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बिजनेस आइडिया : सरकार इन व्यवसाय को शुरू करने में देती आर्थिक मदद, जानें, पूरी जानकारी

बिजनेस आइडिया : सरकार इन व्यवसाय को शुरू करने में देती आर्थिक मदद, जानें, पूरी जानकारी
पोस्ट -18 अक्टूबर 2023 शेयर पोस्ट

सरकार की सहायता से गांव में ही शुरू करें ये बिजनेस, पूरी जानकारी विस्तार से जानें

Small Business : देश के गांवों में रहने वाले अधितकर लोगों की जीविका का मुख्य व्यवसाय खेती-किसानी को ही माना गया है। किसान पारंपरिक फसल की खेती से लाभ प्राप्त कर अपना घर चलाते हैं। परंतु, पिछले कुछ वर्षों में कृषि के क्षेत्र में सहायक व्यावसायों का चलन तेजी से बढ़ा है। आज कई राज्यों के किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन जैसे  सहायक कारोबार से काफी अच्छा पैसा भी कमा रहे हैं।  खास बात यह है इस प्रकार का बिजनेस शुरू करने पर सभी राज्यों की सरकारों द्वारा अपने-अपने स्तर पर योजना लागू कर तय प्रावधानों के अनुसार किसानों को बैंकों से लोन, ब्याज में छूट, सब्सिडी, बीमा सहित संबंधित बिजनेस के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। बता दें कि हरियाणा, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड और राजस्थान राज्यों की सरकारें अपने-अपने राज्य में पशुपालन पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन तथा सॉइल टेस्टिंग लैब का कारोबार शुरू करने वाले किसानों को बढ़-चढ़कर सब्सिडी देती है। ऐसे में किसान संबंधित योजनाओं का लाभ लेकर बंजर और बेकार पड़ी अपनी जमीन पर इस तरह के व्यवसाय शुरू कर हर महीने लगभग 25 से 30 हजार रुपए तक की कमाई कर सकते हैं। खास बात यह है कि इस तरह के बिजनेस करने में अधिक लागत खर्च नहीं करनी पड़ती है और कम पढे़-लिखे लोग भी आसानी से इन बिजनेस को शुरू कर सकते हैं। 

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आईए, इस पोस्ट की मदद से इन सहायक बिजनेस के बारे में विस्तार से जानें।

पशुपालन / Animal Husbandry Business

पशुओं में नस्ल सुधार कर दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने और पशुपालन क्षेत्र में उद्यमिता विकास कर रोजगार के नए अवसर बनाने के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पशुधन मिशन संचालित किया जाता है। जिसमें विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र में गाय-भैंस पालन, भेड़-बकरी तथा सुअर पालन, मछली और मुर्गी पालन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए बैंकों से लोन, ब्याज में छूट, सब्सिडी और बीमा समेत अन्य मदों पर आर्थिक सहायता सरकार की ओर से दी जाती है। केंद्र प्रायोजित इस मिशन के तहत राज्यों की सरकारें अपने-अपने स्तर पर परियोजना चलाकर अपने किसानों को तय प्रावधानों के अनुसार, गांव में रहने वाले लोगों को पशुओं के भोजन एवं चारे के विकास, मुर्गी-बतख, भेड़-बकरी और सुअर पालन क्षेत्र में वित्तीय सहायता प्रदान करती है। ऐसे में  ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग सरकार की इस योजना का लाभ लेकर अपने बंजर और बेकार पड़ी जमीन पर भेड़-बकरी पालन का बिजनेस कर सकते हैं। इस बिजनेस को कम लागत और घर के छोटे से हिस्से से भी शुरू किया जा सकता है। वर्तमान में पशुपालन क्षेत्र में बकरियों का पालन तेजी से बढ़ रहा है। बकरियों के दूध एवं इसके मांस की बढ़ती डिमांड को देखते हुए राज्य सरकारें बढ़-चढ़कर अपने किसानों को  बकरी पालन के लिए भारी सब्सिडी भी दे रही है। वहीं,  नाबार्ड बकरी पालन के लिए बहुत ही सस्ती दरों पर लोन उपलब्ध कराता है। बकरी पालन करने के इच्छुक लोग अपने-अपने राज्य के पशुपालन विभाग से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मधुमक्खी पालन/ Beekeeping

