यदि इरादे मजबूत हों, तो मंजिल खुद बखुद रास्ता दिखा देती है। यह कहावत महिला किसान परमहजीत कौर पर पूरी तरह सटीक बैठती है। करीब 50 वर्ष की उम्र में जीवन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करते हुए परमहजीत कौर ने मेहनत और साहस का ऐसा उदाहरण पेश किया, जो आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। पति के निधन के बाद जहां लोग उन्हें जमीन बेचकर घर लौटने की सलाह दे रहे थे, वहीं उन्होंने ट्रैक्टर का स्टीयरिंग खुद संभाला और खेती की बागडोर अपने हाथ में ले ली। आज परमहजीत न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गन्ने की पौध का व्यावयायिक उत्पादन और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अनेक महिलाओं को भी रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं। इस लेख में हम सफल महिला किसान परमहजीत कौर और उनके संघर्ष की कहानी जानेंगे।
परमहजीत कौर का सफल और आत्मनिर्भर किसान बनने तक का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। वे पहले एक साधारण गृहिणी थीं और करीब 40 साल की उम्र तक उन्होंने कभी साइकिल तक भी नहीं चलाई थी। उनका जीवन घर और परिवार तक ही सीमित था। लेकिन 2015 में उनकी जिंदगी बदल गई। उसी साल उनके पति धरमपाल का निधन हो गया और परमहजीत के सामने सवाल खड़ा हो गया कि अब उनकी 90 एकड़ जमीन की देखभाल कौन करेगा।
परिवार और रिश्तेदारों ने उन्हें सलाह दी कि वे जमीन बेचकर पंजाब लौट जाएं। लेकिन परमहजीत के लिए यह स्वीकार्य नहीं था। खेतों में दिन-रात मेहनत करते अपने पति की याद उनकी आंखों के सामने थी। धरमपाल का सबसे प्रिय साथी उनका स्वराज ट्रैक्टर था, जिसे उन्होंने साल 2002 में खरीदा था। बाद में 2007 और 2014 में उन्होंने दो और ट्रैक्टर खरीदे। परमहजीत कहती है कि, “मैं इस स्वराज ट्रैक्टर को कभी नहीं बेचूंगी। यह मेरे पति की याद और मेरे लिए उनकी मेरी निशानी है। इसी के साथ उनकी आत्मा मेरे साथ रहती है।”
पति के जाने के बाद 50 वर्ष की आयु में परमहजीत ने वही किया जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। उन्होंने खुद ट्रैक्टर का स्टीयरिंग संभाला। शुरुआत थोड़ी मुश्किल थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने ट्रैक्टर चलाना सीखा और खेतों की बागडोर अपने हाथ में ले ली। आज परमहजीत न सिर्फ खेती संभाल रही हैं बल्कि उसे आगे भी बढ़ा रही हैं। उन्होंने गन्ने की पौध का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया। पहली बार 50 हजार गांठें लगाई, जिनमें से 30 हजार बिक गईं। बाद उन्होंने एक लाख पौधों की नर्सरी तैयार की और अच्छा मुनाफा कमाया। इस सफलता ने उन्हें और भी मजबूत बना दिया। परमहजीत ने पति की बीमारी के समय लिया गया कर्ज पूरी तरह चुकता किया और उसी हिम्मत से खेती में निवेश कर अपने जीवन को नई दिशा दी।
आसपास के किसानों की मदद के लिए परमहजीत ने एक कृषि उपकरण बैंक (फार्म मशीनरी बैंक) स्थापित किया। इसके साथ ही उन्होंने स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाए और दो दर्जन से अधिक महिलाओं को इस व्यवसाय से जोड़ा। आज ये सभी महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अपने परिवार की आर्थिक मजबूती की रीढ़ बनी हुई हैं। परमहजीत कौर की कहानी केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साहस, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई कठिनाई टिक नहीं सकती। आज धरमपाल का सपना परमहजीत के हाथों और उनके ट्रैक्टर की स्टीयरिंग से नई दिशा पा रहा है।
स्वराज पंजाब का एक लोकप्रिय ट्रैक्टर ब्रांड है। यहां के किसानों के पसंदीदा मॉडलों में स्वराज 735 एफई, 744 एक्सटी, 742 एफई और स्वराज 963 एफई शामिल हैं। ये ट्रैक्टर मध्यम और बड़े खेतों के लिए डिजाइन किए गए है, जो अपने भरोसेमंद प्रदर्शन, ईंधन दक्षता और टिकाऊपन के लिए जाने जाते हैं। दमदार इंजन, बहुमुखी प्रतिभा और उन्नत तकनीक के मिश्रण के साथ, स्वराज ट्रैक्टर किसानों के लिए एक विश्वसनीय साथी है। भारत में उपलब्ध स्वराज ट्रैक्टरों के मॉडल और उनकी सटीक कीमतों की जानकारी के लिए अभी ट्रैक्टरगुरू वेबसाइट पर जाएं। यहां आप सभी ट्रैक्टर मॉडलों के तकनीकी स्पेसिफिकेशन के साथ-साथ, अपने राज्य के अनुसार पसंदीदा मॉडल की सही कीमत आसानी से जान सकते हैं।
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