भारत में तीन प्रमुख फसल मौसम (Cropping Seasons) होते हैं जिन्हें खरीफ, रबी और जायद सीजन के नाम से जाना जाता है। इन मौसम में किसान चावल, कपास, मक्का, गेहूं, सरसों, चना, गन्ना, बाजरा, ज्वार, मटर आदि फसलों की खेती करते हैं तथा अपनी उपज को मंडियों में बेचकर मुनाफा कमाते हैं। लेकिन खेती में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि किस फसल से अच्छी कीमत मिलेगी। इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (मिनिमम सपोर्ट प्राइस - एमएसपी) प्रदान करती है। यह एक पहले से तयशुदा गारंटीड कीमत होती है, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके। अगर बाजार में कीमतें गिर भी जाएं, तो भी किसानों को नुकसान नहीं होता।
हर फसल सीजन से पहले सरकार विभिन्न फसलों के लिए MSP तय करती है। इसके बावजूद कई किसानों के मन में यह सवाल बना रहता है कि कौन-सी फसल पर सबसे अधिक MSP मिलती है और किस फसल की खेती से अधिक लाभ हो सकता है। इस लेख में हम आपको विपणन वर्ष 2026-27 की MSP सूची, सबसे अधिक मूल्य देने वाली फसलें और MSP तय होने की प्रक्रिया से जुड़ी जरूरी जानकारी बताएंगे, ताकि आप सही फसल का चयन कर अधिक आय अर्जित कर सकें।
2026 ट्रेंड के अनुसार सबसे ज्यादा MSP वाली फसलों में दालें, तिलहन और मसाला फसलें शामिल हैं। आमतौर पर इन फसलों का MSP दूसरी फसलों के मुकाबले अधिक होता है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है। यहां मार्केटिंग सीजन (विपणन सत्र) 2026–27 के लिए सबसे ज्यादा MSP पाने वाली प्रमुख फसलों की जानकारी दी गई हैं:
सरकार इन फसलों के लिए अच्छा MSP देती है क्योंकि बाजार में इनकी मांग ज्यादा रहती है, उत्पादन जोखिम कम होता है और सरकारी खरीद अधिक होती है। अगर किसान सही सीजन और अपनी जमीन के हिसाब से इन फसलों को प्राथमिकता देते हैं, तो वे कम लागत में ज्यादा लाभ कमा सकते हैं।
मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) वह गारंटीड कीमत है, जो किसानों को उनकी फसल के बदले मिलती है चाहे बाजार में उस फसल का भाव कम ही क्यों न हो। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि बाजार में फसलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का किसानों पर ज्यादा असर न पड़े और उन्हें उनकी उपज का कम से कम तय भाव मिलता रहे।
मान लीजिए अगर किसी फसल की बम्पर पैदावार हो जाती है, तो बाजार में उसकी कीमत कम या गिर सकती है। ऐसे में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP किसानों के लिए एक फिक्स और सुरक्षित कीमत का काम करता है। किसान अपनी फसल MSP मूल्य पर बेचें या बाजार में यह पूरी तरह उनकी अपनी पसंद होती है।
सरकार हर फसल सीजन से पहले MSP तय करती है। यह कीमत कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय की जाती है और पूरे देश में समान रूप से लागू होती है। 'कृषि लागत और मूल्य आयोग' (कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस-CACP) खेती की लागत, मांग, आपूर्ति और बाजार के रुझानों का विश्लेषण करता है। यहां MSP तय करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई है:
सरकार हर फसल सीजन के लिए करीब 23 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price- MSP) तय करती है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके। इन फसलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:
|
फसल |
MSP 2026-27 (₹/क्विंटल) |
MSP 2025-26 (₹/क्विंटल) |
|
गेहूं |
2,585 |
2,425 |
|
जौ |
2,150 |
1,980 |
|
चना |
5,875 |
5,650 |
|
मसूर |
7,000 |
6,700 |
|
सरसों/रेपसीड |
6,200 |
5,950 |
|
कुसुम (सनफ्लावर) |
6,540 |
5,940 |
|
क्र.सं. |
फसल |
MSP 2025-26 |
MSP 2024-25 |
|
|
अनाज |
||||
|
1 |
धान |
सामान्य |
2369 |
2300 |
|
ग्रेड ए^ |
2389 |
2320 |
||
|
2 |
ज्वार |
हाइब्रिड |
3699 |
3371 |
|
मालदंडी^ |
3749 |
3421 |
||
|
3 |
बाजरा |
2775 |
2625 |
|
|
4 |
रागी |
4886 |
4290 |
|
|
5 |
मक्का |
2400 |
2225 |
|
|
दलहन |
||||
|
6 |
तूर/अरहर |
8000 |
7550 |
|
|
7 |
मूंग |
8768 |
8682 |
|
|
8 |
उड़द |
7800 |
7400 |
|
|
तिलहन |
||||
|
9 |
मूंगफली |
7263 |
6783 |
|
|
10 |
सूरजमुखी के बीज |
7721 |
7280 |
|
|
11 |
सोयाबीन (पीला) |
5328 |
4892 |
|
|
12 |
तिल |
9846 |
9267 |
|
|
13 |
रामतिल |
9537 |
8717 |
|
|
वाणिज्यक |
||||
|
14 |
कपास |
(मध्यमरेशे) |
7710 |
7121 |
|
(लंबेरेशे)^ |
8110 |
7521 |
||
नोट: यह आंकड़े विपणन सत्र 2026-27, 2025-26 के लिए तय सरकारी MSP डेटा के आधार पर दिए गए हैं। (खरीफ फसल और रबी फसल)
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