किसानों को सोयाबीन खेती पर मिलेगा प्रति एकड़ अनुदान और मुफ्त बीज

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सोयाबीन उत्पादन को बढ़ावा : सरकार दे रही है मुफ्त बीज और 4000 रुपए प्रति एकड का अनुदान

Soybean Production : खरीफ मौसम में सोयाबीन एक प्रमुख तिलहन फसल है, जो मौजूदा समय में किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक लाभकारी और बेहतर विकल्प बन चुकी है। पोषक तत्वों से भरपूर सोयाबीन फसल में कम लागत में अधिक उत्पादन देने की क्षमता है। ऐसे में सरकार सोयाबीन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। किसानों को फसल विविधीकरण की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे वे पारंपरिक फसलों के स्थान पर नई खेती भी अपनाएं। इसके साथ ही, सरकार द्वारा किसानों को उन्नत किस्मों के बीज नि:शुल्क वितरित किए जा रहे हैं। इस कड़ी में बिहार के उप मुख्यमंत्री व सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि केंद्र द्वारा संचालित खाद्य तेल-तेलहन योजना के तहत बिहार में तिलहन फसलों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने की सोयाबीन खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार द्वारा इसकी खेती के लिए किसानों को 4000 रुपए प्रति एकड़ का अनुदान और मुफ्त बीज प्रदान किए जा रहे हैं। यह कदम न केवल सोयाबीन फसलों के आच्छादन क्षेत्र में वृद्धि करेगा, बल्कि किसानों की आय में भी स्थाई रूप से सुधार करेगा। 

खरीफ मौसम 2025 : फसल प्रत्यक्षण कार्यक्रम क्रियान्वित (Kharif Season 2025 : Crop Demonstration Program Implemented)

उप मुख्यमंत्री - सह कृषि मंत्री सिन्हा ने कहा, सरकार द्वारा खाद्य तेल-तिलहन मिशन (एनएमईओ-ओएस) योजना के तहत बिहार में सोयाबीन फसलों का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। सरकार ने खरीफ मौसम 2025 में इसकी खेती को विशेष रूप से बढ़ावा देने के लिए राज्य के तीन जिलों का चयन किया है। इसमें बेगूसराय, लखीसराय और खगड़िया जिला शामिल है। इन जिलों में 5 हजार एकड़ भूमि पर फसल प्रत्यक्षण (प्रदर्शन) कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, बिहार सोयाबीन बीज उत्पादन को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की ओर से 100 क्विंटल (यानी 10 टन) प्रजनक बीज उपलब्ध कराया गया है। इसका उत्पादन राज्य के बीज गुणन प्रक्षेत्रों में कराया जा रहा है, जिससे ना केवल बीज की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि भविष्य में स्थानीय स्तर पर किसानों को बीज उपलब्ध हो सकेगा। 

एनएमईओ-ओएस योजना : उत्पादन और बीज के लिए मिलेगा अनुदान (NMEO-OS Scheme: Subsidy will be given for production and seeds)

कृषि मंत्री ने बताया कि एनएमईओ-ओएस योजना के अंतर्गत राज्य में सोयाबीन बीज का उत्पादन करने वाले किसानों को 4,000 रुपए प्रति एकड़ अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार किसानों को 355 क्विंटल प्रमाणित बीज एकदम मुफ्त (100 प्रतिशत अनुदानित) दर पर वितरित भी कर रही है। खेती की नवीनतम तकनीक से किसानों को जोड़ने और उत्पादन की दक्षता बढ़ाने के लिए फार्मर्स फील्ड स्कूल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। राज्य में योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक जिले में एक क्लस्टर का निर्माण कर वल्यू चैन पार्टनर्स के माध्यम से योजना को लागू किया जाएगा।

अनुदान और बीज के लिए कैसे करें आवेदन? (How to apply for grants and seeds?)

खाद्य तेल-तिलहन मिशन योजना के क्रियान्वयन से बिहार में तिलहन फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, किसानों की आत्मनिर्भरता और आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही, राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती भी मिलेगी। एनएमईओ-ओएस योजना का लाभ लेने के लिए जिले के कृषि विभाग कार्यालय में संपर्क करें या कृषि विभाग, बिहार सरकार के ऑनलाइन पोर्टल  पर अपना पंजीकरण कराएं। योजना के अंतर्गत खेती पर अनुदान और मुफ्त बीज प्राप्त करने के लिए किसानों को अपनी खेती का विवरण, जैसे भूमि का क्षेत्रफल, भूमि स्वामित्व प्रमाण, जमा करना अनिवार्य होगा। अधिक जानकारी के लिए किसान स्थानीय  कृषि समन्वयक या ब्लॉक स्तर के कृषि अधिकारियों से संपर्क भी कर सकते हैं। 

क्या है राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन योजना? (What is the National Edible Oil-Oilseeds Mission Scheme?)

गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ाने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) प्राप्त करने के उद्देश्य से “राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (एनएमईओ-ओएस) योजना शुरू किया है। इस योजना के अंतर्गत देशभर में 600 मूल्य श्रृंखला क्लस्टर बनाने का प्रावधान किया गया है, जिसमें सामूहिक रूप से सालाना 10 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र पर तेलहन और दलहन फसलों को कवर किया जाएगा। भारत सरकार के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत राज्य के विशिष्ट क्षेत्रों में तिलहनों और दलहनों फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। वैज्ञानिकों की देखरेख में किसानों के खेत में प्रौद्योगिकी की उत्पादन क्षमता और लाभ लागत अनुपात का अनुमान लगाने के लिए फ्रंट-लाइन प्रदर्शन भी आयोजित किए जा रहे हैं। 

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