Apple Farming in Kashmir: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) तकनीक का उपयोग अब कृषि क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर होने लगा है। इससे किसानों को फसल उत्पादन लागत में कमी करने, बीमारियों का पता लगाने, प्रबंधन के लिए दवा की खोज करने और फसल उत्पादन सुधारने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में एआई-आधारित तकनीक और कार्गों ट्रेन कनेक्टिविटी ने कश्मीर के सेब उत्पादन उद्योग में एक नई क्रांति ला दी है। आधुनिक तकनीक (Advanced Technology) और बेहतर ट्रांसपोर्टेशन ने यहां के सेब बागवानी किसानों का उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ाया है। बेहतर आपूर्ति श्रृंखला ने किसानों को केवल अधिक मुनाफा दिला रही है, बल्कि आधुनिक तकनीक ने उनकी मेहनत को भी आसान बनाया। बागवानी क्षेत्र में यह बदलाव कश्मीर की अर्थव्यवस्था और 30 लाख किसानों की आजीविका के लिए उम्मीद की किरण है।
कश्मीर में बागवानी क्षेत्र 10-12 हजार करोड़ (सालाना) रुपए का है और इसे घाटी की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ माना जाता है। कश्मीर की सेब घाटी में एक नई क्रांति शुरू हो रही है, जिसका नेतृत्व कर रहे हैं खुर्रम मीर, जिन्होंने दस साल पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) में एक शोध पत्र में कश्मीर के सेब उद्योग के संकट की चेतावनी दी थी। वर्तमान में उनकी स्टार्टअप कंपनी कुल (कश्मीरी में 'पेड़') के माध्यम से वे सेब की खेती (Apple Cultivation) को आधुनिक और टिकाऊ बना रहे हैं। उनकी तकनीकों ने न केवल घाटी में सेब उत्पादन बढ़ाया, बल्कि किसानों की आमदनी और आजीविका को भी पहले से बेहतर बनाया है। वहीं, नई रेल कनेक्टिविटी से कश्मीर बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहा है। वर्तमान में फल उत्पादकों को राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से नुकसान होता है। पारिमपुरा फ्रूट मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष बशीर साहब का कहना है कि कश्मीर से ट्रेन परिवहन सुविधा शुरू होने से घाटी के लोगों को बहुत बेनिफिट मिलेगा'।
खुर्रम मीर ने हार्वर्ड में अपने शोध में बताया था कि बढ़ता तापमान, पुराने खेती के तरीके और घटता मुनाफा कश्मीर के सेब उद्योग को संकट में डाल सकता है। अब वे अपनी स्टार्टअप कुल के जरिए इस संकट को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। शोपियां में अपने बेस से वे हाई-डेंसिटी खेती (ड्वार्फ) को बढ़ावा दे रहे हैं। इसमें छोटे और जल्दी फल देने वाले सेब के पेड़ों को करीब-करीब लगाया जाता है। खुर्रम मीर की कंपनी कुल ने घाटी के सेब उत्पादन को आधुनिक तकनीकों से बदल दिया। हाई-डेंसिटी खेती में लगाए जाने वाले छोटे, जल्दी फल देने वाले पेड़, 2 से 3 साल में फल उत्पादन देने लगते हैं, जबकि पुराने पेड़ों को 8-10 साल लगते हैं। इससे किसान प्रति एकड़ चार गुना अधिक सेब उत्पादन करते हैं। ड्रिप सिंचाई, सौर ऊर्जा से चलने वाले मौसम स्टेशन और AI-आधारित सेंसर से फसल की सुरक्षा, स्वचालित कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग सुविधा और सीधे बाजार तक पहुंच जैसे आपूर्ति श्रृंखला से किसानों को अधिक मुनाफा दिया। सेब उद्योग जम्मू-कश्मीर के जीडीपी में 8 प्रतिशत का योगदान देता है और 30 लाख लोगों की आजीविका रोजगार प्रदान करता है।
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