फसल नुकसान मुआवजा: किसानों को 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर करेगी सरकार
किसानों के लिए खुशखबरी! सरकार मुआवजे के तहत 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर करेगी
Payment of insurance claim amount to farmers: पिछले साल कम बारिश और पाले के कारण किसानों को रबी फसलों में काफी नुकसान हुआ था, जिसको लेकर किसान संगठन लगातार सरकार से बीमा क्लेम की राशि की मांग कर रहे थे। इसको देखते हुए राजस्थान सरकार ने अब एक बड़ा फैसला ले लिया है। राज्य में किसानों को पिछले साल 2023-24 की रबी फसल का बीमा क्लेम का भुगतान होने वाला है। इसके तहत सरकार जल्द ही किसानों के बैंक खाते में कुल 160 करोड़ रुपए की क्लेम राशि ट्रांसफर करेगी। किसानों को यह भुगतान फसल कटाई प्रयोग के आधार पर होगा। हालांकि इस भुगतान से किसान संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। इधर, किसान संगठनों को बीमा राशि के भुगतान का इंतजार है।
मुख्यमंत्री ने दिया था आश्वासन (Chief Minister had given assurance)
पिछले रबी सीजन 2023-24 के दौरान राज्य में कम बारिश और पाले के कारण किसानों की फसलों में नुकसान हुआ था। इसको लेकर किसानों की बीमा क्लेम की राशि लंबित चल रही थी। किसानों को क्लेम दिलाने के लिए किसान संगठन भी लगातार सरकार से मांग कर रहे थे। इधर, बीते दिनों चूरू विधायक हरलाल सहारण ने भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से क्लेम राशि दिलाने की मांग की थी। इसको लेकर सीएम भजनलाल ने उन्हें जल्द बीमा क्लेम स्वीकृत करवाने का आश्वासन दिया था। अब सरकार जल्द ही किसानों के खाते में 160 करोड़ रुपए का क्लेम राशि का भुगतान करने वाली है। यह भुगतान फसलों की कटाई प्रयोग के आधार पर होगा।
450 करोड़ रुपए का नुकसान (Loss of Rs 450 crore)
किसान सभा का कहना है कि पिछले रबी सीजन में रबी की बुवाई करने वाले किसानों को करीब 450 करोड़ का नुकसान हुआ है। वह क्रॉप कटिंग की रिपोर्ट देखकर ही कुछ निर्णय लेंगे। संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. जगदेव सिंह ने बताया कि योजना में किसानों द्वारा कुल 7.01 लाख हैक्टेयर फसलों के लिए कुल 6.79 लाख हैक्टेयर के लिए आवेदन किया और अपनी फसलों का बीमा कराया था। किसानों के देव फसल बीमा के क्लेम लंबित थे। सरकार ने बीमा कंपनी को देव अनुदान राशि का पूर्ण भुगतान कर दिया है।
पूरा क्लेम मिलने में संशय (Doubt in getting full claim)
किसान सभा का कहना है कि वर्ष 2023-24 में रबी सीजन के दौरान अत्यधिक सर्दी, पाले और कम बारिश से सर्वाधिक नुकसान चने की फसल को पहुंचा। जिले में सर्वाधिक चने की बुवाई बारानी क्षेत्र में होती है, जो मावड़ (माघ वृष्टि) पर निर्भर करती है। पिछले साल सर्दियों में होने वाली बारिश में कमी से चने की बुवाई करने वाले किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। चने की फसल का पिछले साल किसानों ने पीएम फसल बीमा योजना के तहत बीमा पंजीयन करवाया। इसमें करीब 3 लाख 50 हजार किसान बीमा क्लेम के हकदार है, जबकि जिस प्रकार से कंपनी ने लोकेशन के आधार खसरों का ऑनलाइन चयन किया है, वे अच्छे खसरे हैं। जिसके कारण चने की बुवाई करने वाले प्रभावित किसान सारे क्लेम के दायरे में नहीं आ पाएंगे।
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