जानें ट्रैक्टर PTO के प्रकार, काम करने का तरीका और खेती में महत्व

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ट्रैक्टर में क्या होती है PTO प्रणाली और खेती के उपकरणों के लिए कितनी जरूरी है

कृषि ट्रैक्टर में इंजन, हाइड्रोलिक सिस्टम, ट्रांसमिशन, क्लच और ब्रेक जैसे कई महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। इसके अलावा, ट्रैक्टर में एक ऐसी अहम प्रणाली भी होती है, जो उसे केवल खींचने वाले इंजन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक बहुउपयोगी (मल्टीपर्पज) कृषि मशीन में बदल देती है। इसे पीटीओ (PTO - Power Take-Off) प्रणाली कहा जाता है। यह ट्रैक्टर के इंजन से मिलने वाली पावर को विभिन्न कृषि उपकरणों तक पहुंचाती है, जिससे रोटावेटर, थ्रेशर, स्प्रेयर, रीपर और अन्य पीटीओ संचालित मशीनें आसानी चलाई जा सकती हैं। इसलिए नया ट्रैक्टर खरीदते समय इंजन पावर के साथ-साथ PTO के प्रकार और उसकी क्षमता को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

यदि आप किसान हैं और एक नया ट्रैक्टर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह विस्तृत ट्रैक्टर PTO गाइड आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इसमें हम जानेंगे कि पीटीओ प्रणाली क्या है, यह कैसे काम करती है, इसके प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं और आधुनिक खेती में इसकी क्या भूमिका है।

क्या होती है PTO प्रणाली?

पीटीओ (PTO - Power Take-Off) ट्रैक्टर के पिछले हिस्से में लगा एक घूमने वाला शाफ्ट (लोहे की रोटेटिंग रॉड) होता है, जिसे आमतौर पर पीटीओ शाफ्ट कहा जाता है। अधिकांश 30 से 100 HP श्रेणी के ट्रैक्टरों में 6-स्प्लाइन (6-Spline) पीटीओ शाफ्ट का उपयोग किया जाता है। यह एक यांत्रिक प्रणाली है, जो ट्रैक्टर के इंजन से उत्पन्न शक्ति को पीटीओ शाफ्ट के माध्यम से विभिन्न कृषि उपकरणों तक पहुंचाती है। 

कैसे काम करती है?

जब ट्रैक्टर का इंजन चलता है और PTO सिस्टम को चालू किया जाता है, तो यह शाफ्ट निर्धारित 540 RPM गति से घूमता है। इसके साथ जुड़े रोटावेटर, थ्रेशर, रीपर, स्प्रेयर, बेलर और अन्य PTO संचालित कृषि उपकरणों को आवश्यक शक्ति मिलती है। यही कारण है कि ये मशीनें अलग इंजन के बिना केवल ट्रैक्टर की शक्ति से आसानी से संचालित हो जाती हैं। पीटीओ सिस्टम इंजन और ट्रांसमिशन से जुड़ा होता है। चालक द्वारा पीटीओ लीवर या स्विच को सक्रिय करने पर इंजन की शक्ति PTO शाफ्ट तक पहुंचती है। यह घूमने वाली शक्ति (Rotational Power) जब इस शाफ्ट से जुडे़ कृषि उपकरण तक जाती है, तो वह मशीन भी ट्रैक्टर इंजन की ताकत से घूमने लगती है। अलग-अलग ट्रैक्टरों में पीटीओ को क्लच, लीवर या इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिक सिस्टम के माध्यम से ऑपरेटर किया जा सकता है।

ट्रैक्टर पीटीओ (PTO) के मुख्य प्रकार

आधुनिकता के इस दौर में ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने पावर टेक ऑफ (PTO) सिस्टम को काफी एडवांस और सुविधाजनक बना दिया है। आमतौर पर भारतीय कृषि ट्रैक्टरों में निम्न पीटीओ प्रकार देखने को मिलते है, जो नीचे दिए गए प्रकार से हैं:

1. स्टैंडर्ड पीटीओ (Standard PTO)

यह सबसे आम और पारंपरिक PTO प्रकार है। यह आमतौर पर 540 RPM (चक्कर प्रति मिनट) की स्टैंडर्ड स्पीड पर काम करता है। भारत में मिलने वाले अधिकांश कृषि उपकरण, जैसे रोटावेटर, थ्रेशर और स्प्रेयर, इसी 540 की स्टैंडर्ड स्पीड के अनुसार डिजाइन किए जाते हैं। वहीं, अधिक एचपी वाले बड़े ट्रैक्टरों में 1000 RPM PTO का विकल्प भी उपलब्ध होता है। 

2. इकोनॉमी पीटीओ (Eco PTO / CR-PTO)

यह पीटीओ तकनीक आज के समय में किसानों के लिए सबसे बड़ा डीजल सेवर साबित हो रही है। इस प्रणाली में कम इंजन RPM पर भी आवश्यक 540 आरपीएम PTO स्पीड प्राप्त की जा सकती है। जब किसान को कोई हल्का काम करना हो (जैसे वॉटर पंप या कीटनाशक स्प्रेयर चलाना), तो वह इकोनॉमी मोड लगा सकता है। इससे 20 से 25% तक डीजल की सीधी बचत होती है और ट्रैक्टर अधिक ईंधन दक्षता के साथ काम करता रहता है।

