पैराक्वाट खरपतवारनाशक की बिक्री और उपयोग पर 60 दिन की रोक

पैराक्वाट खरपतवारनाशक की बिक्री और उपयोग पर 60 दिन की रोक
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खेती में खरपतवार सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इससे निपटने के लिए किसान अलग-अलग तरह के खरपतवारनाशक का उपयोग करते हैं। इनमें पैराक्वाट खरपतवारनाशक (Paraquat Herbicide) भी शामिल है, जो बेहद प्रभावी और तेजी से काम करने वाली दवा है। हालांकि, यह उतना ही खतरनाक खरपतवारनाशक भी है और इसके घातक प्रभावों के कारण तेलंगाना सरकार ने पैराक्वाट के उपयोग और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से 60 दिनों का प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला किसानों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। साथ ही, राज्य सरकार ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से देशभर में इस जहरीले शाकनाशी पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग भी की है।

आइए इस लेख में समझते हैं कि सरकार ने यह फैसला क्यों लिया, इसके पीछे के 5 बड़े कारण क्या हैं, और इस प्रतिबंध से किसानों तथा प्रकृति को क्या फायदे हो सकते हैं।

प्रतिबंध लगाने के 5 बड़े कारण एक नजर में (5 major reasons for the ban at a glance)

इस जहरीले रसायन पर रोक लगाने के पीछे ये मुख्य पहलू हैं: (These are the main reasons behind the ban on this toxic chemical)

  • अत्यधिक विषाक्तता: यह एक अत्यंत जहरीला रसायन है। इसके संपर्क में आने पर मानव के कई अंग विफल हो सकते हैं।
  • कोई मारक उपलब्ध नहीं: चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका कोई प्रभावी प्रतिरोधक या इलाज मौजूद नहीं है, जिससे मृत्यु की संभावना बहुत अधिक होती है।
  • फेफड़ों को स्थायी नुकसान: इसके संपर्क में आने या सांस के जरिए अंदर जाने पर फेफड़ों को गंभीर और स्थायी क्षति पहुंचती है।
  • आत्महत्या के मामलों में दुरुपयोग: इसकी आसान उपलब्धता के चलते इसका इस्तेमाल आत्महत्या के लिए किया जा रहा था, जहां बचने की गुंजाइश न के बराबर होती है।
  • किसानों और पर्यावर की सुरक्षा: खेतों में छिड़काव के दौरान सीधे संपर्क में आने वाले किसानों के स्वास्थ्य पर इसके घातक दुष्प्रभाव देखे गए हैं। साथ ही  लंबे समय तक इसके उपयोग से पर्यावरण पर भी दुष्प्रभाव पड़ने की चिंता है।

60 दिनों के लिए रोक (60-day moratorium)

तेलंगाना सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड के उपयोग और बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध पूरे राज्य में 60 दिनों के लिए लागू किया गया है, यह अवधि राज्य सरकार द्वारा लागू किया जाने वाला अधिकतम समय है। इसे कीटनाशी अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के तहत लागू किया गया है। जरूरत पड़ने पर इस प्रतिबंध को आगे 30 दिनों तक बढ़ाया भी जा सकता है। सरकार के आदेशानुसार, यह प्रतिबंध पैराक्वाट डाइक्लोराइड तथा उसके सभी प्रकार के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर लागू होगी।

प्रतिबंध लगाने के क्या कारण हैं? (What are the reasons for imposing the ban?)

सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला खरपतवारनाशक के मानव और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों से जुड़ी रिपोर्टों और प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। खासकर उन किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है, जो इसके सीधे संपर्क में आते हैं। राज्य के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने इस फैसले को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इससे पहले 30 मार्च को तेलंगाना विधानसभा ने एक प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार से इस खरपतवारनाशक पर पूरे देशभर में स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग भी की थी। उल्लेखनीय है कि किसी भी कीटनाशी या खरपतवारनाशक दवा पर स्थायी रोक या प्रतिबंध लगाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है। इस विषय में तेलंगाना सरकार ने केंद्र से औपचारिक रूप से कार्रवाई करने की मांग भी की है।

कठोर कार्रवाई के निर्देश (Strict action instructions)

कृषि विभाग को निर्देशित किया गया है कि इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, पैराक्वाट डाइक्लोराइड की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, क्योंकि यह खरपतवारनाशक दवा इंटरनेट के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो रही थी। यह मुद्दा पहले कृषि नीति से जुड़े प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के सामने रखा था। इसके पश्चात उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

देशभर में प्रतिबंध की मांग (Demand for nationwide ban)

तेलंगाना के चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टर संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पैराक्वेट डाइक्लोराइड (ग्रामोक्सोन) अत्यंत जहरीला खरपतवारनाशक है, जिसके संपर्क में आने पर फेफड़ों को गंभीर और स्थायी नुकसान, अनेक अंगों का विफल होना तथा मृत्यु तक हो सकती है, क्योंकि इसका कोई प्रभावी प्रतिरोधक मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों ने यह भी चिंता व्यक्त है कि यह रसायन न सिर्फ खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए खतरनाक है, बल्कि इसका दुरुपयोग आत्महत्या के मामलों में भी हो रहा है, जहां बचाव की संभावना बहुत कम होती है। स्वास्थ्य संगठनों ने इसे एक बहुत जरूरी कदम बताते हुए केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि देशभर में पैराक्वाट पर स्थायी प्रतिबंध लागू किया जाए, जैसा कि दुनिया के कई देशों में इसके गंभीर दुष्प्रभावों को देखते हुए पहले ही इस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है या इसके उपयोग को सीमित कर दिया गया है।

पैराक्वेट डाइक्लोराइड या क्रिस्टल ग्रामोक्सोन (Paraquat dichloride or crystal Gramoxone)

पैराक्वेट डाइक्लोराइड (क्रिस्टल ग्रामोक्सोन) एक तेजी से असर करने वाला, गैर-चयनात्मक (नॉन-सेलेक्टिव) और संपर्क शाकनाशी है, जो खरपतवारों को जल्दी सुखाकर नष्ट कर देता है। छिड़काव के कुछ घंटों के भीतर इसका असर दिखाता है। चाय, कपास, और फलदार फसलों में खरपतवार नियंत्रण के लिए यह मुख्य रूप से इस्तेमाल होता है। यह जितना असरदार है, उतना ही खतरनाक भी माना जाता है। इसके इस्तेमाल से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव लंबे समय से चिंता का कारण रहे हैं। 

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