प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना : ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर 90 प्रतिशत सब्सिडी
इन उपकरणों पर मिलेगी सब्सिडी, इच्छुक किसान यहां करें आवेदन
इस साल उत्तर भारत के कई राज्यों में मानसून संतोषजनक नहीं रहा। उत्तर भारत के कई राज्यों में मानसूनी बारिश का दौर भी देरी से शुरू हुआ है। इसके चलते पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार एवं उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान सूबों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इन इलाकों में सामान्य से भी कम बरसात हुई, जिसकी वजह से यहां खरीफ फसलों के सीजन काफी प्रभावित हुआ। यहां के कई राज्य सूखे जैसी समस्या से जूझते हुए देखे गए हैं। इन क्षेत्रों में सूखे की स्थिति का सामना कर रहे किसानों के सामने अब रबी सीजन की फसलों की सिंचाई एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है। इन सभी स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने राज्य में किसानों को खेती की सिंचाई पद्धति में बदलाव करने की पहल पर जोर दिया है। किसानों को सिंचाई की नई तकनीकें अपनाने की सलाह दी है, जिससे कृषि के क्षेत्र में भूमिगत जल का दोहन कम हो और कम पानी से अधिक उत्पादन प्राप्त कर सके और पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल हो सके।
ड्रिप तथा स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी
दरअसल इस बार बिहार में मानसून कमजोर रहा, जिसके चलते यहां के कई इलाके सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं। सूखे की स्थिति का सामना कर रहे इन इलाकों में किसानों को खेती में काफी नुकसान हो रहा है। राज्य में इन दिनों सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से किसानों को इस बार सिंचाई की समस्या सताने लगी है। ऐसी स्थिति में सरकार किसानों को सिंचाई की नई पद्धति अपनाने की सलाह दे रही है, जिसमें पानी की खपत कम हो और उत्पादन पर भी कोई असर न पड़े। इसके लिए बिहार सरकार राज्य में किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप तथा स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने पर 90 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है। इसके लिए बिहार उद्यानिकी विभाग को आदेश जारी किया है। आदेश जारी होने के बाद विभाग ने किसानों का पंजीयन कराने की कवायद शुरू कर दी है। इच्छुक किसान बिहार के उद्यान विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट http://horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। और सिंचाई उपकरणों की खरीद पर सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। अनुदान की राशि किसानों को डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। आइए ट्रैक्टर गुरू के इस लेख के माध्यम से योजना के बारे में जानते हैं।
सभी श्रेणी के कृषकों को 90 प्रतिशत तक सब्सिडी
बिहार में कृषि से संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देने हेतु प्रधानमंत्री सिचाई योजना के तहत किसानों को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त टॉप-अप प्रदान करते हुए सभी श्रेणी के किसानों को ड्रिप सिंचाई पद्धति तथा स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अंतर्गत 90 प्रतिशत सहायता अनुदान देने का प्रावधान किया है। बिहार सरकार प्रधानमंत्री सिचाई योजना के तहत अपने राज्य में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला किसानों सहित सभी वर्ग के किसानों को पानी का समुचित एवं अधिकतम उपयोग कर कम पानी से अधिक उत्पादन लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
ड्रिप सिंचाई पद्धति और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति से लाभ
