अगर आप किसान या पशुपालक हैं और डेयरी का काम करते हैं, तो आपके लिए यह योजना काम की हो सकती है। कई बार गाय या भैंस की अचानक मौत होने से पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। इस नुकसान से बचने के लिए यूपी सरकार की मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना मददगार साबित हो सकती है। इस योजना के तहत पात्र पशुओं का बीमा कराने पर सरकार प्रीमियम का 85% तक खर्च उठाती है। यानी पशुपालकों को प्रीमियम का केवल 15% हिस्सा देना होता है। आइए जानते हैं कि इस योजना का लाभ कैसे उठाएं और बीमा कराने से पहले किन जरूरी बातों का ध्यान रखें।
पशुधन बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य पशुओं की मौत या पॉलिसी में शामिल अन्य जोखिमों से होने वाले आर्थिक नुकसान से पशुपालकों को बचाने में मदद करना है। छोटे और सीमांत किसान अक्सर अपनी जमा पूंजी लगाकर गाय-भैंस खरीदते हैं। ऐसे में अगर किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण पशु की मौत हो जाती है, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और उनकी कमाई पर भी असर पड़ता है।
इस नुकसान को कम करने के लिए पशुओं का बीमा कराया जा सकता है। उत्तर प्रदेश की इस योजना के तहत तय नियमों और पात्रता के अनुसार गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और अन्य शामिल पशुओं का बीमा कराने की सुविधा मिल सकती है। सरकार की ओर से बीमा प्रीमियम पर सब्सिडी मिलने से पशुपालकों को बीमा कराने में आर्थिक मदद मिलती है।
योजना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक साल के बीमा के लिए पशुपालकों को अपनी जेब से यह राशि देनी पड़ सकती है:
इसके अलावा, बिना स्थायी पूर्ण दिव्यांगता कवर के सालाना प्रीमियम की दर 2.95% और इस कवर के साथ 3.95% बताई गई है। हालांकि, बीमा की दर पशु और पॉलिसी के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए बीमा कराने से पहले नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय या जिला पशुपालन विभाग से प्रीमियम की मौजूदा दरों और सब्सिडी की जानकारी जरूर लें।
अगर बीमित पशु की मृत्यु हो जाती है, तो पशुपालक बीमा पॉलिसी के नियमों के अनुसार क्लेम के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए पशु की मौत होने पर जल्द से जल्द संबंधित पशु चिकित्सालय और बीमा कंपनी को सूचना देना जरूरी है। क्लेम के लिए पशु की मृत्यु का प्रमाणपत्र, बीमा पॉलिसी, पहचान टैग नंबर और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
योजना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 21 दिनों के भीतर क्लेम की राशि बैंक खाते में भेजने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, भुगतान दस्तावेजों की जांच, क्लेम की मंजूरी और पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेगा।
वहीं, अगर बीमित पशु स्थायी रूप से पूरी तरह दिव्यांग हो जाता है और उसकी पॉलिसी में यह कवर शामिल है, तो तय नियमों के अनुसार बीमा राशि का 75% तक भुगतान मिल सकता है।
योजना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक परिवार के लिए पशुओं की श्रेणी के आधार पर बीमा कराने की सीमा तय की गई है।
हालांकि, बीमा कराने से पहले अपने पशुओं की श्रेणी और तय सीमा की जानकारी संबंधित पशु चिकित्सालय या जिला पशुपालन विभाग से जरूर प्राप्त करें।
पशुधन बीमा योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक पशुपालक अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय या जिला पशुपालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं। यहां से आप योजना की पात्रता, बीमा कवर, प्रीमियम और आवेदन करने की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद आप योजना के तहत बीमा करा सकते हैं। इससे पशुओं की मृत्यु या पॉलिसी में शामिल अन्य जोखिमों से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
Website - TractorGuru.in
Instagram - TractorGuru Instagram Page
Facebook - TractorGuru Facebook Page
यूपी आलू बीज अनुदान: ₹1,000 प्रति क्विंटल, जरूरी दस्तावेज।
प्याज-लहसुन की खेती पर ₹24,000 तक सब्सिडी, यहां करें आवेदन
11 दिसंबर से लागू होगी दूध नई दर, प्रति लीटर 10 रुपये बढ़ेंगे दाम।
पंजाब में गेहूं के बीज पर 50% सब्सिडी का ऐलान, जानें पूरी योजना
महिंद्रा 575 DI vs पावरट्रैक यूरो 50: कीमत, फीचर्स और तुलना।
हरियाणा के किसानों को बड़ी राहत! सत्यापन अटका तो भी मंडी में बिकेगा धान
किसान ने 4 एकड़ में उगाई अदरक, 5 साल में कमाए 50 लाख रुपये
The top choice for farmers in India. Check prices and explore exclusive offers now!