Sheep Farming Scheme : किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तरह-तरह की योजनाएं चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कृषि परिवारों को कृषि के साथ-साथ लघु पशु जैसे- भेड़, बकरी के पालन से जोड़ा जा रहा है। वर्तमान में देश के अधिकतर क्षेत्रों में किसानों द्वारा भेड़ों का पालन (Sheep Farming) बड़े स्तर पर किया जा रहा है, जिससे उनकी आय दोगुनी हुई है। इसको देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य के किसानों और पशुपालकों के लिए भेड़ पालन योजना चला रही है। राज्य सरकार द्वारा इस योजना का क्रियान्वयन प्रदेश के 40 जनपदों में किया जा रहा है। इस योजना के तहत जो इच्छुक किसान भेड़ पालन करना चाहते हैं, उन्हें सरकार के ओर से 90 प्रतिशत यानी 1.53 लाख रुपए की सब्सिडी दी जा रही है। अभी 40 जिलों में यह योजना लागू की जा रही है। प्रदेश के गोंडा जिले के प्रभारी मुख्य पशुपालन चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी द्वारा यह जानकारी दी गई है।
मुख्य पशुपालन चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा जिले में भेड़ पालन योजना लागू की गई है। इससे पशुपालकों के लिए भेड़ का पालन करने का सुनहरा मौका है। जनपद में भेड़ पालन योजना के लिए पांच लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। इस योजना में सभी लाभार्थी को 20 भेड़ मादा और एक नर भेड़ा दिया जाएगा। इस योजना में भेड़ पालन यूनिट की लागत 1,70,000 रुपए निर्धारित की गई है। इसमें लाभार्थियों को 1 लाख 53 हजार रुपए की सब्सिडी राज्य सरकार की तरफ से दी जाएगी, तो वहीं 17 हजार रुपए स्वयं लाभार्थी किसान को देना होगा। उन्होंने बताया कि जो भी किसान इच्छुक हैं, वे इस योजना में आवेदन कर लाभ उठा सकते हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि भेड़ पालन योजना जिले के पशुपालकों के लिए रोजगार का साधन बनेगी। इसका लाभ लेकर किसान भेड़ पालन कर सकेंगे। इससे किसान भाईयों को तीन फायदे होंगे। पहला भेड़ से उत्पादित बालों को बेचकर किसान पैसा कमा सकते हैं, उनके मांस से भी आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है। वहीं, भेड़ का गोबर भी बहुत अच्छा उर्वरक माना जाता है, इसका इस्तेमाल खेतों की उत्पादकता को बढ़ाता है। एक उन्नत नस्ल की भेड़ की कीमत 5 हजार से 10 हजार रुपए के बीच होती है।
प्रभारी मुख्य पशुपालन चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि, इस योजना का लाभ जनपद के स्थाई निवासी किसान/पशुपालकों को मिलेगा। 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के लघु, सीमांत या भूमिहीन किसान इस योजना के लिए पात्र होंगे। भेड़ पालक के पास भेड़ों को रखने का पर्याप्त स्थान होना जरूरी है। भेड़ पालकों एवं भेड़ पालन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों का प्राथमिकता के आधार पर चयन किया जाएगा। आवेदन के लिए अपने साथ आधार कार्ड, स्थाई निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की छाया प्रति, भेड़ पालन से संबंधित प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र योजना के अंतर्गत न्यूनतम 5 वर्ष तक के भेड़ पालन करने के लिए शपथ पत्र लेकर जाए।
प्रभारी मुख्य पशुपालन चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी बताते हैं, कि भेड़ पालन के लिए आवेदन फार्म मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय विकास भवन में या संबंधित विकासखंड स्तरीय पशु चिकित्साधिकारी से मिलेगा। उसे भरने के बाद संबंधित दस्तावेजों को लगाना है। अपने ग्राम सभा के प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) से सत्यापन करने के पश्चात फॉर्म को पशुपालन विभाग में आकर जमा कर दें। उन्होंने बताया कि जांच के बाद किसानों को योजना का लाभ दिया जाएगा। पशुपालन निदेशालय, उत्तर प्रदेश के विभागीय वेबसाइट https://www.animalhusb.upsdc.gov.in/ पर ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है। आवेदन पत्र एवं विशेष जानकारी या किसी भी समस्या के समाधान के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और विकास खंड के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कार्यालय में संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
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