दूध के साथ गोबर-गौमूत्र से कमाई! नंदिनी योजना में ₹31 लाख तक अनुदान
दूध के साथ गौमूत्र व गोबर से भी होगी तगड़ी कमाई, जानिए सरकार का प्लान, सब्सिडी और आवेदन प्रक्रिया
पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार नंदिनी कृषक समृद्धि योजना चला रही है। इस योजना के तहत किसानों और पशुपालकों को देसी नस्ल की गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए अधिकतम ₹31.25 लाख लाख तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। योजना का उद्देश्य केवल प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि बेहतर नस्ल के गोवंश को बढ़ावा देना है और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद करना भी है। अब डेयरी से किसानों को दूध के अलावा गोबर से जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और दूसरे उत्पाद तैयार करके अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है। वहीं, गौमूत्र का इस्तेमाल जैविक खेती से जुड़े उत्पाद बनाने में किया जा सकता है।
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के अनुसार, सरकार किसानों और पशुपालकों को गाय के दूध के साथ-साथ गोबर और गौमूत्र के बेहतर उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। इसी दिशा में बुलंदशहर में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) ने गौमूत्र से प्राकृतिक खाद और कीटनाशक बनाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। सरकार की ओर से ₹10 प्रति लीटर की दर से गौमूत्र खरीदने की योजना की भी जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं कि नंदिनी कृषक समृद्धि योजना क्या है, डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए कितनी आर्थिक सहायता मिल सकती है और आवेदन कैसे किया जा सकता है।
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना: डेयरी यूनिट की स्थापना के लिए ₹31 लाख तक की सब्सिडी
उत्तर प्रदेश सरकार नंद बाबा दुग्ध मिशन (Nand Baba Milk Mission) के तहत नंदिनी कृषक समृद्धि योजना चला रही है। इस योजना के तहत 25 गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करने पर परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है। योजना के लिए साहीवाल, गिर, थारपारकर या गंगातीरी जैसी उन्नत स्वदेशी नस्लों की गायों को शामिल किया गया है। किसानों और पशुपालकों को 25 गायों की सामान्य डेयरी यूनिट पर अधिकतम ₹31.25 लाख तक का अनुदान मिल सकता है।
वहीं, 25 गायों की यूनिट में अधिकतम 5 गंगातीरी गाय शामिल करने पर अधिकतम अनुदान ₹30.50 लाख तक है। दुग्धशाला विकास विभाग, उत्तर प्रदेश की जानकारी के अनुसार, 25 गायों की सामान्य यूनिट की परियोजना लागत ₹62.50 लाख तक मानी गई है। इसमें लाभार्थी का हिस्सा 15 प्रतिशत, बैंक ऋण 35 प्रतिशत और सरकार का अनुदान 50 प्रतिशत शामिल है।
अब दूध के साथ गौमूत्र व गोबर से भी कमाई
हाल ही में यूपी के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने गायों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के जरिए गाय पालन को बढ़ावा दे रही है। योजना के तहत एक गाय पर ₹40 हजार और दो गायों पर ₹80 हजार तक की सहायता दिए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा, पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार दवाइयों और अन्य उपयोगों के लिए गौमूत्र खरीदने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे किसानों और पशुपालकों को दूध के साथ-साथ गोबर और गौमूत्र से भी अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है।
10 रुपए लीटर की दर से खरीदा जाएगा गौमूत्र
मंत्री के अनुसार, इसी पहल के तहत बुलंदशहर में गौमूत्र ₹10 प्रति लीटर की दर से खरीदने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस पहल में करीब 300 महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाया जाएगा, जिससे उन्हें प्रति लीटर ₹2 तक का मुनाफा मिलने की बात कही गई है। किसान उत्पादक संगठन (FPO) की मदद से गौमूत्र से प्राकृतिक खाद और कीटनाशक तैयार किए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इस पहल से किसानों और पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी होगी, महिलाओं को रोजगार मिलेगा और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल यह योजना पूरे उत्तर प्रदेश में लागू नहीं हुई है और इसे अभी बुलंदशहर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जा रहा है।
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में तीन चरणों में मिलता है अनुदान
इस योजना में पूरी सब्सिडी एक साथ नहीं दी जाती, बल्कि तीन चरणों में अनुदान जारी किया जाता है।
- पहला चरण: आधारभूत ढांचा तैयार करने के पश्चात इकाई लागत का 25 प्रतिशत।
- दूसरा चरण: गाय खरीदने के बाद 12.5 प्रतिशत।
- तीसरा चरण: स्थापित इकाई में कम से कम 10 गायों की संतति (बछड़ा या बछिया) पैदा होने के बाद 12.5 प्रतिशत।
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में कौन ले सकता है लाभ?
