धान की खेती: धान की उन्नत किस्में का करें इस्तेमाल पैदावार के साथ होगी ज्यादा कमाई
धान की किस्म : धान की बंपर पैदावार देने वाली उन्नत किस्में, बंपर पैदावार के साथ ज्यादा कमाई
धान की खेती पूरे भारत में खरीफ सीजन में की जाती है। बिहार, पंजाब, हरियाणा, झाारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में धान की फसल मुख्य रूप से मानसून में लगाई जाती है। इन राज्यों में लाखों-करोड़ों किसान मानसून के वक्त धान की खेती करते हैं। धान उत्पादक इन सभी प्रमुख राज्यों में मिट्टी एवं जलवायु के अनुसार अपनी अलग-अलग धान की खास किस्में है जैसे बिहार राज्य का मर्चा धान और छत्तीसगढ़ का दुबराज, विष्णु भोग एवं लुचई आदि सुगंधित धान की पॉपुलर किस्में है। फिलहाल, देश में रबी फसलों की कटाई, गहाई और भंडारण का कार्य किसानों द्वारा पूरा किया जा चुका है। किसानों के खेत इस समय खाली है। इन खाली खेतों में दो महीने के पश्चात मानसून सीजन में खरीफ फसलों में धान की बुवाई शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में अभी किसान धान के खेतों की रोपाई करने के लिए धान की नर्सरी लगाने की तैयारी करने में लगे हुए हैं। नर्सरी लगाने के लिए खाद-बीज जुटाने का काम कर रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि किसान धान की अच्छी क्वालिटी की अधिक पैदावार देने वाली धान किस्मों की ही नर्सरी में बुवाई करें। धान की खेती करने के लिए किसान ऐसी किस्मों का चयन करें, जिनमें कीड़े और बीमारियां की संभावना कम रहे। ऐसे में हम किसानों भाईयो को धान की कुछ ऐसी खास वैराइटीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी खेती कर धान की बंपर पैदावार कर सकते हैं। ट्रैक्टर गुरु के इस लेख में धान की कुछ उन्नत किस्मों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरे भारत में धान की लगभग 128 किस्मों का इस्तेमाल खेती के लिए मुख्य रूप से किया जाता है।
धान की अच्छी पैदावार देने वाली कुछ प्रमख वैराइटीज
भारत में मिट्टी और जलवायु के हिसाब से धान की खेती के लिए बासमती-370, पूसा सुगंध 3, मकराम, डीआरआर 310, हाइब्रिड -620, पीएचबी -71, एनडीआर- 359, पूसा 1460, सीएसआर-10 आईआर 64, आईआर36, पीआर 122, अनामिका और एनडीआर 359 प्रमुख वैराइटीज का प्रयोग मुख्य रूप से किया जाता है। बता दें कि पिछले साल भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा नई दिल्ली ने बासमती धान की मुख्य तीन पुरानी किस्मों में सुधार कर बासमती धान की 1847, 1885 और 1886 तीन नई किस्मों को विकसित किया है, जो बिना कीटनाशक प्रयोग के अधिक पैदावार देने में सक्षम है।
पूसासुगंध 3 : पूसासुगंध 3 अधिक पैदावार देने वाली सुगंधित बासमती धान की एक बौनी किस्म है। पूसा द्वारा धान की इस किस्म को साल 2001 में बासमती चावल उगाने वाले राज्यों पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू कश्मीर के लिए जारी किया गया था। इन राज्यों में पूसा सुगंध 3 किस्म की रोपाई जून के दूसरे सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह के दौरान की जाती है।
पूसा 1460 : धान की यह वैराइटी उत्तम है। इस वैराइटी के धान का पौधा आकार में छोटा होता है। धान की इस किस्म का दाना छोटा और पतला होता है। रोपाई के 120 दिन से 125 दिन पश्चात इसकी फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। धान की इस किस्म की पैदावार क्षमता लगभग 50 से 55 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक है। ऐसे में किसान भाई धान की खेती करने के लिए पूसा 1460 की किस्म का प्रयोग कर सकते हैं।
एनडीआर 359 : धान की यह किस्म 130 से 135 दिनों में पककर कटने लायक तैयार हो जाती है। देखा जाए, तो धान की यह किस्म शीघ्र पकने वाली है। इस किस्म में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा और असम राज्यों में प्रयोग किया जाता है।
पीआर 122 : धान की इस किस्म को मुख्य रूप से पंजाब की मिट्टी व जलवायु के अनुरूप विकसित किया है। यह किस्म पकने में अधिकतम समय लेती है। धान की यह किस्म लगभग 140 से 147 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। पीआर 122 किस्म की औसतन पैदावार क्षमता 30 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ है।
आईआर 36 : आईआर 36 सूखा-1 किस्त सूखाबर्दाश्त करने वाले धान की एक उन्नत किस्म है। अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक द्वारा इस किस्म को कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। धान की इस किस्म से किसानों को कम समय और कम पानी में अच्छी पैदावार प्राप्त हो जाती है। आईआर 36 नामक धान की यह किस्म 110 से 115 दिन में पककर कटाई के लिए तैयार होने वाली सूखा किस्म है। जलवायु और मिट्टी के अनुकूल यह किस्म किसानों को 45 से 50 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक की पैदावार दे सकती है।
अनामिका : अनामिका धान की एक उन्नत प्रजाति है। धान की इस प्रजाति की खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल बिहार, उड़ीसा और असम में की जाती है। धान की ये किस्म 140 से 147 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। भारत में बोये जाने वाले अन्य धान की प्रजातियों की तुलना में धान की यह किस्म अधिक पैदावार देने वाली प्रजाति है। अनामिका धान के दाने मोटे और लंबे होते हैं।
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