उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन के मामले में देश में पहले स्थान पर है। राज्य में हर साल करीब 250.66 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 34 फीसदी है। इसके अलावा, यूपी में 620.7 लाख मीट्रिक टन बागवानी फसलों का उत्पादन होता है। राज्य में फसलों को सुरक्षित रखने के लिए 2.06 करोड़ मीट्रिक टन की शीतगृह भंडारण क्षमता भी मौजूद है।
अब उत्तर प्रदेश अपने कृषि कारोबार को विदेशों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। इसको लेकर केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित विश्व आलू कांग्रेस-2026 में भारत और केन्या के बीच चर्चा हुई। इस बैठक में यूपी के राजस्व परिषद अध्यक्ष एवं उद्यान और खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा समेत भारतीय उच्चायोग के अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान भारतीय कृषि कंपनियों को केन्या में जमीन लीज पर लेकर खेती और फसल उत्पादन करने के लिए आमंत्रित किया गया। इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजार में अपना कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है।
अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कृषि उद्यमियों और कंपनियों को अब अफ्रीकी देश केन्या में खेती करने का मौका मिल सकता है। इसके लिए भारतीय उद्यमियों को केन्या में जमीन लीज पर देने का प्रस्ताव रखा गया है। यहां पैदा होने वाली फसलों को वापस भारत भी भेजा जा सकेगा। इस पहल से यूपी के किसानों और कृषि से जुड़े कारोबारियों को विदेशों में अपना व्यापार बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं।
बीएल मीणा के अनुसार, भारतीय कृषि उद्यमी केन्या में जमीन लीज पर लेकर खेती कर सकेंगे। वहां उगाई गई फसलों को भारत के बाजारों में बेचने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा, बैठक में कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, उनकी गुणवत्ता सुधारने और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। अगर यह पहल आगे बढ़ती है, तो उत्तर प्रदेश के कृषि कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार करने का नया मौका मिल सकता है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन के मामले में देश में पहले स्थान पर है। यहां हर साल करीब 250.66 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 34 फीसदी है। इसके अलावा, राज्य में हर साल 620.7 लाख मीट्रिक टन बागवानी फसलों का उत्पादन होता है। वहीं, यहां 2.06 करोड़ मीट्रिक टन की शीतगृह भंडारण क्षमता भी है। इन सुविधाओं के कारण उत्तर प्रदेश कृषि कारोबार और खाद्य प्रसंस्करण के बड़े केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
विश्व आलू कांग्रेस-2026 में उत्तर प्रदेश की आधुनिक खेती तकनीकों और नई रिसर्च के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें मेरठ और आसपास के इलाकों में टिश्यू कल्चर और एरोपोनिक्स तकनीक से रोगमुक्त आलू के बीज तैयार करने के प्रयासों को खास माना गया।
एरोपोनिक्स एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मिट्टी के बिना हवा में पौधों की जड़ों को विकसित किया जाता है। इससे फसल उगाई जाती है। वहीं, अगर केन्या के साथ यह साझेदारी आगे बढ़ती है, तो यूपी के कृषि उद्यमियों को विदेश में निवेश करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने के नए अवसर मिल सकते हैं।
प्रदेश सरकार का ध्यान अब केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, अच्छी पैकेजिंग और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर भी है। बैठक में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को उत्तर प्रदेश में कृषि कारोबार की संभावनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई।
इसके साथ ही डिजिटल पोर्टल और डीबीटी (DBT) के जरिए कृषि से जुड़ी सरकारी सुविधाओं और सप्लाई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के एशिया निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह, भारत में CIP के कंट्री मैनेजर डॉ. नीरज शर्मा और अन्य प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
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