तो कर लें, लेकिन उनके उत्पादों को खरीदेगा कौन। क्योंकि उपज को खरीदने के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं थी। लेकिन अब हरियाणा सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए, प्राकृतिक और जैविक दो नई मंडियों का निर्माण कराने का निर्णय लिया है। यहां किसान प्राकृतिक उत्पादों को बेच सकेंगे।
इसके अलावा, किसानों को प्राकृतिक उपजों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए 20 हजार रुपये भी दिए जाएंगे। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गुरुग्राम और हिसार में प्राकृतिक और जैविक मंडियों की स्थापना की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा करते हुए कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती तरीकों से उत्पादित गेहूं, धान, दालों जैसे उत्पादों की आपूर्ति के लिए गुरुग्राम में मंडी बनाई जाएगी, जबकि प्राकृतिक और जैविक खेती से उत्पादित फल, सब्जियों के लिए हिसार में प्राकृतिक खेती और जैविक मंडी की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा, प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों से उत्पादित उत्पादों के लिए उचित मूल्य तय करने के लिए हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण के तहत एक समिति का गठन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना लागू की गई थी, जिसके लिए सरकार ने लगभग 97 करोड़ रुपए का बजट रखा था। इस योजना को हर साल लगातार बढ़ाया भी जा रहा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अलग से एक पोर्टल भी लॉन्च किया हुआ है, अब तक इस पोर्टल पर लगभग 1,84,665 किसानों ने 2,73,955 एकड़ भूमि के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें से 10,550 किसानों का 17,087 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए वेरिफिकेशन भी किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती से प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए प्रति किसान 20 हजार रुपए दिए जाएंगे। प्राकृतिक और जैविक खेती से उत्पन्न पैदावार की जांच के लिए अलग से प्रयोगशालाएं भी बनाई जाएंगी। ये प्रयोगशालाएं किसानों द्वारा उत्पादित फसल उपज की निःशुल्क जांच करेंगी। सैनी ने यह भी घोषणा की कि जिला कैथल के ब्लॉक पुंडरी में कृषि विभाग की 53 एकड़ भूमि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से पट्टे पर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत में पंचायत की 10 प्रतिशत भूमि या कम से कम एक एकड़ भूमि नेचुरल खेती के लिए आरक्षित की जाएगी।
मुख्यमंत्री सैनी ने आगे बताया कि यह भूमि केवल भूमिहीन किसानों को नीलामी के माध्यम से दी जाएगी। इसके अतिरिक्त जो भी किसान सरकारी या पंचायती जमीन पर प्राकृतिक खेती करेगा, उन किसानों को भी प्राकृतिक खेती योजना (Natural farming scheme) के तहत कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए उपयोग किए जाने वाले चार ड्रम की खरीद के लिए 3 हजार रुपए प्रति किसान वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त एक देसी गाय की खरीद के लिए 30 हजार रुपए की सब्सिडी भी दी जाएगी। अब तक 492 देसी गायों के लिए 1. 23 करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खाते में दिए गए हैं। इसके अलावा, अब तक 2500 किसानों को ड्रम खरीदने के लिए 75 लाख रुपए की राशि भी दी जा चुकी है।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल हरियाणा की कृषि को नई दिशा मिलेगी, बल्कि देशभर के लिए यह प्रेरणा का एक स्रोत भी बनेगी। आज जब हम खाद्यानों के मामले में आत्मनिर्भर तो हैं, लेकिन इसके लिए हमें बहुत बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी है। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से भूमि, जल और वायु दूषित होती है। हमारी आने वाली पीढ़ियां मजबूत, सशक्त हों, इसके लिए हमें प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना ही होगा। चालू वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश में एक लाख एकड़ भूमि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण देने के लिए कुरुक्षेत्र के गुरुकुल, जींद के हमेटी, सिरसा के मंगियाना और करनाल के घरौंडा में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्रशिक्षण केंद्र में प्रगतिशील किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षण देने हेतु राज्य सलाहकार की भी नियुक्ति किए गए है।
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