बिहार सरकार किसानों को सिंचाई की नई पद्धति अपनाने की सलाह दे रही है, जिसमें बिहार उद्यानिकी विभाग प्रधानमंत्री सिचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई पद्धति और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति पर अनुदान दे रही है। बिहार उद्यानिकी विभान के अधिकारियों का कहना है कि ड्रिप सिंचाई पद्धति और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति सूक्ष्म सिंचाई की एक उन्नत सिंचाई प्रणाली है, जिसके द्वारा पौधे के जड़ क्षेत्र में विशेष रूप से निर्मित प्लास्टिक पाइपों द्वारा कम समय अंतराल पर पानी दिया जाता है। इस सिंचाई पद्धति में पारंपरिक सिंचाई की तुलना में 60 प्रतिशत कम जल की खपत होती है। वहीं इस सिंचाई प्रणाली से फसल के उत्पादकता में 40-50 प्रतिशत की वृद्धि तथा उत्पाद की गुणवत्ता उच्च होती है। इससे लगभग 25-30 प्रतिशत उर्वरक की बचत होती है। इस सिंचाई प्रणाली से खरपतवार के जमाव में 60-70 प्रतिशत की कमी होती है। इस कारण मजदूरों के लागत खर्च में कमी तथा पौधों पर रोगों के प्रकोप में भी कमी आती है। जानकारी के लिए बता दें कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई पद्धति, स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति एवं रेनगन सिंचाई पद्धति का उपयोग किया जाता है।
ड्रिप सिंचाई पद्धति की विशेषता
ड्रिप सिंचाई पद्धति जिसे टपक सिंचाई भी कहते हैं। इस पद्धति में जल की एक-एक बूंद को सिंचाई के काम में लिया जा सकता है। यदि किसान खेत की सिंचाई साधारण विधि के बजाय ड्रिप सिंचाई विधि से करें तीन गुना ज्यादा क्षेत्र में उतने ही पानी में सिंचाई कर सकते हैं। इस पद्धति में बूंद-बूंद के रूप में फसलों के जड़ क्षेत्र तक एक छोटी व्यास की प्लास्टिक पाइप से पानी प्रदान किया जाता है। ड्रिप सिंचाई विधि का प्रयोग सभी फसलों की सिंचाई में करते हैं, लेकिन बागवानी में इसका प्रयोग ज्यादा अच्छे से होता है। ड्रिप सिंचाई विधि से पानी की बचत भी होती है। इस विधि से ऊंची-नीची जमीन पर सामान्य रुप से पानी पहुंचता है। इसमें सभी पोषक तत्व सीधे पानी से पौधों के जड़ों तक पहुंचाया जाता है तो अतिरिक्त पोषक तत्व बेकार नहीं जाता, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होती है।
स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पद्धति की विशेषता
स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई पद्धति को छिड़काव सिंचाई पद्धति भी कहते है। इस सिंचाई पद्धति में नल द्वारा खेतों में पानी भेजा जाता है। जहां राइजर पाइप की सहायता से फसलों पर पानी को छिड़काव के रूप में किया जाता है। इस सिंचाई पद्धति में पानी पौधों पर बारिश की बूंदों की तरह पड़ता है। पानी की बचत और उत्पादकता के हिसाब से स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति ज्यादा उपयोगी मानी जाती है। ये सिंचाई तकनीक चना, सरसों और दलहनी फसलों के लिए ज्यादा लाभदायक साबित हो रही है। सिंचाई के दौरान ही पानी में दवा मिला दी जाती है, जो पौधे की जड़ में जाती है। जिससे सिंचाई के साथ ही उर्वरक, कीटनाशक आदि को छिड़काव हो जाता है। ऐसा करने पर पानी की बर्बादी नहीं होती। पानी की कमी वाले क्षेत्रों में विधि लाभदायक साबित हो रही है।
ट्रैक्टरगुरु आपको अपडेट रखने के लिए हर माह महिंद्रा ट्रैक्टर व फार्मट्रैक ट्रैक्टर कंपनियों सहित अन्य ट्रैक्टर कंपनियों की मासिक सेल्स रिपोर्ट प्रकाशित करता है। ट्रैक्टर्स सेल्स रिपोर्ट में ट्रैक्टर की थोक व खुदरा बिक्री की राज्यवार, जिलेवार, एचपी के अनुसार जानकारी दी जाती है। साथ ही ट्रैक्टरगुरु आपको सेल्स रिपोर्ट की मासिक सदस्यता भी प्रदान करता है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।
Website - TractorGuru.in
Instagram - TractorGuru Instagram Page
Facebook - TractorGuru Facebook Page
Check On Road Price
सम्बंधित समाचार
किसानों के लिए गन्ना बीज पर ₹310 सब्सिडी, कृषि यंत्रों पर 80% तक अनुदान
संरक्षित खेती से किसानों का बढ़ेगा मुनाफा, सरकार दे रही 70% तक की सब्सिडी
इसे भी पढ़ें
सोलर ड्रायर पर 1.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी, जानें आवेदन प्रक्रिया और पात्रता
UP Allots Land to 3 Firms for Tractor, Dry Fruit Units Near Yamuna Expressway
मानसून जुलाई 2025: किसानों को राहत या मुसीबत? जानिए पूरे देश का हाल