Sugar marketing season 2024-25 : चीनी मिलों को घाटे से उबारने और उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कई प्रगतशील कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, किसान परिवारों और श्रमिकों की समृद्धि के लिए भी सरकार द्वारा समर्पित प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत सभी सहकारी चीनी मिलों में एथेनॉल प्लांट (Ethanol Plant) स्थापित किए जाने जैसी परियोजनाओं का क्रियान्वयन चल रहा है, तो दूसरी ओर राज्यों द्वारा गन्ना के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) को निरंतर बढ़ाया भी जा रहा है, ताकि गन्ना उत्पादकों को उत्पादन के लिए उचित और लाभकारी मूल्य प्राप्त हो। इस बीच गन्ना उत्पादक किसानों एवं श्रमिकों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने सितंबर में समाप्त होने वाले चालू सत्र 2024-25 के लिए 10 लाख टन चीनी के निर्यात की मंजूरी दे दी है। खाद्य मंत्रालय ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया, जिसमें मिल-वार चीनी निर्यात (Sugar Export) कोटा निर्धारित किया गया है। गत विपणन 2023-24 सत्र के दौरान घरेलू आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण चीनी के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू था।
केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, भारत सरकार ने चालू चीनी विपणन सत्र 2024-25 के लिए 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि इससे मूल्य स्थिरता सुनिश्चित होगी। सरकार के इस निर्णय से 5 करोड़ किसान परिवारों एवं पांच लाख श्रमिकों को सहायता मिलेगी तथा देश का चीनी क्षेत्र (Sugar Sector) मजबूत होगा।
चीनी उद्योग इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार के चीनी निर्यात की मंजूरी दिए जाने के फैसला का स्वागत किया है। प्रमुख चीनी संगठन (आईएसएमए) ने कहा यह प्रगतिशील कदम अधिशेष चीनी स्टॉक (Surplus Sugar Stock) को संबोधित करता है और चीनी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं, ई-बाय सुगर (eBuySugar.com) के संस्थापक और सीईओ उप्पल शाह ने एक बयान में कहा, चीनी निर्यात की अनुमति देने के इस फैसले से चीनी की कीमतों में स्थिरता आएगी और मिलों को अतिरिक्त आय होगी, जिससे किसानों का बकाया चुकाने में सहायता मिलेगी।
उप्पल शाह ने कहा कि चीनी निर्यात को मंजूरी देने के साथ ही मुझे उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इथेनॉल की कीमतों में भी बढ़ोतरी करेगी, जो उत्पादकों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। चीनी मिलों के लिए चालू चीनी विपणन सत्र 2024-25 का सीजन सुचारू रहेगा। उन्होंने कहा “हम जानते हैं कि भारतीय बाजार में चीनी की कम कीमतों के कारण चीनी मिले नकदी की समस्या से जूझ रही हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से कमजोर हो गई हैं। ऐसे समय पर लिया गया यह फैसला वित्तीय लिक्विडिटी को बढ़ाकर, गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करके और कृषि अर्थव्यवस्था की समग्र मजबूती में योगदान देकर चीनी मिलों की महत्वपूर्ण सहायता करेगा।"
आईएसएमए ने कहा कि यह सरकार के टिकाऊ और संपन्न चीनी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने का प्रमाण है। चीनी के निर्यात की यह मंजूरी इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) की लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप है। इसमें लिक्विडिटी बढ़ाने, किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और घरेलू चीनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए निर्यात की मंजूरी देने की मांग की गई है। ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने बताया कि 10 लाख टन चीनी के निर्यात करने की अनुमति चीनी मिलों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करता है।
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