3. रिवर्स पीटीओ (Reverse PTO)

आधुनिक ट्रैक्टरों में अब रिवर्स PTO (Reverse PTO) की सुविधा भी दी जाने लगी है। इसका उपयोग विशेष परिस्थितियों में किया जाता है, खासकर तब जब किसी कृषि उपकरण में रुकावट आ जाए। सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से यह फीचर बेहद उपयोगी साबित होता है। रोटावेटर या थ्रेशर चलाते समय यदि उसमें गीली फसल, सूखी घास, रस्सी या अन्य अवशेष फंस जाएं, तो रिवर्स PTO की मदद से PTO शाफ्ट को विपरीत दिशा में घुमाकर फंसी हुई सामग्री बिना हाथ लगाए या बिना किसी दुर्घटना के जोखिम के आसानी से बाहर निकल जाता है।

4. इंडिपेंडेंट पीटीओ (IPTO)

सामान्य और पारंपरिक पीटीओ को रोकने के लिए मुख्य क्लच पैडल को पूरा दबाना पड़ता था, जिससे ट्रैक्टर भी रुक जाता था। इंडिपेंडेंट पीटीओ को ट्रैक्टर की गति से अलग नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए ट्रैक्टर के मुख्य क्लच से अलग एक विशेष लीवर या बटन दिया जाता है। इसका फायदा यह है कि ट्रैक्टर रुका होने पर भी PTO चलता रह सकता है, जिससे थ्रेशर, स्प्रेयर और अन्य मशीनों का संचालन आसान हो जाता है।

आधुनिक खेती में पीटीओ का क्या महत्व है?

पीटीओ प्रणाली ट्रैक्टर को केवल खींचने वाली मशीन नहीं, बल्कि एक साथ कई काम करने वाला उत्पाद बनाती है। इसकी मदद से किसान एक ही ट्रैक्टर से कई प्रकार के आधुनिक और उन्नत कृषि उपकरण चला सकते हैं। पीटीओ के मदद से मुख्य रूप से इन मशीनों संचालित किया जाता है। 

  • रोटावेटर (Rotavator): मिट्टी को भुरभुरा बनाने वाले रोटावेटर के ब्लेड्स को तेजी से घुमाने के लिए पीटीओ की ताकत सबसे जरूरी है।
  • थ्रेशर (Thresher): कटाई के बाद फसल से दानों और भूसे को अलग करने वाली थ्रेशर मशीन को ट्रैक्टर के पीटीओ से जोड़कर संचालित किया जाता है। 
  • स्ट्रॉ रीपर: गेहूं या धान की कटाई के बाद बचे हुए ठूंठ (नरवाई) को बारीक काटकर भूसा बनाने वाली स्ट्रॉ रीपर मशीन को चलाने के लिए हाई-स्पीड पीटीओ पावर जरूरी है।
  • मल्चर (Mulcher): कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने वाली यह हैवी-ड्यूटी मशीन पीटीओ की हाई-स्पीड पावर से ही चलते हैं।
  • वॉटर पंप और स्प्रेयर: सिंचाई के लिए बड़े पानी के पंप और बागवानी में ऊंचे पेड़ों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़कने वाले हाई-प्रेशर ब्लोअर भी पीटीओ शाफ्ट से जुड़कर प्रेशर बनाते हैं।
  • सुपर सीडर : खेतों से पराली को बिना हटाए या बिना जलाए, सीधे धान के खड़े अवशेषों के बीच ही गेहूं की सटीक बुआई करने वाली इस आधुनिक कृषि मशीन को ट्रैक्टर की पीटीओ (PTO) पावर से संचालित किया जाता है।

ट्रैक्टर की PTO प्रणाली से जुड़ी इन बातों पर ध्यान दें?

  • ट्रैक्टर PTO संचालित कृषि उपकरणों को शक्ति उपलब्ध करता है। इसलिए इंजन HP के साथ पीटीओ HP जरूर देखें। इसका अर्थ है कि ट्रैक्टर कृषि उपकरणों को वास्तव में कितनी शक्ति उपलब्ध करा सकता है।
  • इसकी जानकारी लें कि आपके कृषि उपकरण (जैसे मल्टीक्रॉप सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, थ्रेशर, रोटावेटर, स्प्रेयर, स्ट्रॉ रीपर और बेलर) किस PTO स्पीड (जैसे 540 RPM या 540E) पर चलते हैं।
  • यदि आप मल्टीक्रॉप थ्रेशर, रोटावेटर या बेलर जैसे भारी उपकरण अधिक चलाते हैं, तो इंडिपेंडेंट पीटीओ (IPTO) या Live PTO वाला ट्रैक्टर बेहतर विकल्प हो सकता है।
  • भविष्य में उपयोग होने वाले आधुनिक कृषि उपकरणों को ध्यान में रखकर ट्रैक्टर में निवेश करें।

इसलिए नया ट्रैक्टर खरीदते समय केवल इंजन HP या माइलेज पर ही ध्यान नहीं, बल्कि पीटीओ टाइप, पीटीओ एचपी और उसकी कार्यक्षमता भी जरूर जांचें। सही इंजन पावर और PTO सिस्टम वाला ट्रैक्टर आपकी खेती की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ ईंधन की बचत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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