पशुहानि की भरपाई के लिए किसान कैसे लें पशुधन सुरक्षा बीमा योजना का लाभ
जानें, क्या है पशुधन बीमा योजना और इससे मिलने वाले फायदें
भारत दूध के उत्पादन में दुनिया में नंबर वन पर आता है। यहां पर गांव में रहने वाले लोगों का पशुपालन एक अच्छा आय का स्त्रोत है। भारत सरकार दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रही है जैसे ‘डेयरी इंटरप्रेन्योर डेवलपमेंट योजना, डेयरी उद्यमिता विकास योजना, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना और नाबार्ड योजना का शुभारम्भ केंद्र सरकार द्वारा देश के लोगो को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए किया गया है। इस योजना के अंतर्गत डेयरी फार्मिंग को व्यवस्थित करने के लिए देश के ग्रामीण क्षेत्रो के लोगों को सरकार द्वारा कम ब्याज दर पर लोन दिलाया जा रहा है। देश के कई राज्य के पशुपालक इस योजना के तहत पशुपालन शुरू कर अपना खुद का व्यवसाय कर रहे है। लेकिन वर्तमान समय में पशुओं में लंपी स्किन रोग नामक खतरनाक बीमारी ने पशुपालक किसानों की समस्या बढ़ा दी है। पशुओं में लंपी स्किन रोग नामक खतरनाक बीमारी बढ़ती जा रही है। गौवंशीय पशुओं में लंपी स्किन रोग न सिर्फ राजस्थान बल्कि गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, असम, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में भी तेजी से फैल रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा पशुधन बीमा योजना आरंभ किया गया है। इस योजना के अंतर्गत पशुओं को बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। ताकि पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु के कारण आर्थिक नुकसान उठाना न पड़े। इस योजना के अंतर्गत पशुओं को बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। यह बीमा कवर गायों, भैंसों, बैल, ऊंट, भेड़, बकरी तथा सूअर को प्रदान किया जाएगा। जिसके लिए 25 से लेकर 100 रूपए तक के प्रीमियम का भुगतान करना होगा। इस प्रीमियम के भुगतान करने के बाद इन सभी पशुओं को 3 साल की अवधि के लिए बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। यदि इस 3 साल की अवधि के दौरान पशु की मृत्यु हो जाती है तो बीमा कंपनी द्वारा पशु को मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इस योजना का लाभ अनुसूचित जाति के नागरिक मुफ्त में उठा सकते हैं, तो चलिए ट्रैक्टरगुरू के इस लेख के माध्यम से योजना से जुड़ी सभी जानकारी के बारें में जानते हैं।
3 लाख 40 हजार पशुओं का हुआ बीमा
पशुओं में तेजी से बढ़ते लंपी स्किन डिजीज बीमारी से राज्य के पशुपालकों में डर का माहौल है। इस वक्त जिन पशुपालकों ने अपने पशुओं को बीमा करवाया हुआ है वह भी घबरा रहे। इस बीमारी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राज्य के पशुपालक पशुओं की मृत्यु के कारण होने वाली हानि से बचाने के लिए पंडित दीनदायल उपाध्याय पशुधन बीमा सुरक्षा योजना के तहत अपने पशुओं का बीमा करवा रहे है। हरियाणा पशुपालन विभाग के जारी ऑकडों के मुताबिक ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुधन बीमा सुरक्षा योजना’ के तहत राज्य में 3 लाख 40 हजार पशुओं का बीमा किया जा चुका है। यदि किसी कारण से इन बीमित पशुओं की मृत्यु हो जाती है, तो उसके मालिक को गाय का अधिकतम मूल्य 83000, भैंस का 88000 जबकि भारवाहक पशुओं का अधिकतम सुनिश्चित मूल्य 50000 रुपये है। इसी तरह बकरी, भेड़ और सूअर के लिए 10,000 रुपये तय बीमा राशि का भुगतान मुआवजे के रूप में दिया जाता है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य पशुओं को बीमा कवर प्रदान करना है। ताकि पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को आर्थिक हानि होने से बचाया जा सके। यदि पशु की मृत्यु होती है तो इस योजना के माध्यम से बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत एक बार प्रीमियम का भुगतान करने पर 3 साल की अवधि के लिए इंश्योरेंस कवर प्रदान किया जाता है। पंडित दीनदायल उपाध्याय पशुधन बीमा सुरक्षा योजना के अंतर्गत लगभग एक लाख पशुओं को कवर करने का लक्ष्य रखा गया था।
इन परिस्थितियों में दिया जाएगा योजना का लाभ
