क्रॉपलाइफ इंडिया ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण भारत में कृषि रसायनों की लागत 25% तक बढ़ सकती है। सप्लाई चेन में व्यवधान और कच्चे माल की कमी के चलते आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को महंगे इनपुट और कुछ उत्पादों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, संगठन ने यह भी आगाह किया है कि आपूर्ति में कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण नकली और घटिया कृषि रसायनों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों की सुरक्षा के लिए संस्था ने मजबूत निगरानी और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संस्था की चेतावनी और आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को सभी जरूरी इनपुट समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने कालाबाजारी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाने पर भी जोर दिया है। साथ ही, यह स्पष्ट किया है कि यूरिया की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। यानी आगामी कृषि मौसम के लिए यूरिया खाद की कीमत स्थिर रहने वाली है। हालांकि सरकार द्वारा संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य बोरी का आकार घटाने का निर्णय लिया गया है।
क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के कार्यकारी चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Ankur Aggarwal के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण फसल सुरक्षा (कीटनाशक आदि) की लागत 20–25% तक बढ़ सकती है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा और खेती की लागत बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत का यह उद्योग काफी हद तक वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है। मौजूदा हालात ने दिखा दिया है कि हमारी आपूर्ति व्यवस्था अभी भी कमजोर है और बाहरी संकटों से आसानी से प्रभावित हो सकती है।
अंकुर अग्रवाल के अनुसार, कच्चे माल और ट्रांसपोर्ट (रसद) में आ रही दिक्कतों के कारण इस महत्वूपर्ण समय पर कुछ जरूरी कीटनाशक और फसल सुरक्षा उत्पादों की कमी हो सकती है। इसका असर फसल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता दोनों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में किसानों की आय घट सकती है और पूरी कृषि उत्पादकता पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है। साथ ही, इस दौरान फैक्ट्रियों और उत्पादन इकाइयों की क्षमता भी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाएगी। इससे उद्योग की कमाई और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर जो इस सप्लाई चेन का अहम हिस्सा हैं।
अग्रवाल के अनुसार, अभी किसी खास उत्पाद की कमी की सीधी बात नहीं कही गई है, हालांकि फसल सुरक्षा उद्योग में लागत में सामान्य वृद्धि बढ़ने का संकेत मिल रहा है। इससे आम तौर उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सप्लाई कम होने और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण बाजार में नकली और घटिया कीटनाशक (फसल सुरक्षा उत्पाद) बढ़ सकते हैं, जो किसानों के लिए नुकसानदायक हैं। ऐसे में किसानों की सुरक्षा के लिए सख्त निगरानी और कड़ी कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, उन्होंने सरकार से अपील की कि देश में ही उत्पादन (घरेलू मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा दिया जाए और बढ़ती लागत को कम करने के लिए खासकर ऊर्जा क्षेत्र में मदद देने पर विचार करे। उनका मानना है कि अगर स्थानीय उत्पादन मजबूत होगा, तो ऐसे वैश्विक संकटों का असर कम पड़ेगा।
वैश्विक अनिश्चितताओं और आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उर्वरक, बीज और कृषि रसायनों जैसे जरूरी सामान की समय पर उपलब्धता और किसानों के हितों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखें और पूरे देश में उर्वरकों की सुचारू और बराबर आपूर्ति बनाए रखने के लिए सक्रिय तरीके से काम करें। बाजार में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए मंत्री ने उर्वरक और बीजों की कालाबाजारी व जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए जरूरी पैकेजिंग सामग्री की कोई कमी न हो। निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक विशेष टीम (प्रकोष्ठ) बनाई है। यह टीम उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर 24 घंटे नजर रखेगी और हर हफ्ते रिपोर्ट देगी। इससे जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। मंत्री ने ‘किसान पहचान पत्र’ योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश भी दिए, ताकि वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़े। उन्होंने बताया कि इस विषय पर बेहतर समन्वय के लिए जल्द ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की जाएगी।
रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री Anupriya Patel ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि अभी यूरिया की कीमत बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है। यूरिया की बोरी को 50 किलो से घटाकर 45 किलो (और कुछ मामलों में 40 किलो) किया गया है। यह कदम ज्यादा इस्तेमाल को रोकने और उर्वरक के सही उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। फिलहाल, नीम-लेपित यूरिया की 45 किलो की बोरी की कीमत ₹242 है, जिसमें नीम लेप शुल्क और लागू कर शामिल नहीं हैं। इसी प्रकार, सल्फर-लेपित यूरिया की 40 किलो बोरी ₹254 में मिल रही है, जिसमें केंद्र और राज्य टैक्स (जीएसटी सहित) शामिल नहीं हैं।
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