बदलते समय, घटते भूजल स्तर और कृषि मजदूरों की कमी को देखते हुए अब भारतीय प्रगतिशील किसान धान की खेती के लिए नई वैज्ञानिक तकनीक डीएसआर (DSR - Direct Seeded Rice) यानी धान की सीधी बुवाई को तेजी से अपना रहे हैं। इसमें नर्सरी तैयार करने और खेत में पडलिंग (मचाई) के बाद रोपाई करने की आवश्यकता नहीं होती। इसके बजाय विशेष कृषि मशीनों की मदद से धान के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं। इससे श्रम लागत कम होती है, पानी की बचत होती है और बुवाई का काम भी कम समय से पूरा हो जाता है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों से धान उत्पादक किसानों के लिए डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक तेजी लोकप्रिय हो रही है। इस तकनीक के माध्यम से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कई अन्य राज्यों के कई किसानों ने पारंपरिक रोपाई विधि की तुलना में श्रम और पानी की बचत के साथ बेहतर उत्पादन का अनुभव किया है।
इस लेख में हम जानेंगे कि डीएसआर (DSR) तकनीक क्या है, पारंपरिक धान रोपाई छोड़कर इस तकनीक अपनाने के क्या फायदे हैं, इस तकनीक के लिए कौन-सी कृषि मशीनें उपयुक्त हैं, विभिन्न राज्य सरकारें इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कितनी सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की बुवाई किसान अभी भी पारंपरिक रोपाई विधि (नर्सरी तैयार कर पौधों की रोपाई) से कर रहे हैं। हालांकि, सालों से चली आ रही इस पारंपरिक तकनीक में मेहनत, पानी और समय तीनों ही बहुत ज्यादा खर्च होते हैं। पारंपरिक खेती के लिए पहले नर्सरी (धान के पौधे या थरहा) तैयार किए जाते हैं, फिर खेतों की पानी भरकर रोटावेटर से मचाई (पडलिंग) की जाती है और उसके बाद पौधों को हाथ या राइस ट्रांसप्लांटर से रोपा जाता है। इसके विपरीत, डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक में किसी नर्सरी या पानी भरकर मचाई करने की जरूरत नहीं होती। इसमें गेहूं या चने की तरह, सूखे या हल्के नमी वाले खेत में सीधे सीड ड्रिल या मल्टीक्रॉप प्लांटर मशीन की मदद से धान के बीजों की बुआई कर दी जाती है। हालांकि, इस तकनीक से धान लगाने के लिए खेत का समतल होना, उचित नमी और प्रभावी खरपतवार प्रबंधन बेहद जरूरी होता है।
डीएसआर तकनीक की सफलता पूरी तरह से सही मशीन के चुनाव, बीज बोने के सटीक समय और गहराई पर निर्भर करती है। इसके लिए मुख्य रूप से निम्न एडवांस मशीनों का उपयोग किया जाता है:
यह इस तकनीक की सबसे मुख्य मशीन है। इसमें धान के बीज और खाद (Fertilizer) के लिए अलग-अलग बॉक्स बने होते हैं। यह मशीन कतार से कतार की दूरी और बीज से बीज की दूरी को एकदम सटीक बनाए रखती है। यह बीज को मिट्टी के भीतर सही गहराई पर बोती है, जिससे हर एक बीज का अंकुरण बहुत शानदार होता है। डीएसआर राइस प्लांटर/ सीडर ट्रैक्टर चालित या मानव चालित दोनों प्रकार के हाेते हैं।
यह एक आधुनिक कृषि मशीन है, जिसे ट्रैक्टर से जोड़कर बिना जुताई किए सीधे खेत में बीज और उर्वरक (खाद) की बुवाई के काम आती है। यह मशीन धान की खेती लागत कम करने, श्रम और समय की बचत करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जीरो टिल सीड ड्रिल धान की खेती के लिए एक प्रभावी और आधुनिक समाधान माना जाता है।
दोनों ही DSR और जीरो टिलेज आधारित खेती में उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण कृषि मशीनें हैं। यह एक साथ बीज और उर्वरक को निर्धारित गहराई और दूरी पर डालती चलती है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है। डीएसआर तकनीक में सबसे बड़ी चुनौती खरपतवार (घास-फूस) की होती है, और यह मशीन बुआई के तुरंत बाद दवा छिड़क कर इस समस्या को शुरुआती चरण में ही खत्म कर देती है। DSR तकनीक के तहत इन मशीनों का उपयोग धान सहित गेहूं, चना, सरसों, सोयाबीन और अन्य फसलों की सीधी बुवाई के लिए किया जाता है।
कृषि बाजार में डीएसआर (DSR) सीड ड्रिल मशीन की कीमत उसके साइज (टाइन या रो की संख्या), ब्रांड/कंपनी और उसमें दी गई अतिरिक्त तकनीकों (जैसे खाद बॉक्स या खरपतवार नाशक स्प्रेयर अटैचमेंट) पर निर्भर करती है। साधारण DSR सीडर मशीनों की कीमत लगभग ₹75,000 से ₹1,50,000 के बीच होती है। बीज और खाद दोनों एक साथ गिराने वाली एडवांस सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल (Seed Cum Fertilizer Drill) मशीनों की कीमत ₹40,000 से ₹1,50,000 तक के बीच हो सकती है। हैप्पी सीडर / लकी सीड ड्रिल (Lucky Seed Drill) एडवांस मशीन जो बुआई के साथ-साथ खरपतवार नाशक दवा का भी छिड़काव करती है, उसकी कीमत ₹1,35,000 से ₹3,00,000 के बीच होती है (आकार, ब्रांड और मॉडल के आधार पर)।
विभिन्न राज्य सरकारें DSR तकनीक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही हैं। इसके लिए भारत सरकार की SMAM (Sub-Mission on Agricultural Mechanization) योजना के तहत राज्य स्तर की कृषि यांत्रिकरण योजनाओं लागू कर उपयोगी मशीनों पर किसानों को भारी सब्सिडी दी जाती है।
इन छोटी सावधानियों को रखकर आप डीएसआर तकनीक से कम लागत में धान की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार हासिल कर सकते हैं।
Website - TractorGuru.in
Instagram - TractorGuru Instagram Page
Facebook - TractorGuru Facebook Page
TAFE and DEUTZ Launch Engine Manufacturing Plant in Alwar, Rajasthan
Farmtrac 60 Powermaxx vs Powertrac Euro 45 Plus 2WD: Which is Best?
Yamaha Strengthens Prospr with Smart Weed-Control Technology
The top choice for farmers in India. Check prices and explore exclusive offers now!