PM-RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत ₹1,183 करोड़ जारी
कृषि योजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने मंजूर किए ₹1,183 करोड़, जानें किसे मिलेगा लाभ
खेती-किसानी को आसान बनाने और कृषि क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पांच राज्यों के लिए 1,183.11 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त जारी करने की मंजूरी दी है। यह राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और कृषोन्नति योजना (KY) के तहत स्वीकृत की गई है।
इस राशि का इस्तेमाल सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण और कृषि विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं में किया जाएगा। इससे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और बेहतर सिंचाई सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं सरकार के इस फैसले से किसानों को क्या लाभ मिलेगा और किन कृषि योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
इन 5 राज्यों के ₹1,183 करोड़ मंजूर किए
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और त्रिपुरा के कृषि मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में राज्यों में चल रही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और कृषोन्नति योजना की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान केंद्र सरकार ने इन पांच राज्यों के लिए दोनों योजनाओं के तहत कुल ₹1,183.11 करोड़ की दूसरी मदर सैंक्शन को मंजूरी दी। इस राशि का इस्तेमाल सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने, कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने, प्राकृतिक खेती, तिलहन उत्पादन और कृषि विस्तार सेवाओं को मजबूत करने जैसे कामों में किया जाएगा।
किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को ‘टीम इंडिया’ के रूप में मिलकर काम करना होगा, ताकि किसानों तक पानी, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि मशीनें और डिजिटल सुविधाएं पहुंचाई जा सकें। इससे खेती की लागत कम करने, कृषि में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, कृषोन्नति योजना के तहत बीज विकास, फसल सुरक्षा, बागवानी और कृषि विपणन सहित कई क्षेत्रों से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। राज्यों को अपनी कृषि जरूरतों के अनुसार इन योजनाओं को लागू करने का अवसर मिलता है।
कृषि विकास के लिए किस राज्य को कितनी मिली राशि?
आंध्र प्रदेश को सबसे ज्यादा राशि
पांच राज्यों में कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए मंजूर की गई राशि में सबसे ज्यादा हिस्सा आंध्र प्रदेश को मिला है। राज्य को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत ₹296.09 करोड़ और कृषोन्नति योजना के तहत ₹113.31 करोड़ यानी कुल ₹409.40 करोड़ की दूसरी किस्त मंजूर की गई है। बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश में ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) योजना और कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में किए गए बेहतर काम की सराहना भी की।
तमिलनाडु को मिले 355.88 करोड़
तमिलनाडु के लिए कुल ₹355.88 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। इसमें पीएम-आरकेवीवाई (PM-RKVY) के तहत ₹251.79 करोड़ और कृषोन्नति योजना के तहत ₹104.09 करोड़ शामिल हैं। राज्य में खासतौर पर सूक्ष्म सिंचाई और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए किए जा रहे कामों पर जोर दिया गया है। तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-Oilseeds) के तहत भी काम किया जा रहा है।
ओडिशा के लिए ₹219.65 करोड़ की मंजूरी
ओडिशा के लिए कुल ₹219.65 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। इसमें PM-RKVY के तहत ₹117.94 करोड़ और कृषोन्नति योजना के तहत ₹101.71 करोड़ शामिल हैं। बैठक में राज्य द्वारा कृषि यंत्रीकरण (SMAM) और कृषि विस्तार के लिए उपलब्ध राशि के बेहतर इस्तेमाल की सराहना की गई।
उत्तराखंड को ₹106.67 करोड़
उत्तराखंड के लिए कुल ₹106.67 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इसमें PM-RKVY के तहत ₹65.78 करोड़ और कृषोन्नति योजना के तहत ₹40.89 करोड़ शामिल हैं। इस राशि से राज्य में प्राकृतिक खेती, कृषि ढांचे और बागवानी को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। बैठक में उत्तराखंड में परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) और मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत हुई प्रगति पर भी चर्चा की गई।
त्रिपुरा को ₹91.51 करोड़ की मंजूरी
त्रिपुरा के लिए कुल ₹91.51 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। इसमें PM-RKVY के तहत ₹36.51 करोड़ और कृषोन्नति योजना के तहत ₹55 करोड़ शामिल हैं। इस राशि का इस्तेमाल राज्य में बांस मिशन, ऑयल पाम और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
किसानों को क्या मिलेगा फायदा?
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल किसानों से जुड़ी कई कृषि योजनाओं को लागू करने में किया जाएगा। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और खेती की लागत कम करना है।
- ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसे सूक्ष्म सिंचाई उपकरणों पर सब्सिडी मिलेगी। इससे पानी की बचत करने के साथ फसलों की पैदावार बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
- कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (SMAM) के तहत किसानों को कृषि यंत्र खरीदने के लिए सब्सिडी दी जाती है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि मशीनें खरीदने में आर्थिक मदद मिल सकती है।
- इसके अलावा, सॉइल हेल्थ कार्ड, मिट्टी की जांच और डिजिटल कृषि सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों को अपनी मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार खेती की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
- फसल विविधीकरण के तहत दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। इससे खेती की लागत घटाने और किसानों का मुनाफा बढ़ाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों तक कैसे पहुंचेगी मंजूर राशि?
बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से कहा कि मंजूर की गई राशि समय पर और सही तरीके से किसानों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीन पर दिखाई दे। केंद्र सरकार की ओर से दी गई इस मंजूरी को ‘मदर सैंक्शन’ कहा जाता है। इसके बाद राज्य सरकारें अपने स्तर पर जिलावार और योजनावार राशि का आवंटन करती हैं। उन्होंने कहा अब राज्यों को यह राशि जिला स्तर तक पहुंचानी होगी। इसके बाद इसका इस्तेमाल सिंचाई सुविधाओं, कृषि यंत्रों पर सहायता और कृषि विस्तार सेवाओं जैसे कामों में किया जा सकेगा, जिससे किसानों को खेती से जुड़ी सुविधाएं मिलने में मदद होगी।
Website - TractorGuru.in
Instagram - TractorGuru Instagram Page
Facebook - TractorGuru Facebook Page
Check On Road Price
सम्बंधित समाचार
सोलर ड्रायर पर 1.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी, जानें आवेदन प्रक्रिया और पात्रता
किसानों के लिए गन्ना बीज पर ₹310 सब्सिडी, कृषि यंत्रों पर 80% तक अनुदान
इसे भी पढ़ें
UP Allots Land to 3 Firms for Tractor, Dry Fruit Units Near Yamuna Expressway
मानसून जुलाई 2025: किसानों को राहत या मुसीबत? जानिए पूरे देश का हाल