Haryana Farmers : रबी वर्ष 2025-26 के लिए सरसों व चने की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राज्यों में इस बार बायोमेट्रिक पहचान के आधार पर किसानों से उपज की खरीद होगी। इस बीच हरियाणा में तिलहन फसल (सरसों, सूरजमुखी) की खेती करने किसानों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने रेवाड़ी में होने वाली सरसों की खेती (Mustard Farming) के लिए नारनौल में एशिया की सबसे बड़ी तेल मिल (Oil Mill) और कुरुक्षेत्र में बड़ी सूरजमुखी तेल मिल (Sunflower Oil Mill) स्थापित करने की परियोजना तैयार की है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह घोषणा कुरूक्षेत्र के समानी गांव से की है। सीएम इस गांव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को सुनने आए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह परियोजनाएं जल्द ही क्रियान्वित की जाएगी और इन परियोजनाओं से लाखों किसानों को फायदा मिलेगा। सीएम नायब सिंह सैनी (CM Naib Singh Saini) ने कहा कि सुनिश्चित किया जाएगा कि इन सभी किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाए। हरियाणा देश का पहला राज्य है, जहां किसानों की सभी फसलें समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि प्रदेश में “कैच द रेन योजना” (Catch the Rain Scheme) के तहत तालाब बनाए जा रहे हैं। प्रदेशभर में इस योजना के तहत 2 हजार तालाब (Pond) बनाने का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में इस योजना के माध्यम से 2200 नए तालाबों का निर्माण (Construction of ponds) कराया जाएगा। जल संरक्षण पर बोलते हुए सीएम सैनी ने कहा कि किसानों से भी अपील की जा रही है कि वे खेतों और ग्राम पंचायत की जमीन में बरसात के पानी को एकत्रित करें, इससे जल संरक्षण (Water conservation) हो सकेगा और प्रदेश डार्क जोन से बाहर आ सकेगा।
सीएम ने कहा कि दक्षिण हरियाणा के किसान अधिक फसल पैदावार हासिल कर रहे हैं। इसी तर्ज पर उन्होंने अन्य क्षेत्रों के किसानों से जल संरक्षण के लिए टपक (ड्रिप) सिंचाई प्रणाली अपनाने और अटल भूजल योजना (Atal Groundwater Yojana) के माध्यम से तालाब बनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को अटल भूजल योजना के तहत तालाब बनाकर 86 जोनों को डार्क जोन से बाहर निकालने का प्रस्ताव दिया है और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी है।
मुख्यमंत्री सैनी ने लाडवा में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय महाविद्यालय में बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार 2.83 करोड़ रुपए के बजट से कौलापुर गांव में विकास कार्य करवा रही है। गांव के विकास के लिए मौके पर ही पंचायत के खाते में 21 लाख रुपए हस्तांतरित किए गए। इसके अलावा, उन्होंने गांव के सरपंच द्वारा रखी गई सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है।
सरकार ने इस वर्ष 89.30 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई और 128.73 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान लगाया है। हालांकि, अब सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) द्वारा रबी वर्ष 2024-25 के लिए रेपसीड-सरसों के रकबे और उत्पादन को लेकर आंकड़े जारी किए गए हैं। एसईए ने क्षेत्र सर्वेक्षण एवं सैटश्योर के साथ मिलकर सैटेलाइट के माध्यम से लगाए जाने वाले पूर्वानुमान विश्लेषण के आधार पर, सरसों का कुल रकबा 92.5 लाख हैक्टेयर होने का अनुमान लगाया है, जबकि 115.2 लाख टन उत्पादन रहने का अनुमान जारी किए हैं। उक्त आंकड़ों में रकबा तो सरकारी आंकड़ों की तुलना में मामूली रूप से अधिक है, लेकिन उत्पादन को लेकर SEA ने बड़ी गिरावट दिखाई है। हालांकि, SEA का अनुमानित सरसों फसल रकबा, पिछले साल सरकार की ओर से जारी किए गए 91.8 लाख हेक्टेयर रकबे से कम है, जो 2.5% की गिरावट दिखाता है।
SEA ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की खाद्य तेल को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता बढ़ी है, जिसके चलते भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक बनकर उभरा है। इससे देश के खजाने पर तो बुरा असर पड़ ही रहा है, साथ ही किसानों की आय पर भी गंभीर दबाव पड़ा है। तिलहन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए एसईए ने कई पहलों की शुरुआत की है। इसी क्रम में एक इनिशिटिव, 'मॉडल मस्टर्ड फार्म प्रोजेक्ट' वर्ष 2020-21 से चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2029-30 तक भारत में रेपसीड-सरसों के उत्पादन को 200 लाख टन तक बढ़ाना है। केंद्र सरकार द्वारा सरसों के लिए मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5950 रुपए, प्रति क्विंटल तय की गई है। सरकार को किसानों की हितों की सुरक्षा के लिए एमएसपी पर खरीद के लिए नैफेड और अन्य एजेंसियों का सहयोग लेना चाहिए।
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