भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में गेहूं की सबसे ज्यादा मांग रहती है। गेहूं के आटे से रोटी, बिस्किट आदि से लेकर अनेक खाद्य वस्तुएं बनाई जाती है। अभी तक आपने गेहूं की कुछ उन्नत किस्मों के नाम ही सुने होंगे जो ज्यादा पैदावार देती हैं जैसे शरबती गेहूं सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन अब इससे भी बेहतर गुणवत्ता वाला गेहूं आ गया है जिसे नीला गेहूं के नाम से जाना जाता है। इसका रंग नीला होता है। इस गेहूं में सेहत के लिए चौंकाने वाले पौष्टिक तत्व होने के कारण बाजार में इसकी विशेष डिमांड है। अभी नीले गेहूं की खेती मध्यप्रदेश के कुछ गिने-चुने हिस्सों में ही की जा रही है, यदि किसान इस गेहूं की खेती को व्यापक स्तर पर शुरू करें तो वे इसकी उपज से मालामाल हो सकते हैं। नीले गेहूं की खेती कैसे की जाती है? इसकी क्या-क्या खासियत हैं और यह गेहूं सेहत के लिए कितना लाभदायक? इसकी पूरी जानकारी ट्रैक्टर गुरू की इस पोस्ट में आपको उपलब्ध कराई जा रही है। इसे अवश्य पढ़ें और शेयर करें।
बता दें कि काले गेहूं के बाद अब नीले गेहूं की खेती में भी किसानों के लिए कमाई की अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। इसकी खेती साधारण गेहूं की तरह से ही होती है, इसमें कोई विशेष विधि अभी तक सामने नहीं आई है लेकिन इसका बीज विशेष तकनीक से तैयार किया गया। उत्तरप्रदेश के कृषि विभाग ने किसानों के लिए चैन्नई से नीले गेहूं के बीज मंगवाए हैं। इसके बाद यूपी के भदोही में कुछ जागरूक किसानों ने नीले गेहूं की खेती की शुरूआत की। इससे इन किसानों को नीले गेहूं की फसल में साधारण गेहूं और काले गेहूं से भी ज्यादा कमाई की संभावनाएं नजर आईं। इसमें सेहत के कई खास गुण होने से इसकी डिमांड विदेशों तक में हो रही है।
नीले गेहूं की खेती में बहुत अधिक मुनाफा होने के कारण मध्यप्रदेश के किसानों ने भी पहली बार इसकी खेती कर पैदावार ली तो उन्हे इस गेहूं के लिए कई देशों से एक्सपोर्ट ऑर्डर मिलना शुरू हो गए। यह महंगे दामों पर बिकने वाला गेहूं है। मध्यप्रदेश के किसान अब नीले गेहूं की खेती करने में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे हैं। इससे इनकी आमदनी तेजी से बढ़ रही है।
नीला गेहूं स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी माना जाता है। इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि इस गेहूं में कोलेस्ट्रॉल लेवल और ब्लड शुगर लेवल के साथ वसा को कम करने की क्षमता है। इसके आटे से बनाए जाने वाले बेकरी आइटम जैसे रोटी, ब्रेड, बिस्किट आदि का रंग भी नीला ही रहता है। देखने में ये आकर्षक होता है। नीला गेहूं सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होने की वजह से इसकी बाजार रेट अन्य गेहूं की किस्मों के मुकाबले लगभग दोगुना रहती है। इस गेहूं की फसल में कीटनाशक आदि का प्रकोप कम होता है। इस गेहूं की पैदावार भी ज्यादा होती है।
भारत में गेंहूं की खेती करने में कई राज्य अग्रणी हैं। गेहूं की खेती उत्तरी भारत में ज्यादा होती है। सबसे अधिक गेहूं उत्पादन वाले राज्यों में मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, पंजाब, झारखंड, पश्चिमी बंगाल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर शामिल है।
भारत में गेहूं की कई अच्छी किस्में प्रचलित हैं। इनमें वीएल 832, वीएल 804, एच.एस-365, , एच.एस-240, एच.डी-2687, डब्ल्यू.एच-147, डब्ल्यू.एच-542, पी.बी डब्ल्यू-343 , डब्ल्यू.एच-896 (डी), पी.डी.डब्ल्यू-233 (डी), यू.पी-2338, पी.बी.डब्ल्यू -502, श्रेष्ठ (एच.डी-2687), आदित्य (एच.डी 2781), एच.डब्ल्यू -2044, एच.डब्ल्यू-1085, एन.पी-200 (डी.आई), एच.डब्ल्यू-741 आदि उम्दा किस्में हैं। इनके अलावा अब काले गेहूं और नीले गेहूं की किस्में भी आ गई हैं। इनकी खेती भी की शुरूआत की जा चुकी है।
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