पशुओं में फैल रहा है लंपी स्किन रोग, डेयरी फॉर्म मालिक करें ये खास उपाय
जानें, पशुओं में लंपी स्किन रोग के बचाव का तरीका और सरकारी प्रयास के बारे में
देश में खेती के बाद किसानों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। लेकिन वर्तमान समय में पशुओं में लंपी स्किन रोग नामक खतरनाक बीमारी ने पशुपालक किसानों की समस्या बढ़ा दी है। पशुओं में लंपी स्किन रोग नामक खतरनाक बीमारी बढ़ती जा रही है। गौवंशीय पशुओं में लंपी स्किन रोग न सिर्फ राजस्थान बल्कि गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, असम, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में भी तेजी से फैल रहा है। राजस्थान के पशुओं में लंपी स्किन रोग नामक खतरनाक बीमारी बढ़ती जा रही है। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद देखते ही देखते करीब सवा लाख दुधारू पशु इसकी चपेट में आ गए हैं। इस पर जल्द ही काबू नहीं पाया गया तो कई जिलों में दूध की कमी हो सकती है। क्योंकि इस रोग से ग्रासित पशु दूध देना बंद या कम कर देते हैं। राजस्थान से हर रोज करीब 29.9 लाख लीटर दूध की बिक्री होती है। इस रोग की चपेट में आने से चार हजार से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। राजस्थान पशुपालन वाले सूबों में आता है। यहां पर करीब 13.9 मिलियन गाय हैं। गायों में यह बीमारी ज्यादा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया है कि राज्य सरकार गौवंशीय पशुओं के प्रति सजगता एवं संवेदनशीलता बरतते हुए रोग नियंत्रण के सभी संभावित उपाय कर रही है। इस दावे के बीच हालात का जायजा लेने 6 अगस्त को केन्द्रीय पशुपालन मंत्री के राज्य के दौरे पर आने की संभावना है। ट्रैक्टरगुरू के इस लेख के माध्यम से इस संक्रमण के लक्षण एवं बचाव के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इस जानकारी की मदद से आप अपने पशुओं की इस संक्रमण से काफी हद तक बचाव कर पाएंगे।
पशुओं को कर देती है कमजोर
पशुपालन विभाग का कहना है कि जिस प्रकार इंसानों में कोरोना फैला था उसी तरह अब पशुओं में खासतौर पर गायों में एक संक्रामक बीमारी फैली है। इस बीमारी का नाम है लंपी स्किन रोग है। यह रोग गाय एवं भैंस में पॉक्स विषाणु (कैप्रीपॉक्स वायरस) के संक्रमण से होता है। संक्रमण हस्तांतरण विषाणु के वाहक जैसे किलनी, मच्छर एवं मक्खी से फैलता है। संक्रमित पशु के शरीर पर बैठने वाली किलनी, मच्छर व मवेशी जब स्वस्थ पशु के शरीर पर पहुंचते हैं, तो संक्रमण उनके अंदर भी पहुंच जाता है। बीमार पशुओं को एक से दूसरे जगह ले जाने या उसके संपर्क में आने वाले पशु भी संक्रमित हो जाते हैं। इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद पशुओं की इम्यूनिटी डाउन हो जाती है, यह कह सकते हैं कि पशु काफी कमजोर हो जाता है, जिससे गाय दूध देना तक बंद कर देती है और यह संक्रमण एक पशुओं से दूसरे में जल्द फैलता है।
राजस्थान के इन जिलों में ज्यादा है संक्रमण
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद यह संक्रमण पशुओं में तेजी से फैल रहा है। इससे राजस्थान के जैसलमेर, जालौर, बाड़मेर, पाली, सिरोही, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, चुरू, जयपुर, सीकर, झुंझुनू, उदयपुर, अजमेर व बीकानेर आदि जिलों में यह संक्रमण पशुओं में फैल चुका है। राज्य सरकार के मुताबिक राज्य में अब तक 1.21 लाख पशु इस बीमार से प्रभावित हुए हैं। इनमें से 94 हजार पशुओं के उपचार के बाद 42 हजार ठीक हुए हैं। उन्होंने कहा कि पशुधन राजस्थान के किसानों की जीवन रेखा है। गौवंश पशुपालकों को अकाल की स्थिति में आर्थिक संबल प्रदान करते हैं। सदियों से पशुपालक पशुधन के बल पर विपरित परिस्थितियों से लड़ते आ रहे हैं।
पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर
मुख्यमंत्री ने बताया कि आपातकालीन परिस्थियितों को देखते हुए पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर है। विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए राजस्थान के प्रत्येक जिलों मुख्यालय पर कंट्रोल रूम भी बनाया है। यह बीमारी संक्रमित पशु के संपर्क में आने या किलनी, मच्छर एवं मक्खी द्वारा दूसरे पशुओं में फैलता है। लंपी स्कीन डिजीज कोरोना वायरस की तरह पशुओं में फैल रहा है। बीमारी की अभी तक वैक्सीन नहीं आई है। पशुओं को संक्रमित पशुओं से दूर रखकर ही या समय पर उपचार से ही बचाया जा सकता है। विभाग ने बीमारी को फैलने से रोकने के लिए पशुपालकों से अपील की है कि स्वस्थ व बीमारी पशुओं को अलग-अलग कर दें। उन्होंने कहा आपातकालीन आवश्यक औषधियां खरीदने के लिए डिवीजन स्तरीय अजमेर, बीकानेर और जोधपुर कार्यालयों को 8 से 12 लाख रुपये और बाकी प्रभावित जिलों को 2 से 8 लाख रुपये सहित कुल 106 लाख की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है। यह रकम पूर्व में आपातकालीन बजट में समस्त जिला स्तरीय कार्यालयों तथा बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालयों को आवंटित राशि के अतिरिक्त जारी की गई है।
समय पर कराए उपचार
पशुपालन विभाग ने रोग से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। विभाग का कहना है कि संक्रमित पशु को एक जगह बांधकर रखें। उन्हें स्वस्थ पशुओं के संपर्क में न आने दें। स्वस्थ पशुओं का गोटपोक्स टीकाकरण करवाएं तथा बीमार पशुओं को बुखार एवं दर्द की दवा तथा लक्षण अनुसार उपचार करें। वायरसजनित यह रोग जूनोटिक डिजीज की श्रेणी में नहीं आता हैं, लिहाजा पशुपालक इससे अकारण भयभीत नहीं हो। बीमार गाय के गर्म दूध के सेवन से इंसानों में इसका कोई विपरीत असर अब तक सामने नहीं आया हैं। सोशल मीडिया पर चल रही इस रोग की अफवाहों से पशुपालक सतर्क रहें।
मॉनिटरिंग के लिए वाहनों की स्वीकृत
दरअसल, गोवंश में फैल रही लंपी स्कीन डिजीज का खतरा जिले में बढ़ता जा रहा है। पशुपालकों ने बचाव को लेकर ध्यान नहीं दिया तो एक-दूसरे मवेशी के संपर्क में आने से फैलने वाली वायरस यह बीमारी पूरे राज्य में फैल सकती है। राज्य में आपातकालीन परिस्थितियों को देखते हुए अन्य जिलों के औषधि भंडारों में उपलब्ध औषधियां प्रभावित जिलों में भेजी जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि रोगी पशुओं का उपचार और प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए 30 अतिरिक्त वाहनों की स्वीकृति जारी की गई है। इस रोग की निगरानी के लिए प्रभावित जिलों के साथ-साथ जयपुर मुख्यालय पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। सभी जिला कलक्टर रोग नियंत्रण के लिए अपने-अपने जिला मुख्यालय पर कंट्रोल रूम स्थापित कर जिले के सभी ब्लॉक स्तरीय नोडल अधिकारियों को भी रोग नियंत्रण के लिए क्षेत्र में सर्वे व प्रभावित गांवों में शिविर लगाकर समुचित उपचार व्यवस्था करने के दिशा-निर्देशित कर रहे हैं।
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