गेहूं की बंपर पैदावार के लिए बुवाई से पहले रखें इन 5 बातों का ध्यान

पोस्ट -18 अक्टूबर 2026 | Author: Anil Yadav शेयर पोस्ट

पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बदला है। देश के कई राज्यों में तेज हवाओं के साथ हल्की से भारी बारिश दर्ज की गई है। इस बीच रबी सीजन में गेहूं की बुवाई के लिए बारिश की राह देख रहे किसानों ने खेत की तैयारी शुरू कर दी है। वे बिना समय गंवाए खेत तैयार कर रहे हैं, ताकि खेत में मौजूद पर्याप्त नमी का फायदा बीजों के अंकुरण में मिल सके।

गेहूं की अच्छी फसल के लिए सिर्फ अच्छी क्वालिटी का बीज चुनना काफी नहीं है। मिट्टी की स्थिति, खेत की नमी, बुवाई का सही समय, बीज की गहराई और उचित बीज दर भी अहम हैं। बुवाई से पहले की गई छोटी-सी लापरवाही भी फसल की शुरुआती बढ़वार और पैदावार को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बुवाई शुरू करने से पहले किसानों को इन बातों पर खास ध्यान देना चाहिए।

गेहूं की बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं

बुवाई से पहले मिट्टी की जांच (Soil Testing) कराना किसानों के लिए उपयोगी कदम हो सकता है। इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति पता चलती है और खाद-उर्वरक के इस्तेमाल की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।

मिट्टी की स्थिति जाने बिना जरूरत से ज्यादा या कम उर्वरक डालने से खेती की लागत और फसल की बढ़वार, दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराकर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार खाद और उर्वरक डालना बेहतर रहता है।

खेत में नमी की स्थिति का रखें ध्यान

गेहूं के बीज के अंकुरण के लिए खेत में उचित नमी जरूरी है। मिट्टी बहुत सूखी हो, तो बीज को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती। बहुत गीली मिट्टी में खेत की तैयारी और बुवाई में परेशानी आ सकती है।

इसलिए बुवाई से पहले खेत की नमी की स्थिति जरूर देखें। सही नमी में बीज को अंकुरण के लिए जरूरी पानी मिल सकता है और फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर हो सकती है।

गेहूं की बुवाई का सही समय चुनें

गेहूं की खेती में सही समय पर बुवाई करना बहुत जरूरी है। बहुत जल्दी या बहुत देर से बुवाई करने पर फसल की बढ़वार और संभावित पैदावार प्रभावित हो सकती है।

बुवाई का समय क्षेत्र, मौसम और गेहूं की किस्म के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के लिए कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ के सुझाए समय के अनुसार बुवाई करें।

बीज को बहुत गहराई में न डालें

बुवाई के दौरान बीज की गहराई पर भी ध्यान देना जरूरी है। बीज बहुत ऊपर रहने पर नमी और बाहरी परिस्थितियों का असर पड़ सकता है। बहुत गहराई में बोने पर बीज के अंकुर को मिट्टी की सतह तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। इसलिए खेत की मिट्टी और नमी के अनुसार उचित गहराई पर बीज बोएं।

गेहूं की बुवाई में बीज दर का रखें ध्यान

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बीज दर इस प्रकार हो सकती है:

  • समय पर बोई गई सिंचित फसल (सीड ड्रिल/लाइन से बुवाई): 40 किलोग्राम प्रति एकड़ (लगभग 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर)।
  • देर से बोई गई (पछेती) फसल: 45 से 50 किलोग्राम प्रति एकड़, क्योंकि देर से बुवाई में कल्ले (टिलर) कम निकलते हैं।
  • छिटकवा विधि (हाथ से फेंककर बुवाई): 45 से 50 किलोग्राम प्रति एकड़।

कई बार किसान ज्यादा बीज डालने को ज्यादा उत्पादन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन उचित बीज दर रखना जरूरी है। बीज की मात्रा खेत की स्थिति, बुवाई के समय, किस्म और सिंचाई व्यवस्था जैसी बातों पर निर्भर कर सकती है। देर से बुवाई होने पर कई परिस्थितियों में बीज दर बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन इसके लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

बीज का चयन और उपचार

बुवाई करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • बीज साफ हो और खरपतवारों के बीजों से रहित हो।
  • कटे-फटे बीज निकाल दें।
  • हमेशा उन्नत प्रजातियां चुनें।
  • एक हेक्टेयर के लिए लगभग 100 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है।
  • बुवाई के लिए प्रमाणित और उपचारित बीज का ही इस्तेमाल करें।

गेहूं में कितनी सिंचाई की जरूरत होती है?

गेहूं की खेती में 5 से 6 बार सिंचाई की जरूरत होती है। सिंचाई का समय इस प्रकार बताया गया है:

  • पहली सिंचाई: बुवाई के 20 से 25 दिन बाद।
  • दूसरी सिंचाई: 45 से 50 दिन बाद (पुष्पावस्था में)।
  • तीसरी सिंचाई: 70 से 80 दिन पर (दुग्धावस्था में)।
  • अंतिम सिंचाई: बुवाई के 115 से 120 दिन पर (दाना भरते समय)।

गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें?

