सरसों हमारे देश की मुख्य तिलहनी फसलों में गिनी जाती है। रबी सीजन में इसकी खेती किसानों को अच्छी कमाई दे सकती है। खरीफ की फसल कटने के बाद अब रबी की बुवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
अगर आप भी इस बार सरसों बोने की सोच रहे हैं, तो बीज बोने से पहले सही किस्म चुनना बहुत जरूरी है। हर किस्म की पैदावार, तेल की मात्रा और पकने का समय अलग-अलग होता है। कुछ उन्नत किस्में एक हेक्टेयर में 28 क्विंटल तक उपज दे सकती हैं।
आइए जानते हैं सरसों की ऐसी 5 किस्मों की खासियत, ताकि किसान अपनी जरूरत और खेत की स्थिति के हिसाब से सही किस्म चुन सकें।
टी-59, जिसे वरुणा के नाम से भी जाना जाता है, सरसों की 8 मुख्य शाखाओं वाली किस्म है। यह किस्म देर से बुवाई करने वाले किसानों के लिए उपयुक्त है। इसमें बुवाई के 45 से 50 दिन बाद फूल आने लगते हैं और फसल 130 से 135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
इस किस्म में तेल की मात्रा करीब 36 प्रतिशत होती है। असिंचित खेतों में इससे प्रति हेक्टेयर 15 से 18 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। इसके दाने मोटे और काले रंग के होते हैं। मोयले के प्रकोप से फसल को बचाने के लिए इसकी बुवाई 15 से 20 अक्टूबर के बीच करने की सलाह दी जाती है।
पूसा बोल्ड सरसों की एक जानी-मानी किस्म है। इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं और फलियां मोटी होती हैं।
यह किस्म 130 से 140 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इसके दानों में 37 से 38 प्रतिशत तक तेल निकलता है। एक हेक्टेयर में इससे 20 से 25 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है।
अच्छी उपज के लिए किसानों को अपने इलाके की जलवायु और मिट्टी के हिसाब से बुवाई करनी चाहिए और फसल की देखभाल करनी चाहिए।
बायो 902, जिसे पूसा जयकिसान के नाम से भी जाना जाता है, सरसों की रोग प्रतिरोधी किस्मों में शामिल है। इस किस्म में सफेद रोली और मुरझान रोग लगने की संभावना कम होती है। इसके पौधों की ऊंचाई 160 से 180 सेंटीमीटर तक होती है और फसल 130 से 140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
इस किस्म में तेल की मात्रा 38 से 40 प्रतिशत तक होती है। इससे प्रति हेक्टेयर 18 से 20 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। इसके दाने भूरे रंग के होते हैं, जिनमें हल्की कालिमा दिखाई देती है। इसकी एक खास बात यह है कि पकने के बाद भी इसके दाने आसानी से झड़ते नहीं हैं।
डीआरएमआर 150-35 सरसों की अच्छी पैदावार देने वाली किस्म है। इससे प्रति हेक्टेयर करीब 18 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। इसके पौधों की ऊंचाई 164 से 186 सेंटीमीटर तक होती है। इस किस्म में तेल की मात्रा लगभग 39.8 प्रतिशत होती है।
इसकी खासियत यह है कि इसकी फसल केवल 114 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। कम समय में फसल तैयार होने के कारण यह किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है। हालांकि, इसकी बुवाई से पहले अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के अनुसार किस्म का चयन करना चाहिए।
डीआरएमआरआईजे-31, जिसे गिरिराज के नाम से भी जाना जाता है, सरसों की उन्नत और प्रमाणित किस्म है। इसके पौधों की ऊंचाई 180 से 210 सेंटीमीटर तक होती है। इस किस्म की फसल 137 से 153 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
इसमें तेल की मात्रा 39 से 42.6 प्रतिशत तक होती है। वहीं, इससे प्रति हेक्टेयर 23 से 28 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। अधिक पैदावार और तेल की अच्छी मात्रा इसकी प्रमुख खासियतें हैं।
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