इस योजना के तहत कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार आवेदक के पास गोपालन या महिष पालन का कम से कम 3 वर्ष का अनुभव होना चाहिए और इसका प्रमाण मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा किया जाना है। इसके अलावा, आधारभूत संरचना के लिए कम से कम 0.5 एकड़ भूमि जरूरी है। चारा उत्पादन के लिए 1.5 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। भूमि स्वयं की, पैतृक/साझेदारी या कम से कम 7 वर्ष के पंजीकृत अनुबंध पर ली गई हो सकती है।
भूमि जलभराव से मुक्त होनी चाहिए। खरीदी जाने वाली गाय पहली या दूसरी बार ब्याने वाली होनी चाहिए। गाय का ब्याना 45 दिन से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। गोवंश का ईयर टैग और बीमा कराना अनिवार्य है। वहीं पहले से कामधेनु, मिनी/माइक्रो कामधेनु योजना के लाभार्थी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
किन नस्लों की गाय खरीद सकते हैं?
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में उच्च उत्पादन क्षमता वाली स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आधिकारिक योजना पेज पर साहीवाल, गिर, थारपारकर और गंगातीरी नस्लों का उल्लेख है। सरकारी जानकारी के अनुसार चयन पत्र मिलने के बाद लाभार्थी को निर्धारित समय के भीतर स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों की खरीद करनी होती है।
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन का प्रावधान है। आवेदन के बाद उसकी हार्ड कॉपी संबंधित जिले के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) या मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) कार्यालय में उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है। अगर आवेदन की संख्या निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा होती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जा सकता है।
इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समिति का प्रावधान है। आवेदन से पहले अपने जिले में योजना का लक्ष्य, आवेदन की अंतिम तारीख और वर्तमान आवेदन विंडो जरूर जांचें, क्योंकि जिले और वित्तीय वर्ष के अनुसार लक्ष्य/आवेदन कार्यक्रम बदल सकता है।
आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?
नन्द बाबा दुग्ध मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, आवेदन से पहले संबंधित विभाग से वर्तमान वर्ष की दस्तावेज सूची की पुष्टि करना बेहतर है। सामान्य तौर पर आवेदक को पहचान, बैंक, भूमि और पशुपालन से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। इनमें आधार/पहचान पत्र, बैंक खाते की जानकारी, भूमि से संबंधित दस्तावेज, पशुपालन अनुभव का प्रमाण और निर्धारित आवेदन पत्र शामिल हो सकते हैं। जिले की विज्ञप्ति और वर्तमान आवेदन दिशा-निर्देश के अनुसार अंतिम दस्तावेज सूची मान्य होगी।
योजना से किसानों को क्या फायदा होगा?
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना का फोकस केवल डेयरी की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उच्च उत्पादन क्षमता के गोवंश का संवर्धन को बढ़ावा देने पर है। योजना के जरिए पशुपालक बड़े स्तर पर डेयरी यूनिट स्थापित कर सकता है और दूध के साथ गौमूत्र व गोबर जैसे उप-उत्पादों का भी बेहतर प्रबंधन कर सकता है।
नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत डेयरी यूनिट और इकाई में निकलने वाले गोबर और गौमूत्र को सही तरीके से प्रबंधित करके पशुपालक अतिरिक्त आय के स्रोत तैयार कर सकता है। सरकार दवाइयों और अन्य कामों के लिए गोमूत्र खरीदने की योजना तैयार की है। प्रदेश सरकार के निवेश पोर्टल पर भी डेयरी क्षेत्र में गोबर अपशिष्ट से जैविक उर्वरक और बायोगैस प्लांट जैसी संभावनाओं को सूचीबद्ध किया गया है।
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