इस फसल में रबी मौसम में उगने वाले सभी खरपतवार लगते हैं। इनकी रोकथाम निराई-गुड़ाई से की जा सकती है। कुछ रसायनों से भी रोकथाम की जा सकती है। इसके लिए पेंडामेथेलिन 30 EC की 3.3 लीटर मात्रा को 800 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के बाद छिड़काव करना चाहिए।

गेहूं में खाद और उर्वरक

गेहूं की पैदावार खाद और उर्वरक की मात्रा पर भी काफी निर्भर करती है। गेहूं में हरी खाद, जैविक खाद और रासायनिक खाद का इस्तेमाल किया जाता है। अच्छी उपज के लिए खेत में कम से कम 35 से 40 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और 50 किलोग्राम नीम की खली डालें। इन्हें अच्छी तरह मिलाकर खेत में बिखेर दें।

गेहूं में लगने वाले रोग और कीट, उनका नियंत्रण कैसे करें?

गेहूं की फसल में कीट और रोगों के प्रकोप से उत्पादन में काफी कमी आती है। इसलिए सही समय पर इनकी पहचान कर उचित फसल प्रबंधन करना बहुत जरूरी है।

पत्ती धब्बा रोग

शुरुआती अवस्था में नीचे की पत्तियों पर पीले और भूरेपन वाले अंडाकार धब्बे दिखाई देते हैं। बाद में धब्बों का किनारा कत्थई और बीच का हिस्सा हल्के भूरे रंग का हो जाता है। नियंत्रण के लिए थायोफिनेट मिथाइल 70 प्रतिशत WP की 700 ग्राम या जीरम 80 प्रतिशत WP की 2.0 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर लगभग 750 लीटर पानी में घोलकर स्प्रेयर की मदद से छिड़काव करें। 

गेरूई या रतुआ रोग

गेरूई भूरे, पीले या काले रंग की होती है। फफूंदी के फफोले पत्तियों पर पड़ जाते हैं, जो बाद में बिखरकर दूसरी पत्तियों को भी संक्रमित कर देते हैं। रोकथाम के लिए बुवाई समय से करें। फसल पर इस रोग के लक्षण दिखाई देने पर छिड़काव करें। यह रोग जनवरी के अंत या फरवरी के मध्य में आता है।

दीमक

दीमक सफेद रंग का कीट है, जो इकट्ठा होकर रहता है। सूखे की स्थिति में इसके प्रकोप की संभावना ज्यादा होती है। यह अंकुरित हो रहे बीजों और पौधों की जड़ों को खाकर नुकसान पहुंचाता है।

  • रोकथाम: खेत में कच्चे गोबर का इस्तेमाल न करें।
  • खड़ी फसल में प्रकोप होने पर: सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत EC की 2.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से दें।

तना छेदक

यह भी गेहूं के प्रमुख कीटों में शामिल है। यह गेहूं के तने को खाकर नुकसान पहुंचाता है। रोकथाम के लिए फसल में फुटान शुरू होते ही क्यूनालफॉस 25 EC का 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए जरूरी बात

गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए बुवाई के समय सिर्फ बीज डालना काफी नहीं है। मिट्टी की जांच, खेत में उचित नमी, बुवाई का सही समय, बीज की उचित गहराई और बीज की सही मात्रा जैसे छोटे-छोटे फैसले फसल की शुरुआती स्थिति पर असर डाल सकते हैं।

इसलिए बुवाई शुरू करने से पहले खेत की स्थिति का आकलन करें और अपने क्षेत्र की मिट्टी, मौसम और फसल की जरूरत के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर तैयारी करें। इससे अनावश्यक लागत से बचने और फसल को बेहतर शुरुआत देने में मदद मिल सकती है।

बारिश से किन किसानों को हो सकता है नुकसान?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 20 अक्टूबर को दिल्ली, यूपी, बिहार समेत 13 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। पूर्वी भारत में बिजली गिरने और वज्रपात का खतरा है। पहाड़ी राज्यों में कुछ जगहों पर लैंडस्लाइड की चेतावनी है। 3 राज्यों में बर्फबारी की चेतावनी भी जारी की गई है। मछुआरों को समुद्री इलाके से सुरक्षित जगहों पर जाने और किसानों को खुले में जाने से बचने के लिए कहा गया है।

बारिश से गेहूं, सरसों, चना और जौ जैसी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों को फायदा हुआ है। वहीं, भारी बारिश से टमाटर, आलू, गोभी (फूलगोभी और बंदगोभी), बैंगन और प्याज जैसी सब्जी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे किसान नियमित निगरानी करें और खेत में जलभराव की समस्या का तुरंत समाधान करें।

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