रबी सीजन में किसानों को गेहूं, राई, सरसों और मसूर के बीज पर अनुदान

पोस्ट -26 अगस्त 2025 शेयर पोस्ट

रबी सीजन 2025 : उत्तर प्रदेश में बीज वितरण और क्षेत्राच्छादन के लक्ष्यों का निर्धारण किया

Distribution of seeds on subsidy in Rabi season : किसानों का कठिन परिश्रम और कृषि क्षेत्र में सरकार द्वारा लगातार चलाए जा रहे योजनाबद्ध प्रयासों के चलते खरीफ सत्र 2025 में, फसलों की बुवाई का कुल रकबा में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। इस बार धान यानी चावल की बुवाई में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। इस बीच उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी है। प्रदेश सरकार ने आगामी रबी सीजन के लिए किसानों को खाद, बीज आदि समय पर उपलब्ध कराने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में कृषि भवन सभागार में कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ रबी 2025-26 की तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी रबी सत्र में बीज वितरण और क्षेत्र आच्छादन का लक्ष्य निर्धारण किया गया है। इस रबी सत्र के लिए 141 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 2.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र गन्ने के साथ सहफसली खेती के लिए निर्धारित किया गया है। इस सत्र के लिए गांव-गांव में किसानों को 10 लाख क्विंटल सस्ता बीज और 12.80 लाख फ्री मिनी किट दिए जाएंगे। इसमें किसानों को गेहूं, राई, सरसों और मसूर के बीज के लिए अनुदान भी मिलेगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

इस सत्र में किसानों को दिया जाएगा गुणवत्ता युक्त बीज (Quality seeds will be given to farmers in this session)

दरअसल, किसानों को गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्ध कराने की दिशा में यूपी सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं। इस सत्र में किसानों को 10 लाख क्विंटल गेहूं बीज अनुदान पर दिया जाएगा। गन्ना की खेती करने वाले उत्पादक किसानों को शीतकालीन गन्ने के साथ सहफसली खेती के लिए 7080 क्विंटल राई और सरसों तथा 12500 क्विंटल मसूर के बीज निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा, प्रदेश सरकार द्वारा 6.50 लाख दलहनी एवं तिलहनी फसलों के बीज मिनीकिट तथा भारत सरकार के सहयोग से 5.41 लाख दलहनी बीज मिनीकिट भी निःशुल्क यानी फ्री वितरित किए जाएंगे। 

कराना होगा पोर्टल पर पंजीकरण (Registration has to be done on the portal)

कृषि अधिकारी के मुताबिक, आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी, जिससे लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो और वास्तविक किसानों को ही योजना का लाभ मिले। अगर आवेदनों की संख्या अधिक हुई तो चयन के लिए ई-लॉटरी प्रणाली अपनाई जाएगी। लाभ उठाने के लिए किसानों को पहले से पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। तोरिया बीज मिनीकिट के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 अगस्त 2025 कर दी गई है। यानी किसान अब 31 अगस्त तक कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण करा सकते हैं। इसके बाद 1 सितंबर से अन्य फसलों के बीज मिनीकिट के लिए पंजीकरण प्रारंभ होगा। 

पीओएस मशीनों के माध्यम से बीज वितरण व्यवस्था (Seed distribution system through POS machines)

राज्य सहायतित निःशुल्क तिलहन बीज मिनी किट वितरण, प्रदर्शन एवं प्रसार कार्यक्रम के तहत किसानों को तोरिया फसल का 2 किलोग्राम बीज मिनी किट निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। एक किसान को केवल एक बीज मिनीकिट मिलेगा और चयनित किसानों को POS मशीन के माध्यम से राजकीय कृषि बीज भण्डारों से बीज वितरित किए जाएंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि पीओएस मशीनों के माध्यम से बीज वितरण की व्यवस्था से किसानों का विश्वास बढ़ा है और बीज की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश सरकार का संकल्प है कि अन्नदाता किसानों को समय पर पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराया जाए, जिससे उत्पादन में वृद्धि हो सके और प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकोनोमी’ के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिले।

प्रदेश में खरीफ फसलों की बुवाई में वृद्धि (Increase in sowing of Kharif crops in the state)

रबी की तैयारी बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रदेश में खरीफ फसलों की बुवाई में वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 के खरीफ सीजन में 91.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी, जो बढ़कर वर्ष 2024 में 105.93 लाख हेक्टेयर हो गई है। यह लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी तरह वर्ष 2015-16 में रबी, खरीफ एवं गन्ना मिलाकर 225.87 लाख हेक्टेयर में खेती होती थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 274.22 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। उर्वरक खपत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2016 खरीफ में 23 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खपत हुई थी, जबकि खरीफ 2024 में यह बढ़कर 39 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। इस वर्ष खरीफ (2025) में 19 अगस्त तक किसानों द्वारा 32.07 लाख मीट्रिक टन यूरिया क्रय किया जा चुका है, जबकि अभी खरीफ सीजन समाप्त होने में एक महीने से अधिक का समय शेष है। पिछले वर्ष इसी समान अवधि तक 27.86 लाख मीट्रिक टन यूरिया की बिक्री हुई थी, जो इस वर्ष की तुलना में 4.21 लाख मीट्रिक टन कम थी।

किसानों को मात्र 266 रुपये में यूरिया खाद (Farmers will get urea fertilizer for only Rs 266)

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार के साथ लगातार समन्वय किया है। 1 अप्रैल 2025 को प्रदेश में यूरिया का स्टॉक 12.52 लाख मीट्रिक टन था। इसके बाद 25.45 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया मंगाया गया, जिससे कुल उपलब्धता 37.97 लाख मीट्रिक टन हो गई, जिसमें से 32.07 लाख मीट्रिक टन किसानों द्वारा पहले ही क्रय कर लिया गया है और वर्तमान में लगभग 6 लाख मीट्रिक टन यूरिया किसानों के लिए उपलब्ध है। विश्व बाजार में उर्वरकों के दामों में भारी वृद्धि के बावजूद किसानों पर बोझ न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने सब्सिडी की राशि में लगातार बढ़ोतरी की है और विक्रय मूल्य को स्थिर रखा है। उदाहरण स्वरूप यूरिया का वास्तविक बाजार मूल्य अभी 2174 रुपए प्रति बोरी (50kg) है, लेकिन अनुदान के बाद यह किसानों को मात्र 266 रुपए में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी प्रकार डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी खाद पर भी सरकार द्वारा भारी सब्सिडी दी जा रही है।

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