कीटों के प्रकोप से फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती है। फसल को हानिकारक कीटों से बचाने के लिए किसानों को हर सीजन में कीटनाशकों और उनके छिड़काव पर काफी खर्च करना पड़ता है। इससे खेती की लागत बढ़ती है और रासायनिक कीटनाशकों का लगातार इस्तेमाल उपज की गुणवत्ता भी प्रभावित करता है। इस बीच बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य के किसानों को कम लागत में आधुनिक और सुरक्षित कीट नियंत्रण तकनीक उपलब्ध कराने के लिए पौधा संरक्षण उपादान वितरण योजना के तहत सहायता दी जा रही है।
योजना के अनुसार, फसलों को हानिकारक कीटों से बचाने वाले फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप जैसे उपकरणों पर किसानों को 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य फसलों को हानिकारक कीटों से बचाना, रासायनिक कीटनाशकों पर किसानों का होने वाला खर्च कम करना और फसल को सुरक्षित रखते हुए उत्पादन बढ़ाना है। आइए जानते हैं इस योजना के तहत किसानों को कैसे मिलेगा लाभ और आवेदन की पूरी प्रक्रिया।
राज्य सरकार की पौधा संरक्षण उपादान वितरण योजना के तहत किसानों को अलग-अलग तरह के ट्रैप दिए जा रहे हैं। इनमें फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप शामिल हैं। इन उपरकणों पर 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी किसानों की दी जाएंगी। इन ट्रैप की मदद से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की निगरानी और नियंत्रण किया जा सकता है। कृषि विभाग के अनुसार, इन आधुनिक ट्रैप का सबसे ज्यादा फायदा बैंगन, मक्का, टमाटर, धान और विभिन्न प्रकार की सब्जियों सहित अन्य फसलों में कीट नियंत्रण के लिए होगा।
कृषि विभाग के अनुसार इन आधुनिक ट्रैप का सबसे ज्यादा फायदा विभिन्न प्रकार की फसलों में कीट नियंत्रण के लिए होगा। फेरोमोन ट्रैप में खास तरह के आकर्षक पदार्थ का इस्तेमाल किया जाता है, जो विशेष कीटों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इससे खेत में कीटों की मौजूदगी का पता लगाने और उनकी संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। वहीं, स्टिकी ट्रैप में चिपचिपी सतह होती है, जिस पर छोटे उड़ने वाले कीट चिपक जाते हैं। इससे कीटों की निगरानी करने के साथ उनकी संख्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है। फ्रूट फ्लाई ट्रैप का इस्तेमाल मुख्य रूप से फलों को नुकसान पहुंचाने वाली फल मक्खियों की निगरानी और नियंत्रण के लिए किया जाता है।
उद्यान निदेशालय कृषि विभाग बिहार सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अलग-अलग फसलों और कीटों के लिए फेरोमोन ट्रैप पर अलग-अलग सब्सिडी निर्धारित की गई है। धान में तना छेदक, चना में फली छेदक और बैंगन में तना एवं फल छेदक कीटों के नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप पर 96 रुपए प्रति सेट या अधिकतम 480 रुपए प्रति एकड़ तक सब्सिडी दी जाएगी।
इसी तरह, मक्का में फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण के लिए 162 रुपए प्रति सेट या अधिकतम 810 रुपए प्रति एकड़ तक सब्सिडी मिलेगी। वहीं, सब्जियों में डायमंडबैक मॉथ के लिए फेरोमोन ट्रैप पर 171 रुपए प्रति सेट या अधिकतम 855 रुपए प्रति एकड़ तक सब्सिडी दी जाएगी। इससे किसानों को कीट नियंत्रण के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने में अपनी जेब से कम खर्च करना पड़ेगा।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य खेती में रासायनिक कीटनाशकों के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल को कम करना भी है। ट्रैप आधारित कीट नियंत्रण की मदद से किसान खेत में कीटों की स्थिति पर नजर रख सकते हैं और जरूरत के अनुसार नियंत्रण के उपाय अपना सकते हैं। इससे एक ओर हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर रासायनिक कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है। पोस्टर में इस पहल को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादों के उत्पादन तथा पर्यावरण के अनुकूल कीट प्रबंधन से भी जोड़ा गया है।
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। किसान उद्यान निदेशालय कृषि विभाग बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए वेबसाइट पर ‘पौधा संरक्षण उत्पादन वितरण योजना’ लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद मांगी गई जानकारी भरें और जरूरी दस्तावेज अपलोड करके आवेदन जमा करें। आवेदन जमा होने के बाद जिला स्तर पर इसकी जांच की जाएगी। जांच में पात्र पाए जाने पर ही लाभार्थी को योजना के तहत सहायता राशि जारी की जाएगी।
यदि आप बिहार के किसान हैं और फसल को हानिकारक कीटों से बचाने के लिए फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप लगवाना चाहते हैं, तो सरकार की ओर से इन पर सब्सिडी दी जा रही है। किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सब्सिडी के लिए किसान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। योजना से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि या बागवानी विभाग के कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।
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