इस योजना के तहत किसान को 25 रूपए से लेकर 100 रूपए तक के प्रीमियम का भुगतान करना होता है। प्रीमियम का भुगतान करने पर 3 साल की अवधि के लिए इंश्योरेंस कवर प्रदान किया जाता है। यदि बीमीत पशुओं की मृत्यु करंट लगने की स्थिति में, नहर में डूबने की स्थिति में, बाढ़ के कारण मृत्यु होने की स्थिति में, आग लगने की स्थिति में, वाहन से टकराने की स्थिति में, प्राकृतिक आपदा के कारण, बीमारी से मृत्यु होने की स्थिति में, किसी भी कारण दुर्घटना की स्थिति में मौत होने पर उसके मालिक को मुआवजा के रूप में वित्तीय राशि प्रदान की जाती है।
हरियाणा पशुधन बीमा योजना की विशेषताएं/पात्रता
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुधन बीमा सुरक्षा योजना साल 2016 में हरियाणा सरकार द्वारा आरंभ किया गया था।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुधन बीमा सुरक्षा योजना का लाभ हरियाणा का स्थाई निवासी पशुपालक उठा सकते है।
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इस योजना के अंतर्गत पशुओं को बीमा कवर देने का प्रावधान किया गया है। यह बीमा कवर गाय, भैंस, बैल, ऊंट, भेड़, बकरी तथा सुअर पर प्रदान किया जाएगा।
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इसके लिए पशुपालकों 25 रूपए से लेकर 100 रूपए राशि तक के प्रीमियम का भुगतान करना पड़ेगा।
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इस योजना का लाभ अनुसूचित जाति के नागरिक निशुल्क उठा सकते है।
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योजना के तहत एक बार प्रीमियम का भुगतान करने पर 3 साल की अवधि के लिए बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।
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यदि इस अवधि के दौरान पशुओं की मृत्यु होती है तो बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
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हरियाणा पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत अब तक लगभग तीन लाख चालीस हजार पशुओं को कवर किया जा चुका हैं।
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इस योजना के माध्यम से पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालक को वित्तीय हानि से बचाया जा सकेगा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुधन बीमा सुरक्षा योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज
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आधार कार्ड
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राशन कार्ड
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निवास का प्रमाण
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पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
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मोबाइल नंबर, जो आधार कार्ड और बैंक खाते से लिंक हो
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आय प्रमाण पत्र
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जाति प्रमाण पत्र
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बैंक खाता विवरण
पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुधन बीमा सुरक्षा योजना में कैसे करें आवेदन
हरियाणा राज्य के जो इच्छुक पशुपालक किसान इस योजना के अंतर्गत अपने पशुओं का बीमा करवाना चाहते है। इसे लिए आपकों सबसे पहले आपने सभी आवश्यक दस्तावेजों को लेकर बैंक में जाना होगा। इसके बाद आपको आवेदन फॉर्म लेना होगा। फिर आवेदन फॉर्म में पूछी गयी सभी जानकारी को सावधानीपूर्वक भरना होगा। आवेदन फॉर्म भरने के बाद आपको अपने दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पेन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, आदि की फोटो कॉपी को आवेदन फॉर्म के साथ लगाना है और बैंक अधिकारी के पास सत्यापन के लिए जमा करना होगा। इसके अलावा ऑनलाईन आवेदन के लिए किसान को हरियाणा पशुधन बीमा योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट से हरियाणा पशुधन बीमा योजना के लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद नये पेज पर आपको आवेदन फॉर्म को डाउलोड करना होगा। आवेदन फॉर्म को डाउनलोड करके प्रिंट लेकर इस फॉर्म पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज कर, आवेदन पत्र संबंधित विभाग में जमा करना होगा। इस प्रकार आप हरियाणा पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत आवेदन कर पाएंगे।
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