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बी कीपिंग एंड हनी मिशन परियोजना चला रही है। जिसमें किसानों को मधुमक्खी पालन, शहद प्रोसेसिंग, बाटलिंग व शहद टेस्टिंग और मधुमक्खी पालन बक्सा पर आर्थिक मदद दी जाती है। भारत सरकार की ओर से लघु और सीमांत किसानों को इसके लिए 80-85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। वहीं, इसमें हर संभव मदद करने के लिए नाबार्ड और राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड ने टाईअप कर रखा है। मधुमक्खी पालन के लिए किफायती दरों पर लोन भी नाबार्ड  उपलब्ध कराता है। ऐसे में किसान इस बिजनेस को शुरू कर इससे शहद का उत्पादन कर काफी अच्छी कमाई कर सकते हैं। बता दें कि मधुमक्खी उत्पादित शहद की मांग बाजार में हमेशा ही रहती है और इसकी कीमत भी अच्छी रहती  है। वहीं, देश की राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पर राज्य के किसानों को आकर्षक सब्सिडी देती है। इसके लिए किसान अपने राज्य के कृषि एवं उद्यान निदेशालय से संपर्क कर सकते हैं।

सॉइल टेस्टिंग लैब / Soil Testing Lab

सॉयल टेस्टिंग लैब का बिजनेस गांव में काफी लाभकारी साबित होता है, क्योंकि गांव में रहने लोग खेती करने से पहले अपने खेतों की मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा जांचने के लिए मिट्टी का नमूना सॉइल टेस्टिंग लैब भेजते हैं। इसके लिए उन्हें गांव से दूर शहरों में जाना पड़ता है। जिसमें किसानों समय और पैसा दोनों ही खराब होता है। ऐसे में अगर गांव में ही सॉइल टेस्टिंग लैब की स्थापना की जाए, तो इससे हर बार अच्छी कमाई की जाती  है। वहीं, केंद्र और राज्य सरकारें सॉइल टेस्टिंग लैब बनाने के लिए क्रमश 60 प्रतिशत और 40 प्रतिशत अनुदान भी देती है। सरकार की ओर से दी जाने वाली आर्थिक मदद मिट्टी जांच मशीन, रसायन व लैब चलाने के लिए कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, जीपीएस आदि उपकरणों के लिए दी जाती है। वहीं, लैब निर्माण के लिए बैंकों से बहुत ही आकषर्क ब्याज दरों पर लोन भी उपलब्ध कराया जाता है। सॉइल टेस्टिंग लैब की स्थापना करने के लिए पढे़-लिखे युवक-युवतियां/ किसान/ किसान उत्पादक संगठन अपने जिले के कृषि उपनिदेशक, संयुक्त निदेशक संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग https://agricoop.gov.in/ की वेबसाइट या  https://soilhealth.dac.gov.in/home  पर भी  संपर्क कर सकते हैं। वहीं,  किसान कॉल सेंटर 1800 180 1551 पर कॉल कर संपर्क कर सकते हैं। 

मछली पालन बिजनेस / Fish Farming Business

मछली, झींगा मछली और सीप पालन बिजनेस वर्तमान में तेजी से अपने पैर प्रसार रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह बिजनेस काफी फायदेमंद है, क्योंकि देश-विदेश के बाजारों में मछली उत्पादन की डिमांड दिन प्रतिदिन उच्च स्तर पर पहुंचती जा रही है। ऐसे में गांव में रहने वाले लोग अपने बेकार पड़े खेतों में तालाब बनाकर जलीय कृषि में मछली, झींगा मछली और सीप पालन कर इनके उत्पादन से बढ़िया पैसा कमा सकते हैं। खास बात यह है कि भारत सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए “ब्लू रिवॉल्यूशन” के अतंर्गत “ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना” चला रही है। जिसमें केन्द्र सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन के लिए तालाब बनाने और अन्य जरूरी संसाधनों के लिए किसानों को बैंक ऋण, सब्सिडी और बीमा सहित मछली पालन प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इच्छुक किसान अपने राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग से संपर्क कर योजना की जानकारी ले सकते हैं। वहीं, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय भारत सरकार की वेबसाइट https://dahd.nic.in/  पर विजिट भी कर सकते हैं।  बता दें कि पंजाब, बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों की सरकारें मछली पालन के लिए किसानों को तालाब निर्माण के लिए अपने-अपने स्तर पर तय प्रावधानों के अनुसार अनुदान भी देती है।

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